दीया मिर्जा पटाखा विवाद: वारिस पठान का आरोप — 'मुस्लिम नाम के कारण निशाना बनाया जा रहा'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने 2 नवंबर 2026 को मुंबई में कहा कि अभिनेत्री दीया मिर्जा को उनके मुस्लिम नाम के कारण निशाना बनाया जा रहा है। यह विवाद दिवाली पर पटाखों को लेकर बॉम्बे उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के तहत बनाए गए जागरूकता वीडियो पर उठे विरोध से जुड़ा हुआ है।
पूरा मामला क्या है
बॉम्बे उच्च न्यायालय ने मुंबई में दिवाली के दौरान सार्वजनिक सड़कों और फुटपाथों पर पटाखे फोड़ने से बचने का निर्देश दिया था। ध्वनि प्रदूषण, वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को इसके पीछे का कारण बताया गया था। मुंबई नगर निगम आयुक्त अश्विनी भिडे ने भी स्पष्ट किया था कि उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन अनिवार्य है।
इसके बाद नगर निगम ने कई जानी-मानी हस्तियों से संपर्क किया और उनसे जागरूकता वीडियो बनाने की अपील की। इस अभियान में अभिनेत्री माधुरी दीक्षित, पूर्व क्रिकेटर अजिंक्य रहाणे और दीया मिर्जा सहित अन्य हस्तियों ने भाग लिया। मिर्जा ने अपने वीडियो संदेश में दिवाली मनाने के अधिकार का समर्थन करते हुए पटाखों से होने वाले प्रदूषण और स्वास्थ्य जोखिमों के प्रति सचेत रहने की बात कही थी।
भाजपा की आपत्ति और वारिस पठान का पलटवार
पठान के अनुसार, मुंबई भारतीय जनता पार्टी (BJP) अध्यक्ष अमित साटम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए केवल दीया मिर्जा को निशाना बनाया, जबकि माधुरी दीक्षित और अजिंक्य रहाणे सहित अन्य हस्तियों पर कोई टिप्पणी नहीं की। पठान ने कहा, 'यदि भाजपा को इन अपीलों पर आपत्ति थी, तो उसे सभी हस्तियों के बारे में एक समान रुख अपनाना चाहिए था। दीया मिर्जा को उनके मुस्लिम नाम के कारण निशाना बनाया जा रहा है।'
पठान ने यह भी सवाल उठाया कि जब यह पूरी पहल उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन हेतु नगर निगम के निर्देश पर हुई, तो इस पर विवाद क्यों खड़ा किया जा रहा है और वीडियो हटाने की बात क्यों की जा रही है।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की चुप्पी पर सवाल
एआईएमआईएम प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की इस मामले में चुप्पी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिवाली मनाना सभी का अधिकार है, लेकिन त्योहार की आड़ में एक मुस्लिम अभिनेत्री को अकेले निशाना बनाना दोहरे मापदंड को दर्शाता है।
व्यापक संदर्भ और प्रासंगिकता
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में पटाखों और प्रदूषण को लेकर कानूनी और सामाजिक बहस पहले से ही चल रही है। गौरतलब है कि बॉम्बे उच्च न्यायालय के निर्देश किसी धर्म विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से जारी किए गए थे। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के चयनात्मक विरोध से सांप्रदायिक तनाव बढ़ सकता है। अभी तक भाजपा की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। आने वाले दिनों में देखना होगा कि यह विवाद राजनीतिक रूप लेता है या शांत होता है।