दिल्ली, यूपी और जम्मू-कश्मीर में जमात उल विदा नमाज के लिए सुरक्षा का कड़ा इंतजाम
सारांश
Key Takeaways
- सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है।
- जमात उल विदा के दिन सामूहिक नमाज अदा की जाती है।
- शीघ्र खरीदारी का उत्साह बाजारों में है।
- धार्मिक नेताओं ने शांति बनाए रखने की अपील की है।
- अलविदा जुम्मा की तारीख को लेकर संभ्रम है।
लखनऊ, १३ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। रमजान के अंतिम शुक्रवार जमात-उल-विदा के अवसर पर देशभर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में प्रशासन ने विशेष तैयारियाँ की हैं, क्योंकि इस दिन बड़ी संख्या में लोग मस्जिदों में नमाज अदा करने और इबादत के लिए इकट्ठा होते हैं।
राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में प्रसिद्ध जामा मस्जिद के आसपास सुरक्षा का कड़ा प्रबंध किया गया है। पुलिस के अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। सुरक्षा बल पूरे क्षेत्र में सतत निगरानी रख रहे हैं, क्योंकि जमात-उल-विदा की नमाज में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।
इसके अलावा, जम्मू-कश्मीर में भी इस धार्मिक अवसर के मद्देनजर सुरक्षा को कड़ा किया गया है। विशेष रूप से श्रीनगर में संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की गश्त बढ़ा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि ये सभी इंतजाम इसलिए किए गए हैं ताकि नमाज और धार्मिक गतिविधियाँ शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।
इस बीच, जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले में अलविदा जुमे के मौके पर बड़ी संख्या में लोग स्थानीय बाजारों में खरीदारी के लिए उमड़ पड़े हैं। रमजान के अंतिम दिनों और आने वाली ईद पर्व की तैयारियों के चलते बाजारों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। लोग अपने परिवार के लिए कपड़े, खाद्य सामग्री और अन्य आवश्यक सामान खरीदते नजर आ रहे हैं।
वहीं, उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में भी प्रशासन ने पूरे जिले को हाई अलर्ट पर रखा है। प्रमुख मस्जिदों और सार्वजनिक स्थानों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा, स्थिति पर कड़ी निगरानी रखने के लिए ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों का भी उपयोग किया जा रहा है।
अमरोहा के पुलिस अधीक्षक अमित कुमार आनंद ने लोगों से अपील की है कि वे इस धार्मिक अवसर पर शांति और भाईचारा बनाए रखें। उन्होंने विशेष रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के चलते लोगों से संयम और सद्भाव बनाए रखने की अपील की है।
धार्मिक नेता भी लोगों से इस दिन को पूरी शांति के साथ मनाने की अपील कर रहे हैं। लखनऊ के शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने कहा कि आज का दिन जमात-उल-विदा का है और इसके बाद ईद की नमाज भी होगी। यह इबादत का दिन है और लोगों को मस्जिदों में जाकर शांति से नमाज अदा करनी चाहिए।
इस्लाम धर्म में रमजान का पूरा महीना अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा रखते हैं, नमाज अदा करते हैं और आत्मचिंतन के साथ धैर्य और संयम का पालन करते हैं। खासकर रमजान के महीने में आने वाले शुक्रवार, जिसे जुम्मा कहा जाता है, का महत्व और भी बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन सामूहिक नमाज अदा की जाती है।
रमजान का अंतिम शुक्रवार, जिसे अलविदा जुम्मा या जुमात-उल-विदा कहा जाता है, श्रद्धालुओं के लिए एक भावनात्मक क्षण होता है। यह पवित्र महीने को विदाई देने का प्रतीक भी माना जाता है। इस दिन देशभर की मस्जिदों में बड़ी संख्या में लोग एकत्र होकर नमाज अदा करते हैं और रमजान की बरकतों के लिए अल्लाह का धन्यवाद करते हैं।
हालांकि, वर्ष २०२६ में अलविदा जुम्मा की तारीख को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कुछ लोग मानते हैं कि यह १३ मार्च को पड़ेगा, जबकि कुछ के अनुसार यह २० मार्च को हो सकता है।
इस्लामी विद्वानों के अनुसार, यह इस बात पर निर्भर करता है कि रमजान का महीना २९ दिन का होता है या ३० दिन का। यदि रमजान २९ दिनों का होता है, तो १३ मार्च को अंतिम शुक्रवार होगा, लेकिन यदि महीने के ३० दिन पूरे होते हैं तो अंतिम जुम्मा २० मार्च को पड़ेगा।
इसी कारण कुछ समुदाय १३ मार्च को अलविदा जुम्मा मनाएंगे, जबकि अन्य समुदाय चांद दिखने की पुष्टि के बाद २० मार्च को इसे मनाएंगे।