दुमका से पॉक्सो गिरफ्तारी: 47 वर्षीय पिता पर 15 वर्षीय बेटी के यौन शोषण का आरोप, दुर्गापुर में FIR
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर जिले की पुलिस ने 1 जून 2026 को झारखंड के दुमका जिले से एक 47 वर्षीय व्यक्ति को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपनी ही 15 वर्षीय नाबालिग बेटी का यौन शोषण करने का गंभीर आरोप है। यह मामला आरोपी की पत्नी — यानी पीड़िता की माँ — की लिखित शिकायत पर दुर्गापुर के न्यू टाउनशिप थाने में दर्ज किया गया है।
मामले का पृष्ठभूमि और खुलासा
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपी पिछले 12 वर्षों से एक प्रतिष्ठित कंपनी में कार्यरत है और लगभग चार महीने पहले तबादले के बाद बतौर मैनेजर दुमका आया था। नाबालिग पीड़िता करीब एक वर्ष से गंभीर मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रही थी। शुरुआत में उसका उपचार दुर्गापुर मिशन अस्पताल में कराया गया, किंतु स्थिति में सुधार न होने पर परिवार उसे अप्रैल माह में वेल्लोर, तमिलनाडु ले गया।
वेल्लोर में चिकित्सीय परामर्श और काउंसलिंग के दौरान पीड़िता ने डॉक्टरों के समक्ष खुलासा किया कि उसका पिता ही उसका यौन शोषण कर रहा था। यह खुलासा मामले की कड़ी बन गया, जिसके बाद वेल्लोर से लौटकर पीड़िता की माँ ने न्यू टाउनशिप थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
धमकी और मानसिक प्रताड़ना का आरोप
शिकायत में दर्ज विवरण के अनुसार, आरोपी पिता अपनी बेटी पर लगातार दबाव बनाता था और उसे धमकी देता था कि यदि उसने किसी को बताया, तो वह उसकी माँ को छोड़ देगा। इसी भय और मानसिक प्रताड़ना के चलते पीड़िता गहरे अवसाद में चली गई और इस दौरान उसने कथित तौर पर आत्मघाती कदम उठाने का भी प्रयास किया था।
गौरतलब है कि इस तरह के मामलों में पीड़ित बच्चे अक्सर डर और सामाजिक दबाव के कारण लंबे समय तक चुप रहते हैं — और यहाँ भी चिकित्सीय परामर्श के दौरान ही सच्चाई सामने आ सकी।
पुलिस की कार्रवाई
दुर्गापुर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और पॉक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को दुमका से गिरफ्तार कर लिया। अंतर-राज्यीय समन्वय के तहत यह गिरफ्तारी झारखंड में की गई।
आरोपी का पक्ष
गिरफ्तार आरोपी ने सभी आरोपों को सिरे से नकारते हुए खुद को बेगुनाह बताया है। उसका दावा है कि उसे झूठा फंसाया गया है और यह उसकी पत्नी द्वारा रची गई साजिश है। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जाँच कर रही है।
आगे क्या होगा
पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज मामलों में त्वरित सुनवाई के प्रावधान हैं। जाँच एजेंसियाँ पीड़िता के बयान, चिकित्सीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोप-पत्र तैयार करेंगी। मामले की अगली सुनवाई संबंधित न्यायालय में निर्धारित होगी।