क्या दिल्ली हाईकोर्ट ने महुआ मोइत्रा केस में लोकपाल को फैसला लेने के लिए दो महीने का समय दिया?

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क्या दिल्ली हाईकोर्ट ने महुआ मोइत्रा केस में लोकपाल को फैसला लेने के लिए दो महीने का समय दिया?

सारांश

दिल्ली हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने के लिए लोकपाल को दो महीने का समय दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा। यह मामला राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

Key Takeaways

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल को दो महीने का समय दिया है।
  • महुआ मोइत्रा ने लोकपाल के आदेश को चुनौती दी थी।
  • सीबीआई ने 28 जुलाई को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी।
  • इस मामले में समयबद्ध निर्णय महत्वपूर्ण है।
  • महुआ मोइत्रा का कहना है कि उन्हें उचित मौका नहीं मिला।

नई दिल्ली, 23 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘कैश फॉर क्वेरी’ मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी देने के मुद्दे पर लोकपाल को दो महीने का समय दिया है। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि इसके बाद कोई और समय नहीं दिया जाएगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि लोकपाल को निर्धारित समयसीमा के भीतर ही अपना फैसला करना होगा और इस मामले में आगे किसी भी तरह की देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच से जुड़े मामलों में समयबद्ध निर्णय बेहद जरूरी है।

पिछले साल 19 दिसंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि उसने लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम की गलत व्याख्या की है। कोर्ट ने लोकपाल को निर्देश दिया था कि वह इस मुद्दे पर एक महीने के भीतर नए सिरे से विचार करे।

हालांकि लोकपाल निर्धारित अवधि में फैसला नहीं कर सका और उसने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करते हुए समयसीमा बढ़ाने की मांग की थी। इसी याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अब दो महीने की अंतिम मोहलत दी है और साफ कर दिया है कि इसके बाद कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा।

इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने कैश फॉर क्वेरी मामले में महुआ मोइत्रा को राहत दी थी। हाईकोर्ट ने इस मामले में लोकपाल के आदेश को रद्द कर दिया था। टीएमसी सांसद ने लोकपाल के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के अनुसार लोकपाल ने उनकी ओर से रखे गए तर्कों पर विचार किए बिना आदेश पारित किया। मोइत्रा ने यह भी आरोप लगाया था कि सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी देने का आदेश गलत है और लोकपाल अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत है। साथ ही यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है।

सीबीआई ने मोइत्रा पर गंभीर आरोप लगाए थे। जांच एजेंसी ने 28 जुलाई को अपनी जांच रिपोर्ट लोकपाल को सौंप दी थी।

लोकपाल की सिफारिश पर सीबीआई ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत पिछले साल 21 मार्च को महुआ और हीरानंदानी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

पिछली लोकसभा में मोइत्रा को दिसंबर 2023 में 'अनैतिक आचरण' के लिए सदन से निष्कासित कर दिया गया था। उनका कहना था कि यह साजिश के तहत किया गया और बिना सफाई का मौका दिए उन्हें सदन से निष्कासित किया गया, और उन्होंने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

Point of View

ताकि न्याय का मार्ग प्रशस्त हो सके।
NationPress
10/03/2026

Frequently Asked Questions

महुआ मोइत्रा के खिलाफ यह मामला क्या है?
यह मामला 'कैश फॉर क्वेरी' से संबंधित है, जिसमें महुआ मोइत्रा पर आरोप है कि उन्होंने सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी देने के लिए लोकपाल के आदेश का उल्लंघन किया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल को कितने समय का विस्तार दिया?
दिल्ली हाईकोर्ट ने लोकपाल को दो महीने का समय दिया है।
महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट में क्या चुनौती दी थी?
महुआ मोइत्रा ने लोकपाल के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि आदेश उनके अधिकारों का उल्लंघन है।
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