22 जुलाई 2026
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डीआरडीओ ने AEW&C Mk-2 के लिए अदाणी डिफेंस और AI इंजीनियरिंग से किए दो अनुबंध, 6 A321 विमान बनेंगे 'आसमानी कमांड सेंटर'

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डीआरडीओ ने AEW&C Mk-2 के लिए अदाणी डिफेंस और AI इंजीनियरिंग से किए दो अनुबंध, 6 A321 विमान बनेंगे 'आसमानी कमांड सेंटर'

सारांश

डीआरडीओ ने 22 जुलाई को AEW&C Mk-2 कार्यक्रम के लिए अदाणी डिफेंस और AI इंजीनियरिंग के साथ दो अनुबंध किए। 6 पूर्व-वाणिज्यिक A321 विमान आसमानी कमांड सेंटर बनेंगे — यह भारत की स्वदेशी हवाई निगरानी क्षमता की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा निजी-सार्वजनिक रक्षा सहयोग है।

मुख्य बातें

डीआरडीओ ने 22 जुलाई को AEW&C Mk-2 कार्यक्रम के लिए दो औद्योगिक अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए।
अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड मिशन सिस्टम्स का विकास और उत्पादन करेगी।
AI इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड 6 A321 विमानों को सैन्य AEW&C प्लेटफॉर्म में रूपांतरित करेगी।
अनुबंधों पर रक्षा सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर हुए।
परियोजना में एयरबस डिफेंस एंड स्पेस के संशोधित विमानों पर मिशन सिस्टम्स एकीकरण और संयुक्त उड़ान परीक्षण शामिल हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आत्मनिर्भर भारत अभियान और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को नई गति देगा।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 22 जुलाई को नई दिल्ली में भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी क्षमता को निर्णायक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया — एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C Mk-2) कार्यक्रम के लिए दो प्रमुख औद्योगिक साझेदारों के साथ अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और AI इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड के साथ संपन्न हुए, जो भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है।

अनुबंधों का विवरण

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, डीआरडीओ के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) ने AI इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड के साथ छह A321 विमानों को विशेष सैन्य भूमिका के लिए रूपांतरित करने का अनुबंध किया है। ये विमान पूर्व में वाणिज्यिक उड़ानों में उपयोग होते थे और अब इन्हें अत्याधुनिक हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण प्लेटफॉर्म में बदला जाएगा। दूसरी ओर, अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को इस कार्यक्रम के मिशन सिस्टम्स के विकास और उत्पादन के लिए प्रमुख औद्योगिक साझेदार के रूप में चुना गया है।

दोनों अनुबंधों पर रक्षा सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। अदाणी डिफेंस, डीआरडीओ के साथ मिलकर उन उन्नत प्रणालियों को विकसित करेगी जो विमान को आसमान में एक संचालित कमांड एवं कंट्रोल केंद्र में तब्दील कर देंगी।

AEW&C विमान क्यों हैं अहम

AEW&C विमान किसी भी आधुनिक वायुसेना की 'आँख और कान' माने जाते हैं। ये सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई, समुद्री और कुछ परिस्थितियों में जमीनी गतिविधियों पर वास्तविक समय में नज़र रख सकते हैं। इनसे प्राप्त सूचनाएँ लड़ाकू विमानों, वायु रक्षा प्रणालियों और कमांड मुख्यालयों को तत्काल उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे प्रतिक्रिया समय कई गुना घट जाता है।

डीआरडीओ के AEW&C Mk-2 में दीर्घकालिक उड़ान क्षमता, उन्नत हवाई निगरानी, सुरक्षित संचार नेटवर्क, परिस्थितिजन्य जागरूकता और अत्याधुनिक कमान एवं नियंत्रण सुविधाएँ शामिल होंगी। यह भारतीय वायुसेना को दूरस्थ क्षेत्रों में खतरों की समय रहते पहचान करने में निर्णायक बढ़त देगा।

परियोजना की कार्यप्रणाली

योजना के अनुसार, एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले संशोधित A321 विमानों पर मिशन सिस्टम्स का एकीकरण किया जाएगा। इसके बाद डीआरडीओ, उद्योग साझेदारों और भारतीय वायुसेना की संयुक्त टीम व्यापक उड़ान परीक्षण करेगी। गौरतलब है कि यह परियोजना वाणिज्यिक विमानों को सैन्य प्लेटफॉर्म में बदलने का एक जटिल तकनीकी प्रयास है, जो भारत में अभी तक इस पैमाने पर नहीं हुआ।

आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी रफ़्तार

रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना केवल एक नया निगरानी विमान विकसित करने तक सीमित नहीं है। यह भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी और निजी उद्योग की भागीदारी को नई मजबूती देने वाला कदम भी है। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति मिलेगी और देश में रक्षा विनिर्माण के लिए एक सुदृढ़ स्वदेशी आधार तैयार होगा।

यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर निगरानी अवसंरचना को तेज़ी से उन्नत कर रहा है। AEW&C Mk-2 भविष्य में आसमान से मिलने वाली एक ऐसी क्षमता साबित हो सकती है जो किसी भी संभावित खतरे को बहुत पहले पहचानकर जवाबी कार्रवाई के लिए महत्त्वपूर्ण बढ़त प्रदान करे।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो पारंपरिक सार्वजनिक उपक्रमों से आगे जा रहा है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि वाणिज्यिक विमानों का सैन्य रूपांतरण तकनीकी रूप से जटिल और समय-संवेदनशील प्रक्रिया है, जिसमें देरी का इतिहास रहा है। असली कसौटी यह होगी कि क्या डीआरडीओ, उद्योग और वायुसेना की त्रिपक्षीय टीम उड़ान परीक्षण चरण को निर्धारित समय में पूरा कर पाती है — क्योंकि भारत की उत्तरी सीमाओं पर बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए यह क्षमता जितनी जल्दी आए, उतना बेहतर।
RashtraPress
22 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआरडीओ का AEW&C Mk-2 कार्यक्रम क्या है?
AEW&C Mk-2 भारतीय वायुसेना के लिए स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल प्रणाली विकसित करने का डीआरडीओ का महत्त्वाकांक्षी कार्यक्रम है। इसमें 6 A321 विमानों को उन्नत हवाई निगरानी और कमांड प्लेटफॉर्म में बदला जाएगा, जो सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई, समुद्री और जमीनी गतिविधियों पर नज़र रख सकेंगे।
इन अनुबंधों में अदाणी डिफेंस और AI इंजीनियरिंग की क्या भूमिका है?
अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड AEW&C Mk-2 के मिशन सिस्टम्स का विकास और उत्पादन करेगी, जो विमान को आसमानी कमांड सेंटर बनाते हैं। AI इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड 6 पूर्व-वाणिज्यिक A321 विमानों को सैन्य AEW&C प्लेटफॉर्म में रूपांतरित करने का कार्य करेगी।
AEW&C विमान भारतीय वायुसेना के लिए क्यों ज़रूरी हैं?
AEW&C विमान वायुसेना की 'आँख और कान' होते हैं — ये सैकड़ों किलोमीटर दूर तक वास्तविक समय में निगरानी करते हैं और लड़ाकू विमानों व कमांड केंद्रों को तत्काल सूचनाएँ देते हैं। इससे किसी भी खतरे का पहले पता चलता है और जवाबी कार्रवाई के लिए निर्णायक बढ़त मिलती है।
इस परियोजना में एयरबस डिफेंस एंड स्पेस की क्या भूमिका है?
एयरबस डिफेंस एंड स्पेस इस परियोजना के लिए संशोधित A321 विमान उपलब्ध कराएगी। इन विमानों पर डीआरडीओ और उद्योग साझेदार मिलकर मिशन सिस्टम्स का एकीकरण करेंगे, जिसके बाद संयुक्त उड़ान परीक्षण किए जाएंगे।
यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत अभियान से कैसे जुड़ी है?
विशेषज्ञों के अनुसार, AEW&C Mk-2 में निजी उद्योग की भागीदारी स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को मजबूत करती है और आत्मनिर्भर भारत अभियान को ठोस गति देती है। यह परियोजना भारत में जटिल सैन्य प्रणालियों के विकास में निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका का प्रतीक है।
राष्ट्र प्रेस
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