ईडी ने फर्जी कॉल सेंटर मामले में कोलकाता में ₹3.72 करोड़ की संपत्ति जब्त, यूके नागरिक थे निशाने पर
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोरखपुर और रांची में संचालित फर्जी कॉल सेंटरों के ज़रिए ब्रिटेन के नागरिकों — विशेषकर बुजुर्गों — को ठगने से जुड़े एक अंतरराष्ट्रीय साइबर धोखाधड़ी मामले में ₹3.72 करोड़ की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त किया है। जब्त संपत्तियों में कोलकाता स्थित एक प्लॉट, एक फ्लैट, बैंक खातों में जमा रकम और कुछ बीमा पॉलिसियाँ शामिल हैं। यह कार्रवाई 23 अक्टूबर 2026 को सामने आई।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद सब-जोनल कार्यालय ने 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत 'प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर' (PAO) जारी किया है। जांच की नींव उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज की गई एफआईआर और चार्जशीट पर आधारित है। यह मामला अनिक दत्ता, आकाश गुप्ता, आदित्य मिश्रा और अन्य लोगों के विरुद्ध IPC, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।
धोखाधड़ी का तरीका
जांच के अनुसार, आरोपी पहले रांची में 'ग्लोबर्ड कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड' और बाद में गोरखपुर में 'जुबिलेट इन्फो प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से फर्जी कॉल सेंटर चलाते थे। इन केंद्रों में कर्मचारियों को ब्रिटेन के बुजुर्ग नागरिकों को निशाना बनाने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती थी। आरोपी खुद को 'बीटी ओपनरीच' का प्रतिनिधि बताते थे और फर्जी विदेशी नामों का इस्तेमाल करते थे।
ईडी ने बताया कि पीड़ितों को 'इंटरनेट स्पीड सुधार' के बहाने 'एनीडेस्क' और 'क्विक असिस्ट' जैसे रिमोट एक्सेस सॉफ्टवेयर डाउनलोड करवाए जाते थे, जिससे आरोपी उनके डिवाइस और बैंकिंग विवरण तक पहुँच बना लेते थे। इसके बाद पीड़ितों को बताया जाता था कि उनके इंटरनेट कनेक्शन पर 'साइबर हमला' हुआ है और ब्रिटेन की 'एक्शन फ्रॉड' संस्था में मामला दर्ज है। फिर 'सीनियर सुपरवाइजर' बनकर पीड़ितों को आरोपियों के बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करने के लिए मना लिया जाता था।
अवैध रकम का रूट
ईडी की जांच में सामने आया कि इस तरह जुटाई गई अवैध धनराशि को 'वेस्टर्न यूनियन' और 'मनीग्राम' जैसी अंतरराष्ट्रीय मनी ट्रांसफर सेवाओं और हवाला चैनलों के जरिए भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड भेजी जाती थी। अधिकारियों के अनुसार, अनिक दत्ता ने एक अन्य आरोपी के साथ मिलकर कुल ₹7 करोड़ की अवैध कमाई की है, जिसमें से ₹3.72 करोड़ की संपत्ति अब तक जब्त की जा चुकी है।
आम जनता पर असर और आगे क्या
यह मामला उस बढ़ती चिंता को रेखांकित करता है जिसमें भारत-आधारित फर्जी कॉल सेंटर विदेशी नागरिकों, खासकर बुजुर्गों को, परिष्कृत तकनीकी हथकंडों से ठगते हैं। गौरतलब है कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी के मामलों में ईडी की बढ़ती सक्रियता एक व्यापक प्रवर्तन रुझान का हिस्सा है। PMLA के तहत PAO जारी होने के बाद मामला अब एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के समक्ष जाएगा, जहाँ आरोपियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।