दिल्ली: मात्र 29 दिनों में चोरी का फैसला, द्वारका कोर्ट ने दो दोषियों को सुनाई सजा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली के पालम विलेज थाना क्षेत्र में दर्ज पानी के मोटर चोरी के मामले में द्वारका कोर्ट ने 9 जून 2026 को दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई — और यह फैसला घटना के महज 29 दिनों के भीतर आया। गिरफ्तारी के 11वें दिन और ट्रायल शुरू होने के केवल 6 दिन के भीतर सुनाया गया यह निर्णय दिल्ली पुलिस की त्वरित जांच और अभियोजन की मिसाल बन गया है।
मुख्य घटनाक्रम
यह मामला 12 मई 2026 को दर्ज हुआ था, जब राज नगर-2 इलाके के एक घर से पानी के दो मोटर चोरी हो गए। जांच की जिम्मेदारी पालम विलेज थाने के एएसआई नित्यानंद को सौंपी गई, जिन्होंने स्थानीय पूछताछ, तकनीकी विश्लेषण और साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान की।
30 मई 2026 को दो आरोपियों — प्रिंस, निवासी भारत विहार, दिल्ली और गौतम उर्फ शंकर, निवासी महावीर एन्क्लेव पार्ट-3, नई दिल्ली — को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दोनों ने चोरी में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उनकी निशानदेही पर चोरी किया गया एक मोटर, वारदात में इस्तेमाल औजार और अपराध में प्रयुक्त स्कूटर बरामद किए गए।
साक्ष्य और चार्जशीट
पुलिस के अनुसार, जांच को मज़बूत तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों का समर्थन मिला। इनमें सीसीटीवी फुटेज, चोरी के सामान की बरामदगी, अपराध में प्रयुक्त उपकरण, वाहन की जब्ती और दस्तावेजी प्रमाण शामिल थे। इन साक्ष्यों के आधार पर 4 जून 2026 को अदालत में चार्जशीट दाखिल की गई।
अदालत का फैसला
मामले की सुनवाई द्वारका कोर्ट के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) सौरभ गोयल की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) विकास खर्ब और सुधांशु सैनी ने पक्ष रखा। 9 जून 2026 को अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।
पुलिस टीम की भूमिका
इस मामले को पालम विलेज थाने के SHO इंस्पेक्टर सुधीर कुमार गुलिया के नेतृत्व और ACP दिल्ली कैंट अनिल कुमार की निगरानी में सुलझाया गया। नायब कोर्ट एएसआई नवरत्न ने भी जांच और अभियोजन प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई। गौरतलब है कि इतने कम समय में चार्जशीट दाखिल कर दोषसिद्धि हासिल करना दिल्ली पुलिस के लिए उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
आगे क्या
यह मामला दिल्ली में त्वरित न्याय की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब अदालतों में लंबित मामलों की संख्या पर बहस जारी है — और तेज़ जांच व मज़बूत अभियोजन के संयोजन से त्वरित न्याय संभव होने का संदेश देता है।