फिटजी मनी लॉन्ड्रिंग केस: ईडी ने गाजियाबाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की, ₹71.88 करोड़ की संपत्ति जब्ती की माँग
सारांश
मुख्य बातें
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के लखनऊ जोनल कार्यालय ने फिटजी लिमिटेड और उसके डायरेक्टर्स दिनेश कुमार गोयल एवं मोनिला गोयल के विरुद्ध मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभियोजन शिकायत (चार्जशीट) दाखिल की है। 16 अक्टूबर 2026 को गाजियाबाद की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में दाखिल इस चार्जशीट में जाँच के दौरान जब्त और अस्थायी रूप से कुर्क की गई ₹71.88 करोड़ की संपत्तियों को स्थायी रूप से जब्त करने तथा दोषसिद्धि की माँग की गई है। यह मामला देश के जाने-माने कोचिंग संस्थान द्वारा 14,411 छात्रों से एडवांस फीस लेकर अचानक केंद्र बंद करने के आरोपों पर केंद्रित है।
मामले की पृष्ठभूमि
ईडी की जाँच उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तथा मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा भोपाल में दर्ज चार एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। एफआईआर में आरोप है कि फिटजी ने जेईई (JEE) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दो से चार वर्षीय कोचिंग कार्यक्रमों के एवज में प्रति छात्र ₹2.8 लाख से ₹3.5 लाख तक की फीस एडवांस में वसूली — यह आश्वासन देकर कि पूरा पाठ्यक्रम पूरा कराया जाएगा। किंतु वेतन न मिलने के कारण फैकल्टी ने संस्थान छोड़ दिया और बिना किसी पूर्व सूचना के केंद्र अचानक बंद कर दिए गए।
मुख्य आरोप और जाँच के निष्कर्ष
जाँच में यह सामने आया है कि फिटजी ने मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच अचानक 32 केंद्र बंद कर दिए, जिससे 14,411 छात्र पूरी फीस चुकाने के बावजूद कोचिंग से वंचित हो गए। कथित तौर पर कंपनी ने मार्च 2029 तक चलने वाले कार्यक्रमों में भी छात्रों का प्रवेश जारी रखा, जबकि प्रबंधन को पता था कि वह इन्हें पूरा नहीं कर पाएगी। गबन की गई फीस की राशि को ₹85.79 करोड़ के अपराध-अर्जित धन (Proceeds of Crime) के रूप में निर्धारित किया गया है।
आरोप यह भी है कि फैकल्टी के चले जाने के बाद भी प्रबंधन ने झूठे आश्वासन देकर नए छात्रों से फीस वसूलना जारी रखा। वसूली गई फीस उस दौरान खर्च की गई, जब कंपनी लगातार घाटे में थी।
डायरेक्टर्स पर वेतन दुरुपयोग के आरोप
जाँच में यह भी उजागर हुआ है कि दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल ने वित्त वर्ष 2022-23 से वेतन के रूप में ₹24.92 करोड़ लिए। गोयल परिवार के पास कंपनी के 86.31 प्रतिशत शेयर हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि डायरेक्टर्स ने बिना किसी स्वतंत्र अनुमोदन के अपना वेतन स्वयं मंजूर किया। दिनेश गोयल ने कथित तौर पर लगभग ₹56 लाख प्रति माह और मोनिला गोयल ने ₹25 लाख प्रति माह से अधिक वेतन लिया — यह तब भी जारी रहा, जबकि अन्य कर्मचारियों का वेतन देरी से दिया गया या बिल्कुल नहीं दिया गया। उल्लेखनीय है कि मोनिला गोयल ने स्वयं माना कि वह नियमित रूप से कार्यालय नहीं जाती थीं और केवल घर से चेक पर हस्ताक्षर करती थीं।
ईडी की पूर्व कार्रवाई
ईडी ने इससे पहले 24 अप्रैल 2025 को 7 ठिकानों पर छापेमारी करते हुए ₹10 लाख नकद और ₹4.86 करोड़ के गहने जब्त किए थे। इसके बाद 9 अक्टूबर 2026 को पीएमएलए, 2002 के तहत ₹66.92 करोड़ की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की गई थी। नोएडा पुलिस पहले ही दिनेश कुमार गोयल और मोनिला गोयल को आरोपी बनाते हुए चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें लगभग 300 पीड़ितों, फिटजी केंद्र संचालकों और अन्य गवाहों के बयान तथा फीस रसीदें शामिल हैं।
आगे क्या होगा
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जाँच अभी जारी है, जिससे संभावना है कि और संपत्तियाँ और आरोपी इस मामले में शामिल हो सकते हैं। गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत अब चार्जशीट पर संज्ञान लेगी। यह मामला देश भर के लाखों अभिभावकों और छात्रों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि कोचिंग उद्योग में पारदर्शिता और जवाबदेही की माँग और अधिक प्रासंगिक हो गई है।