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रीवा में जैन साध्वी हादसा: अरुण यादव ने की देशव्यापी 'संत सुरक्षा नीति' की मांग, SIT जांच पर जोर

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रीवा में जैन साध्वी हादसा: अरुण यादव ने की देशव्यापी 'संत सुरक्षा नीति' की मांग, SIT जांच पर जोर

सारांश

रीवा में जैन साध्वियों की सड़क दुर्घटना में मौत महज एक हादसा नहीं — यह पैदल विहार करने वाले संतों की सुरक्षा के प्रति प्रशासनिक उदासीनता का आईना है। अरुण यादव की SIT और 'संत सुरक्षा नीति' की माँग के साथ अब यह मुद्दा राष्ट्रीय नीति-विमर्श के केंद्र में आ गया है।

मुख्य बातें

रीवा जिले में जैन साध्वी श्रुति मति माता और उपशममति माता की पैदल विहार के दौरान तेज़ रफ्तार कार की टक्कर से मौत हो गई।
पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अरुण यादव ने घटना की SIT या न्यायिक जाँच और सभी CCTV साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की माँग की।
यादव ने सरकार से देशव्यापी 'संत सुरक्षा नीति' लागू करने की अपील की, ताकि पैदल विहार करने वाले संतों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।
इंदौर में जैन समाज ने सोमवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन किया और कलेक्टर कार्यालय में मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
अब तक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से SIT गठन या न्यायिक जाँच की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले में दो जैन साध्वियों — श्रुति मति माता और उपशममति माता — की पैदल विहार के दौरान एक तेज़ रफ्तार कार की टक्कर से हुई मौत ने पूरे देश के जैन समाज में गहरा आक्रोश उत्पन्न कर दिया है। पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री एवं मध्य प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने इस घटना को देश की आस्था और संस्कृति को आहत करने वाला बताते हुए केंद्र सरकार से एक सख्त 'संत सुरक्षा नीति' लागू करने की माँग की है।

क्या है पूरा मामला

बीते दिनों रीवा जिले में जैन साध्वी श्रुति मति माता एवं उपशममति माता अपने नियमित पैदल विहार पर थीं। इसी दौरान एक तेज़ रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे दोनों साध्वियों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। यह घटना जैन धर्म में अहिंसा और संयम का संदेश देने वाली साध्वियों के साथ घटी, जो बिना किसी वाहन के पदयात्रा करती हैं — जैन परंपरा का एक अनिवार्य अनुशासन।

अरुण यादव की माँगें

अरुण यादव ने इस घटना को 'सामान्य सड़क हादसा' मानकर नज़रअंदाज़ करने से इनकार करते हुए कहा कि इसकी निष्पक्ष, उच्च स्तरीय एवं गहन जाँच होना आवश्यक है। उन्होंने शासन-प्रशासन से माँग की कि मामले की न्यायिक जाँच अथवा विशेष जाँच दल (SIT) के माध्यम से विस्तृत जाँच कराई जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि घटना से जुड़े सभी डिजिटल एवं सीसीटीवी साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित रखा जाए, ताकि जाँच प्रक्रिया प्रभावित न हो सके।

यादव ने कहा कि जो साध्वी माताएं अहिंसा, संयम, धर्म और मानवता का संदेश देते हुए पैदल विहार कर रही थीं, उन्हें तेज़ रफ्तार वाहन द्वारा कुचल दिया जाना 'अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक' है। उन्होंने दोषियों को कठोरतम सज़ा दिलाने की भी माँग की।

संत सुरक्षा नीति की माँग क्यों

यादव ने देशभर में पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार एक सख्त एवं प्रभावी 'संत सुरक्षा नीति' लागू करे। उनका तर्क है कि जैन परंपरा में संत वाहन का उपयोग नहीं करते, इसलिए सड़क पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की ज़िम्मेदारी प्रशासन की है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में पैदल विहार करने वाले संतों से जुड़ी सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं चिंता का विषय बनती रही हैं।

इंदौर में जैन समाज का विरोध प्रदर्शन

इससे पहले इंदौर में जैन समाज ने रीवा की इस घटना के विरोध में सोमवार को बड़ा प्रदर्शन किया। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में समाजजन एकत्रित हुए और रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुँचे। प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम इंदौर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की।

जैन समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि रीवा की घटना ने पूरे देश के जैन समाज को आहत किया है और अब संतों की सुरक्षा को लेकर ठोस नीति बनाए जाने की आवश्यकता है। उनका कहना था कि जैन संत निरंतर पदयात्रा करते हैं और बिना किसी वाहन के यात्रा करते हैं, इसलिए प्रशासन की ओर से विशेष इंतज़ाम किए जाने चाहिए।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि इस मामले में अब तक राज्य सरकार की ओर से SIT गठन या न्यायिक जाँच की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। जैन समाज और विपक्षी नेताओं के बढ़ते दबाव के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मध्य प्रदेश सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या केंद्र स्तर पर 'संत सुरक्षा नीति' पर कोई ठोस विचार-विमर्श शुरू होता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह माँग केवल विपक्षी दबाव तक सीमित रहेगी या इससे नीतिगत बदलाव होगा। यह भी ध्यान देने योग्य है कि ऐसी माँगें पहले भी उठती रही हैं, पर ठोस कानूनी ढाँचा आज तक नहीं बना। जब तक संतों की पैदल यात्रा के मार्गों पर विशेष यातायात प्रबंधन और जागरूकता अभियान नहीं चलाए जाते, तब तक ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना कठिन होगा।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रीवा में जैन साध्वियों की मौत कैसे हुई?
मध्य प्रदेश के रीवा जिले में जैन साध्वी श्रुति मति माता और उपशममति माता पैदल विहार कर रही थीं, तभी एक तेज़ रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे दोनों की मौत हो गई। जैन परंपरा में संत वाहन का उपयोग नहीं करते और पदयात्रा करते हैं।
अरुण यादव ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
पूर्व केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री अरुण यादव ने मामले की SIT या न्यायिक जाँच, सभी CCTV व डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और दोषियों को कठोरतम सज़ा दिलाने की माँग की है। साथ ही उन्होंने सरकार से देशव्यापी 'संत सुरक्षा नीति' लागू करने की अपील भी की है।
'संत सुरक्षा नीति' क्या है और इसकी ज़रूरत क्यों है?
'संत सुरक्षा नीति' एक प्रस्तावित नीतिगत ढाँचा है जिसके तहत पैदल विहार करने वाले साधु-संतों की सड़क सुरक्षा के लिए विशेष प्रशासनिक इंतज़ाम किए जाएँ। जैन परंपरा में संत बिना वाहन के यात्रा करते हैं, इसलिए उन्हें सड़क दुर्घटनाओं का अधिक खतरा रहता है।
इंदौर में जैन समाज ने क्या किया?
इंदौर में जैन समाज ने सोमवार को बड़ा विरोध प्रदर्शन किया और रैली निकालते हुए कलेक्टर कार्यालय पहुँचे। प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के नाम इंदौर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जैन संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की।
क्या मध्य प्रदेश सरकार ने इस मामले में कोई कार्रवाई की है?
अब तक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से SIT गठन या न्यायिक जाँच की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। जैन समाज और विपक्षी नेताओं के बढ़ते दबाव के बीच सरकार की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है।
राष्ट्र प्रेस
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