डीआरडीओ ने AEW&C Mk-2 के लिए अदाणी डिफेंस और AI इंजीनियरिंग से किए दो अनुबंध, 6 A321 विमान बनेंगे 'आसमानी कमांड सेंटर'
सारांश
मुख्य बातें
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 22 जुलाई को नई दिल्ली में भारतीय वायुसेना की हवाई निगरानी क्षमता को निर्णायक रूप से मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया — एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C Mk-2) कार्यक्रम के लिए दो प्रमुख औद्योगिक साझेदारों के साथ अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। ये समझौते अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड और AI इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड के साथ संपन्न हुए, जो भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण मील का पत्थर है।
अनुबंधों का विवरण
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, डीआरडीओ के सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (CABS) ने AI इंजीनियरिंग सर्विसेज लिमिटेड के साथ छह A321 विमानों को विशेष सैन्य भूमिका के लिए रूपांतरित करने का अनुबंध किया है। ये विमान पूर्व में वाणिज्यिक उड़ानों में उपयोग होते थे और अब इन्हें अत्याधुनिक हवाई चेतावनी एवं नियंत्रण प्लेटफॉर्म में बदला जाएगा। दूसरी ओर, अदाणी डिफेंस सिस्टम्स एंड टेक्नोलॉजीज लिमिटेड को इस कार्यक्रम के मिशन सिस्टम्स के विकास और उत्पादन के लिए प्रमुख औद्योगिक साझेदार के रूप में चुना गया है।
दोनों अनुबंधों पर रक्षा सचिव तथा डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए गए। अदाणी डिफेंस, डीआरडीओ के साथ मिलकर उन उन्नत प्रणालियों को विकसित करेगी जो विमान को आसमान में एक संचालित कमांड एवं कंट्रोल केंद्र में तब्दील कर देंगी।
AEW&C विमान क्यों हैं अहम
AEW&C विमान किसी भी आधुनिक वायुसेना की 'आँख और कान' माने जाते हैं। ये सैकड़ों किलोमीटर दूर तक हवाई, समुद्री और कुछ परिस्थितियों में जमीनी गतिविधियों पर वास्तविक समय में नज़र रख सकते हैं। इनसे प्राप्त सूचनाएँ लड़ाकू विमानों, वायु रक्षा प्रणालियों और कमांड मुख्यालयों को तत्काल उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे प्रतिक्रिया समय कई गुना घट जाता है।
डीआरडीओ के AEW&C Mk-2 में दीर्घकालिक उड़ान क्षमता, उन्नत हवाई निगरानी, सुरक्षित संचार नेटवर्क, परिस्थितिजन्य जागरूकता और अत्याधुनिक कमान एवं नियंत्रण सुविधाएँ शामिल होंगी। यह भारतीय वायुसेना को दूरस्थ क्षेत्रों में खतरों की समय रहते पहचान करने में निर्णायक बढ़त देगा।
परियोजना की कार्यप्रणाली
योजना के अनुसार, एयरबस डिफेंस एंड स्पेस द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले संशोधित A321 विमानों पर मिशन सिस्टम्स का एकीकरण किया जाएगा। इसके बाद डीआरडीओ, उद्योग साझेदारों और भारतीय वायुसेना की संयुक्त टीम व्यापक उड़ान परीक्षण करेगी। गौरतलब है कि यह परियोजना वाणिज्यिक विमानों को सैन्य प्लेटफॉर्म में बदलने का एक जटिल तकनीकी प्रयास है, जो भारत में अभी तक इस पैमाने पर नहीं हुआ।
आत्मनिर्भर भारत को मिलेगी रफ़्तार
रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह परियोजना केवल एक नया निगरानी विमान विकसित करने तक सीमित नहीं है। यह भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी और निजी उद्योग की भागीदारी को नई मजबूती देने वाला कदम भी है। इससे आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति मिलेगी और देश में रक्षा विनिर्माण के लिए एक सुदृढ़ स्वदेशी आधार तैयार होगा।
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं पर निगरानी अवसंरचना को तेज़ी से उन्नत कर रहा है। AEW&C Mk-2 भविष्य में आसमान से मिलने वाली एक ऐसी क्षमता साबित हो सकती है जो किसी भी संभावित खतरे को बहुत पहले पहचानकर जवाबी कार्रवाई के लिए महत्त्वपूर्ण बढ़त प्रदान करे।