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सनातन धर्म विवाद के बीच दुर्गा स्टालिन ने निमिशंबा मंदिर में की पूजा, पति-बेटे के नाम पर अर्चना

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सनातन धर्म विवाद के बीच दुर्गा स्टालिन ने निमिशंबा मंदिर में की पूजा, पति-बेटे के नाम पर अर्चना

सारांश

उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म उन्मूलन के बयान से उठे तूफ़ान के बीच उनकी माँ दुर्गा स्टालिन का मांड्या के निमिशंबा मंदिर में पूजा करना और पति-बेटे के नाम पर अर्चना करवाना — राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

दुर्गा स्टालिन ने सोमवार, पूर्णिमा के दिन मांड्या जिले के निमिशंबा मंदिर में पूजा-अर्चना की।
स्टालिन , उदयनिधि स्टालिन और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर विशेष पूजा करवाई।
अनुष्ठानों में कुमकुमार्चन , दुर्गा सप्तशती पाठ और महा मंगला आरती शामिल रहीं; मुख्य पुजारी सूर्य नारायण भट्ट ने संपन्न कराए।
जेडी(एस) विधायक जी.टी.
देवेगौड़ा भी इस दौरे में उपस्थित थे।
उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म उन्मूलन के बयान के बाद यह दौरा सोशल मीडिया पर विरोधाभास के रूप में वायरल हुआ।

तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म उन्मूलन संबंधी विवादित बयान की गूँज अभी थमी भी नहीं थी कि उनकी माँ दुर्गा स्टालिन ने मांड्या जिले की श्रीरंगपट्टनम तालुका स्थित गंजम के निमिशंबा मंदिर में पहुँचकर विशेष पूजा-अर्चना की। उन्होंने यह पूजा अपने पति मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, पुत्र उदयनिधि और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर करवाई। इस दौरे की तस्वीरें और वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गए।

मंदिर दौरे का विवरण

दुर्गा स्टालिन सोमवार को शुभ पूर्णिमा के अवसर पर परिवार के सदस्यों के साथ मैसूर के निकट स्थित इस प्रसिद्ध मंदिर पहुँचीं। उनके साथ जनता दल (सेक्युलर) के विधायक जी.टी. देवेगौड़ा, उनकी बेटी और दामाद भी उपस्थित थे। मंदिर सूत्रों के अनुसार, उन्होंने देवी के सामने लगभग 30 मिनट बिताए।

दुर्गा स्टालिन ने देवी की पारंपरिक 'उडी सेवा' संपन्न की और देवी को रेशमी साड़ी, चूड़ियाँ, फूल, फल तथा नारियल अर्पित किए। धार्मिक अनुष्ठानों में कुमकुमार्चन, दुर्गा सप्तशती का पाठ और महा मंगला आरती शामिल रहीं, जिसके बाद भक्तों में प्रसाद वितरित किया गया। ये समस्त अनुष्ठान मंदिर के मुख्य पुजारी सूर्य नारायण भट्ट द्वारा संपन्न कराए गए।

मुख्य मंदिर में पूजा के बाद दुर्गा स्टालिन ने परिसर के भीतर स्थित मौक्तिकेश्वर, लक्ष्मीनारायण स्वामी, सूर्य नारायण स्वामी, गणपति और अंजनेय स्वामी के मंदिरों में भी दर्शन-पूजन किया। मंदिर कर्मचारियों ने बताया कि उन्होंने परिसर में पर्याप्त समय बिताया और पूरी श्रद्धा के साथ सभी अनुष्ठानों में भाग लिया।

उदयनिधि का विवादित बयान

गौरतलब है कि उदयनिधि स्टालिन ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में सनातन धर्म को समाप्त करने का आह्वान करते हुए तर्क दिया था कि यह भेदभाव और सामाजिक असमानता को बढ़ावा देता है। इस बयान ने देशभर में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न की और उन्हें अनेक हिंदू संगठनों तथा राजनीतिक दलों की कड़ी आलोचना के साथ-साथ कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।

तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में भी उन्होंने यह रुख दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विरोध जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के विरुद्ध है — धार्मिक आस्था या मंदिर पूजा के विरुद्ध नहीं।

राजनीतिक विरोधाभास पर प्रतिक्रिया

सोशल मीडिया पर दुर्गा स्टालिन की पूजा की तस्वीरें वायरल होते ही अनेक उपयोगकर्ताओं ने उदयनिधि के बयान और परिवार के मंदिर दौरे के बीच के कथित विरोधाभास को रेखांकित किया। आलोचकों का कहना है कि यह दौरा राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण समय पर हुआ है। हालाँकि, परिवार की ओर से इस दौरे को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

यह ऐसे समय में आया है जब सनातन धर्म पर उदयनिधि की टिप्पणियाँ राष्ट्रीय राजनीति में एक संवेदनशील मुद्दा बनी हुई हैं और विपक्षी दल इसे लगातार उठाते रहे हैं।

आगे क्या

इस दौरे के बाद राजनीतिक बहस और तेज़ होने की संभावना है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) सहित अन्य विपक्षी दलों ने इसे द्रविड़ राजनीति के भीतर वैचारिक असंगति के प्रमाण के रूप में प्रस्तुत करना शुरू कर दिया है। स्टालिन परिवार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनके अपने परिवार का मंदिर दर्शन यह सवाल खड़ा करता है कि क्या यह 'वैचारिक स्थिति' व्यवहार में उतनी स्पष्ट है जितनी मंच पर दिखती है। विपक्ष इसे राजनीतिक अवसरवाद बताएगा, जबकि समर्थक इसे निजी आस्था और सार्वजनिक नीति के बीच सामान्य अंतर के रूप में देखेंगे। मूल प्रश्न यह है कि जब परिवार के मुखिया और पुत्र दोनों के नाम पर उसी धर्म की देवी के समक्ष अर्चना हो, तो 'उन्मूलन' की भाषा की विश्वसनीयता कहाँ टिकती है?
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दुर्गा स्टालिन ने किस मंदिर का दौरा किया और कब?
दुर्गा स्टालिन ने सोमवार को पूर्णिमा के अवसर पर कर्नाटक के मांड्या जिले की श्रीरंगपट्टनम तालुका स्थित गंजम के निमिशंबा मंदिर का दौरा किया। यह मंदिर मैसूर के निकट स्थित एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है।
दुर्गा स्टालिन ने मंदिर में किसके नाम पर पूजा करवाई?
उन्होंने अपने पति मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन, पुत्र उदयनिधि स्टालिन और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर विशेष पूजा-अर्चना करवाई। अनुष्ठान मंदिर के मुख्य पुजारी सूर्य नारायण भट्ट द्वारा संपन्न कराए गए।
उदयनिधि स्टालिन का सनातन धर्म पर क्या बयान था?
उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को समाप्त करने का आह्वान करते हुए कहा था कि यह जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता को बढ़ावा देता है। उन्होंने यह रुख तमिलनाडु विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में अपने पहले भाषण में भी दोहराया और स्पष्ट किया कि उनका विरोध धार्मिक आस्था के विरुद्ध नहीं है।
इस मंदिर दौरे पर राजनीतिक विवाद क्यों हुआ?
उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म उन्मूलन के बयान के बाद उनकी माँ का उसी परंपरा से जुड़े मंदिर में पूजा करना और पुत्र के नाम पर अर्चना करवाना — सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और आलोचकों ने इसे स्पष्ट विरोधाभास के रूप में रेखांकित किया। विपक्षी दलों ने इसे राजनीतिक असंगति का उदाहरण बताया।
दुर्गा स्टालिन के साथ मंदिर दौरे पर कौन थे?
उनके साथ जनता दल (सेक्युलर) के विधायक जी.टी. देवेगौड़ा, उनकी बेटी और दामाद भी उपस्थित थे। मंदिर कर्मचारियों के अनुसार, दुर्गा स्टालिन ने परिसर में लगभग 30 मिनट बिताए और सभी उप-मंदिरों में भी दर्शन किए।
राष्ट्र प्रेस
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