क्या नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेगी?

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क्या नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेगी?

सारांश

आज दिल्ली की अदालत में नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सुनवाई होगी। क्या अदालत प्रवर्तन निदेशालय की चार्जशीट पर संज्ञान लेगी? यह राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला भारतीय राजनीति में चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है।

Key Takeaways

  • नेशनल हेराल्ड केस में ईडी द्वारा चार्जशीट दायर की गई है।
  • कांग्रेस के शीर्ष नेता इस मामले में आरोपी हैं।
  • अदालत आज चार्जशीट पर निर्णय लेगी।
  • कांग्रेस नेताओं ने आरोपों को 'बहुत अजीब' बताया है।

नई दिल्ली, 29 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। नेशनल हेराल्ड मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आज दिल्ली की एक अदालत महत्वपूर्ण फैसला सुनाने जा रही है। अदालत यह निर्धारित करेगी कि क्या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा प्रस्तुत चार्जशीट पर संज्ञान लिया जाए या नहीं। यह मामला राजनीतिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील रहा है और लंबे समय से मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है।

इस मामले में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस ओवरसीज प्रमुख सैम पित्रोदा, सुमन दुबे और अन्य को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत आरोपी बनाया गया है।

राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने 7 नवंबर को आदेश सुरक्षित रखते हुए ईडी से कुछ अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगे थे। अदालत ने केस रिकॉर्ड की जांच के बाद कहा था कि कुछ दस्तावेज और वित्तीय लेन-देन की जानकारी को और गहराई से देखने की आवश्यकता है।

अदालत ने कहा था, "अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने केस फाइलों की जांच के मद्देनजर आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिए हैं। आदेश 29 नवंबर को सुनाया जाएगा।"

ईडी का आरोप है कि कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने एक बड़ी 'आर्थिक साजिश' के तहत नेशनल हेराल्ड के मूल प्रकाशक एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) की 2000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति पर गलत तरीके से कब्जा किया। दावा है कि यह पूरा सौदा मात्र 50 लाख रुपए में यंग इंडियन नाम की कंपनी के माध्यम से किया गया।

यंग इंडियन में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की अधिकांश हिस्सेदारी है।

अदालत का कहना था कि लेन-देन से जुड़े दस्तावेज, कथित किराए की रसीदें और फंड फ्लो का पूरा पैटर्न विस्तार से देखने के बाद ही फैसला लिया जा सकता है। कोर्ट के अनुसार, यह जांच आवश्यक थी ताकि यह तय किया जा सके कि ईडी की शिकायत पीएमएलए के तहत संज्ञान लेने योग्य है या नहीं।

जहां ईडी इस मामले को 'गंभीर आर्थिक अपराध' और 'संपत्ति हड़पने की साजिश' बता रही है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने आरोपों को 'बहुत अजीब' ठहराया है। उनका कहना है कि यंग इंडियन का गठन कानूनी नियमों के तहत हुआ और इसमें किसी भी प्रकार का निजी लाभ शामिल नहीं है।

ईडी का यह भी आरोप है कि कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं के निर्देश पर कुछ लोगों ने वर्षों तक फर्जी अग्रिम किराया भुगतान दिखाया और नकली किराया रसीदें जारी कीं। एजेंसी के अनुसार, यह सब एजेएल की संपत्तियों पर नियंत्रण हासिल करने की एक बड़ी योजना का हिस्सा था।

नेशनल हेराल्ड से जुड़ा यह विवाद पहली बार 2012 में सामने आया था, जब भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्रायल कोर्ट में शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया था कि एजेएल के अधिग्रहण की प्रक्रिया में कांग्रेस नेताओं ने धोखाधड़ी और भरोसे का उल्लंघन किया।

Point of View

जो भारतीय राजनीति में गहरे असर डाल सकता है। यह मामला दलील और विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण है। अदालत के निर्णय से यह तय होगा कि क्या प्रवर्तन निदेशालय की शिकायतें कानूनी रूप से मान्य हैं या नहीं।
NationPress
29/11/2025

Frequently Asked Questions

नेशनल हेराल्ड मामला क्या है?
नेशनल हेराल्ड मामला एक मनी लॉन्ड्रिंग केस है जिसमें कांग्रेस के प्रमुख नेताओं पर आरोप लगे हैं।
इस मामले में अदालत का निर्णय कब आएगा?
अदालत का निर्णय 29 नवंबर को सुनाया जाएगा।
ईडी का आरोप क्या है?
ईडी का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं ने 2000 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति पर गलत तरीके से कब्जा किया।
इस मामले में कौन-कौन आरोपित हैं?
इस मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य कांग्रेस नेता आरोपित हैं।
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