दिल्ली हाई कोर्ट ने NIA को दी राहत: म्यांमार आतंकी प्रशिक्षण मामले में 180 दिन की जांच अवधि बरकरार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 4 अगस्त 2026 को म्यांमार में आतंकी प्रशिक्षण देने के आरोप में गिरफ्तार 7 विदेशी नागरिकों — 6 यूक्रेनी और 1 अमेरिकी — के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की जांच अवधि 180 दिन तक बढ़ाने के पटियाला हाउस कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने आरोपियों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
पटियाला हाउस कोर्ट ने NIA की अर्जी पर गैरकानूनी गतिविधियाँ (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज इस मामले में जांच की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन कर दी थी। एजेंसी ने अदालत को बताया कि यह मामला पैन-इंडिया और ट्रांस-नेशनल आपराधिक साजिश से जुड़ा है, जिसकी जड़ें कई देशों तक फैली हैं। बड़े नेटवर्क की कड़ियाँ जोड़ने के लिए अतिरिक्त समय आवश्यक था।
आरोपियों पर क्या हैं आरोप
NIA के अनुसार, गिरफ्तार विदेशी नागरिक म्यांमार के एथनिक सशस्त्र गुटों के संपर्क में थे और उन्होंने आतंकी संगठनों को हथियार चलाने तथा ड्रोन उड़ाने की विशेष ट्रेनिंग दी। आरोप है कि इन लोगों ने यूरोप से ड्रोन मंगवाए, उन्हें म्यांमार भेजा और वहाँ आतंकियों को उनके संचालन का प्रशिक्षण दिया। म्यांमार से भारत लौटने के बाद एजेंसी ने इन सभी को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक को कोलकाता से गिरफ्तार किया गया। तीन यूक्रेनी नागरिकों — हर्बा पेट्रो, स्लिवियाक टारस और इवान सुकमनोवस्की — को दिल्ली से, जबकि तीन अन्य यूक्रेनी नागरिकों — स्टीफन मारियन, होंचारुक मकसीम और कामिनिस्की विक्टर — को लखनऊ से पकड़ा गया।
NIA की जांच का दायरा
एजेंसी का कहना है कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय साजिश है। जांचकर्ता आरोपियों के भारत और अन्य देशों में संपर्क सूत्रों, फंडिंग के स्रोतों और आगे की योजनाओं का पता लगाना चाहते हैं। विदेशी धरती पर आतंकी संगठनों को सैन्य प्रशिक्षण देना और ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराना भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
आगे क्या होगा
दिल्ली उच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद NIA के पास अब 180 दिन की पूर्ण जांच अवधि उपलब्ध है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत म्यांमार से जुड़े ट्रांस-नेशनल आतंकी नेटवर्क पर नजर कस रहा है। आरोपियों के खिलाफ UAPA के तहत आरोप-पत्र दाखिल करने की समय-सीमा अब विस्तारित जांच अवधि के बाद तय होगी।