एनआईए की जांच में विदेशी नागरिकों का म्यांमार संघर्ष से संबंध, यूक्रेन ने किया खंडन
सारांश
Key Takeaways
- एनआईए की जांच ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा की है।
- यूक्रेनी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद आरोपों में वृद्धि हुई है।
- जांच में शामिल व्यक्तियों के खुफिया सेवाओं से संबंध हैं।
- यूक्रेन ने आरोपों को निराधार बताया है।
- ये गतिविधियाँ अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव डाल सकती हैं।
नई दिल्ली, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा की गई एक महत्वपूर्ण जांच ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल पैदा कर दी है। इसमें विदेशी नागरिकों की संदिग्ध गतिविधियों को म्यांमार के चल रहे संघर्ष से जोड़ा गया है। इस मामले की गंभीरता तब बढ़ी जब यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक की गिरफ्तारी हुई, जिसके बाद यूक्रेन ने इन आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताकर खारिज कर दिया।
एक रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों के खुफिया सेवाओं और सैन्य इकाइयों से निकटता उजागर की गई है, जो ओपन-सोर्स जानकारी के विश्लेषण पर आधारित है। हालांकि, वॉशिंगटन ने इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।
जांचकर्ताओं का कहना है कि संदिग्ध व्यक्ति भारत में पर्यटन वीजा पर आए थे और फिर अवैध रूप से मिजोरम पहुंचे, जहाँ से वे अनौपचारिक मार्गों से म्यांमार में दाखिल हुए। उन पर सीमा और आवाजाही के कानूनों का उल्लंघन करने और म्यांमार में सक्रिय सशस्त्र समूहों को मानव रहित हवाई वाहनों (यूएवी) के उपयोग और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकों का प्रशिक्षण देने के गंभीर आरोप हैं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि एनआईए को एक बड़े नेटवर्क के शामिल होने का संदेह है। इसमें कहा गया है कि 14 यूक्रेनी नागरिक अलग-अलग समय पर भारत आए और बिना अनुमति के मिजोरम गए।
यूक्रेनी अधिकारियों ने इन आरोपों को बुनियादी रूप से निराधार और देश की आधिकारिक नीति के खिलाफ बताया है। कीव ने स्पष्ट किया है कि उसके नागरिक म्यांमार में किसी भी उग्रवादी समूह को प्रशिक्षण देने या ड्रोन तकनीक उपलब्ध कराने में नहीं लगे हैं।
जिन व्यक्तियों पर जांच में नाम आया है, उनमें इवान सुकमानोव्स्की शामिल हैं, जो एक यूक्रेनी सैन्य इकाई से जुड़े बताए गए हैं। ओपन-सोर्स जानकारी के अनुसार, यह इकाई इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और टोही में विशेषज्ञता रखती है।
एक अन्य आरोपी, मैरियन स्टेफानकिव का संबंध “अराटा” नामक इकाई से बताया गया है, जो हमलों, तोड़फोड़, टोही और आधुनिक युद्ध में ड्रोन के उपयोग में विशेषज्ञता रखती है। एक पूर्व साक्षात्कार में स्टेफानकिव ने कहा था कि उन्होंने 2014 में इस इकाई में शामिल होने के तुरंत बाद ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण शुरू किया था।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ये गतिविधियां यूक्रेन के युद्ध अनुभव के अंतरराष्ट्रीयकरण को दर्शाती हैं, जिससे समझा जा सकता है कि रूस के साथ संघर्ष में प्राप्त अनुभव को अन्य क्षेत्रों में कैसे लागू किया जा सकता है।
इससे पहले माली और सूडान में भी यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों द्वारा उग्रवादियों को प्रशिक्षण देने के आरोप लगे हैं। ये सभी दावे अभी विवादित हैं और जांच जारी है। इस मामले ने क्षेत्रीय संघर्षों, खुफिया गतिविधियों और उभरती ड्रोन युद्ध तकनीक के जटिल संबंधों पर वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है।