डीएमके का संगठनात्मक पुनर्गठन: जिला सचिव पदों पर युवा और महिला नेताओं को मिलेगी जगह
सारांश
मुख्य बातें
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) अपने संगठनात्मक ढाँचे में व्यापक बदलाव की तैयारी में है। पार्टी के प्रभावशाली जिला सचिव पदों सहित अन्य महत्वपूर्ण पदों पर युवा नेताओं और महिला पदाधिकारियों को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। यह कदम चेन्नई और उसके आसपास के जिलों में विशेष रूप से प्रभावी होने की संभावना है, जहाँ हाल के चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन नेतृत्व की अपेक्षाओं से कम रहा।
पुनर्गठन की पृष्ठभूमि
प्रस्तावित बदलाव को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय और उनकी पार्टी तमिझगा वेत्री कषगम (TVK) से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। विजय की चुनावी सफलता का श्रेय व्यापक रूप से युवा मतदाताओं के प्रबल समर्थन को दिया जाता है। DMK नेताओं का मानना है कि संगठनात्मक ढाँचे में युवा चेहरों को जगह देने से पार्टी इस अहम मतदाता वर्ग से फिर से जुड़ाव स्थापित कर सकती है।
महिला प्रतिनिधित्व की वर्तमान स्थिति
DMK में फिलहाल 78 संगठनात्मक जिला सचिव हैं, जिनमें से केवल एक महिला हैं — पूर्व मंत्री पी. गीता जीवन, जो पार्टी की थूथुकुडी जिला इकाई की प्रमुख हैं। गीता जीवन दिवंगत DMK नेता एन. पेरियासामी की पुत्री हैं, जिन्हें दक्षिणी तमिलनाडु में पार्टी का एक प्रमुख स्तंभ माना जाता था। उनके अतिरिक्त किसी भी महिला को जिला सचिव पद पर नियुक्त नहीं किया गया है, जिसके चलते पार्टी के भीतर समावेशी प्रतिनिधित्व की माँग लगातार उठती रही है।
जिला सचिव पद का महत्व
DMK संरचना में जिला सचिव का पद अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। यह पदाधिकारी चुनावी गतिविधियों के समन्वय, कार्यकर्ताओं को संगठित करने और जमीनी स्तर तथा राज्य नेतृत्व के बीच संपर्क बनाए रखने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। पार्टी सूत्रों के अनुसार नेतृत्व इस बात को लेकर विशेष रूप से चिंतित है कि इस पद पर अधिकांश अनुभवी और वरिष्ठ नेता काबिज हैं, जबकि युवा चेहरों की उपस्थिति नगण्य है।
चेन्नई में बदलाव की संभावना
चेन्नई में वर्तमान में छह संगठनात्मक जिला सचिव हैं, जिनमें से अधिकतर स्थापित नेता हैं। नेतृत्व इन क्षेत्रों में पार्टी के युवा विंग, महिला विंग और छात्र संगठन के पदाधिकारियों को मध्य-स्तरीय पदों पर पदोन्नत करने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। DMK छात्र विंग के सचिव जे. वीरमणि ने इस प्रस्ताव का स्वागत करते हुए कहा कि महिलाओं और युवाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने से पार्टी और महिला सशक्तीकरण दोनों के उद्देश्य मज़बूत होंगे।
संगठनात्मक जिलों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव
पार्टी संगठनात्मक जिलों की संख्या 78 से बढ़ाकर लगभग 100 करने पर भी विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार छोटे जिला निकाय बनाने से पार्टी के कामकाज का प्रबंधन सरल होगा, पदाधिकारियों के बीच समन्वय बेहतर होगा और नेतृत्व को आगामी चुनावों से पहले जमीनी राजनीतिक गतिविधियों पर अधिक प्रभावी ढंग से नज़र रखने में सहायता मिलेगी। यह पुनर्गठन DMK के लिए अगले चुनावी चक्र से पहले संगठनात्मक पकड़ मज़बूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।