द्वारका गोल्फ कोर्स आजीवन सदस्यता: 11 दिनों में 856 पंजीकरण, गैर-सरकारी श्रेणी ओवरसब्सक्राइब
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के द्वारका गोल्फ कोर्स की आजीवन सदस्यता योजना को शुरुआत से ही जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली है — पंजीकरण विंडो खुलने के मात्र 11 दिनों के भीतर 856 आवेदक अपना पंजीकरण पूरा कर चुके हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू के निर्देश पर आरंभ की गई इस योजना में गैर-सरकारी श्रेणी पहले ही निर्धारित सीटों से अधिक आवेदन प्राप्त कर चुकी है।
मुख्य घटनाक्रम
DDA के एक अधिकारी ने 4 अगस्त को बताया कि कुल 856 आवेदनों में से 636 आवेदन गैर-सरकारी (नॉन-गवर्नमेंट) श्रेणी में प्राप्त हुए हैं, जबकि इस श्रेणी में सीटें केवल 600 हैं। इस प्रकार यह श्रेणी ओवरसब्सक्राइब हो गई है। वहीं, सरकारी श्रेणी में उपलब्ध 250 सदस्यताओं के सापेक्ष 220 आवेदन आ चुके हैं, जिससे यह श्रेणी भी भरने के करीब है।
सदस्यता शुल्क का विवरण
योजना के अंतर्गत आजीवन सदस्यता का शुल्क सरकारी श्रेणी के लिए ₹3.50 लाख और गैर-सरकारी श्रेणी के लिए ₹7.50 लाख निर्धारित किया गया है। इसके अतिरिक्त तीन वर्षीय सदस्यता सरकारी श्रेणी में ₹1.20 लाख और गैर-सरकारी श्रेणी में ₹2.50 लाख में उपलब्ध है। पाँच वर्षीय सदस्यता के लिए यह शुल्क क्रमशः ₹1.80 लाख और ₹4.50 लाख रखा गया है। इच्छुक आवेदक ₹2,500 का अप्रतिदेय पंजीकरण शुल्क जमा कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
आवेदन प्रक्रिया और समयसीमा
पंजीकरण विंडो 21 जुलाई से दो महीने तक खुली रहेगी। DDA के अनुसार पंजीकरण अवधि समाप्त होने तक दोनों श्रेणियों में क्षमता से अधिक आवेदन आने की संभावना है। सफल आवेदकों को सदस्यता प्रस्ताव जारी होने के 30 दिनों के भीतर निर्धारित शुल्क ऑनलाइन जमा करना होगा।
लॉटरी से होगा निष्पक्ष आवंटन
जिन श्रेणियों में पात्र आवेदनों की संख्या उपलब्ध सदस्यताओं से अधिक होगी, वहाँ पंजीकरण अवधि समाप्त होने के बाद पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत लॉटरी के माध्यम से आवंटन किया जाएगा। DDA ने स्पष्ट किया है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और तटस्थ होगी। साथ ही, आवेदकों को सलाह दी गई है कि वे केवल एक ही आवेदन जमा करें, क्योंकि एकाधिक आवेदन अस्वीकृत किए जा सकते हैं।
आगे क्या
पंजीकरण विंडो बंद होने के बाद DDA लॉटरी आयोजित करेगा और सफल आवेदकों को सूचित करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शेष अवधि में आवेदनों की गति बनी रहती है या नहीं, और क्या सरकारी श्रेणी भी अंततः ओवरसब्सक्राइब होती है।