अमेरिकी महावाणिज्य दूत कैथी जाइल्स-डियाज ने डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव से की मुलाकात, बिहार-अमेरिका सहयोग पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी महावाणिज्य दूत कैथी जाइल्स-डियाज ने 2 जून 2025 को पटना में बिहार के उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव से उनके कार्यालय में शिष्टाचार भेंट की। कोलकाता स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास की नवनियुक्त प्रमुख की यह पहली बिहार यात्रा थी, जिसका केंद्र बिहार और अमेरिका के बीच आर्थिक, तकनीकी और विकासात्मक सहयोग को नई दिशा देना रहा।
मुख्य घटनाक्रम
बैठक में उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने महावाणिज्य दूत को बिहार की ऐतिहासिक विरासत और राज्य में चल रही प्रमुख विकासात्मक परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। दोनों पक्षों ने नई तकनीक, आर्थिक विकास और राज्य की आवश्यकताओं के अनुरूप द्विपक्षीय सहयोग के संभावित क्षेत्रों पर विचार-विमर्श किया।
गौरतलब है कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी राज्य के विकास में तकनीक के व्यापक उपयोग पर लगातार ज़ोर देते रहे हैं। इस पृष्ठभूमि में अमेरिकी महावाणिज्य दूत की यह यात्रा राज्य की तकनीक-केंद्रित विकास नीति के अनुरूप मानी जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल की संरचना
महावाणिज्य दूत कैथी जाइल्स-डियाज के साथ तीन सदस्यीय विशेषज्ञ दल भी उपस्थित रहा। इस दल में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास, कोलकाता की आर्थिक मामलों की विशेषज्ञ संगीता डे चंदा, प्रेस एवं मीडिया सहायक नयनतारा श्रॉफ और सुरक्षा संपर्क अधिकारी अनिरुद्ध घोष शामिल थे। बिहार सरकार की ओर से वित्त विभाग की सचिव (व्यय) रचना पाटिल भी बैठक में मौजूद रहीं।
दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया
उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने महावाणिज्य दूत और उनके प्रतिनिधिमंडल का बिहार आगमन पर आभार व्यक्त किया। महावाणिज्य दूत कैथी जाइल्स-डियाज ने बिहार सरकार के आतिथ्य और राज्य के विकास के प्रति अपनाए जा रहे दृष्टिकोण की सराहना की। बैठक में अमेरिकी महावाणिज्य दूतावास की क्षेत्रीय गतिविधियों और प्राथमिकताओं पर भी चर्चा हुई, ताकि दोनों पक्षों के बीच संवाद को और प्रभावी बनाया जा सके।
आगे की संभावनाएँ
यह बैठक बिहार के लिए अमेरिकी निवेश और तकनीकी सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की उच्च-स्तरीय कूटनीतिक भेंट राज्य को वैश्विक निवेशकों के मानचित्र पर स्थापित करने में सहायक हो सकती है। आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच ठोस सहयोग समझौतों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।