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एक-चीन सिद्धांत अडिग: 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने लगातार 10वीं बार ताइवान प्रस्ताव खारिज किया

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एक-चीन सिद्धांत अडिग: 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने लगातार 10वीं बार ताइवान प्रस्ताव खारिज किया

सारांश

79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने लगातार दसवीं बार ताइवान से संबंधित प्रस्ताव को खारिज किया। चीन के ताइवान मामलों के कार्यालय ने इसे एक-चीन सिद्धांत की वैश्विक स्वीकृति बताया और DPP के अलगाववादी रुख को विफल करार दिया।

मुख्य बातें

79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा ने लगातार दसवीं बार ताइवान से संबंधित प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल करने से इनकार किया।
चीनी प्रवक्ता छन पिनहुआ ने 18 मई को कहा कि एक-चीन सिद्धांत के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता 'निर्विवाद और अडिग' है।
पिछले एक वर्ष में ताइवान के 18 चिकित्सा विशेषज्ञों ने WHO की तकनीकी गतिविधियों में भाग लिया।
DPP का 'ताइवान स्वतंत्रता' रुख और 1992 की सहमति को नकारना — इन्हें चीन ने विफल नीति बताया।
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत ताइवान WHO की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकता है।

79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा (WHA) ने एक बार फिर ताइवान से संबंधित प्रस्ताव को अपने एजेंडे में शामिल करने से इनकार कर दिया — यह लगातार दसवाँ वर्ष है जब इस तरह के प्रस्ताव को अंतरराष्ट्रीय मंच पर खारिज किया गया है। चीनी राज्य परिषद के ताइवान मामलों के कार्यालय के प्रवक्ता छन पिनहुआ ने 18 मई को इस निर्णय को एक-चीन सिद्धांत के प्रति वैश्विक प्रतिबद्धता की पुष्टि बताया।

मुख्य घटनाक्रम

प्रवक्ता छन पिनहुआ ने कहा कि यह निर्णय इस बात को रेखांकित करता है कि एक-चीन सिद्धांत का पालन करना अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सहमति, जनमत की इच्छा और समय की मूलभूत माँग है। उनके अनुसार, एक-चीन सिद्धांत के प्रति अंतरराष्ट्रीय समुदाय की प्रतिबद्धता का मूल ढाँचा 'निर्विवाद और अडिग' है।

छन पिनहुआ ने यह भी कहा कि डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) के अधिकारियों का 'ताइवान की स्वतंत्रता' के अलगाववादी रुख पर अड़े रहना, 1992 की सहमति को मानने से इनकार करना और विश्व स्वास्थ्य सभा में तथाकथित 'सफलता' हासिल करने का प्रयास — ये सभी कदम विफल होने के लिए अभिशप्त हैं।

ताइवान की स्वास्थ्य भागीदारी पर चीन का रुख

छन पिनहुआ ने स्पष्ट किया कि ताइवान चीन का अभिन्न अंग है और वहाँ रहने वाले लोग चीन के 'देशबंधु' हैं। उन्होंने कहा कि एक-चीन सिद्धांत के आधार पर वैश्विक स्वास्थ्य में ताइवान की भागीदारी के लिए 'उचित व्यवस्था' की गई है।

उन्होंने बताया कि पिछले एक वर्ष में ताइवान के 18 चिकित्सा विशेषज्ञों ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की तकनीकी गतिविधियों में भाग लिया। इसके अतिरिक्त, अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के ढाँचे के तहत ताइवान WHO द्वारा जारी किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन जानकारी को तुरंत प्राप्त करने और रिपोर्ट करने में सक्षम है।

अंतरराष्ट्रीय संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब ताइवान और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। गौरतलब है कि ताइवान वर्षों से WHO की पूर्ण सदस्यता और WHA में प्रत्यक्ष भागीदारी की माँग करता रहा है, जिसे चीन एक-चीन सिद्धांत का हवाला देते हुए लगातार अवरुद्ध करता आया है। DPP सरकार इस रुख को ताइवान की संप्रभुता पर हमला मानती है।

आगे की स्थिति

लगातार दसवीं बार प्रस्ताव खारिज होने के बाद यह स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य मंचों पर ताइवान की स्थिति को लेकर बीजिंग और ताइपे के बीच की खाई फिलहाल पाटी नहीं जा सकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक 1992 की सहमति पर दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बनती, यह गतिरोध जारी रहने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठाता है कि क्या वैश्विक स्वास्थ्य ढाँचे में भू-राजनीतिक गणनाएँ सार्वजनिक स्वास्थ्य हितों पर हावी हो रही हैं। ताइवान के 18 चिकित्सा विशेषज्ञों की WHO गतिविधियों में भागीदारी को चीन 'उचित व्यवस्था' बताता है, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह पूर्ण सदस्यता का विकल्प नहीं है। 1992 की सहमति पर गतिरोध तब तक नहीं टूटेगा जब तक दोनों पक्ष संप्रभुता की परिभाषा पर किसी साझा आधार पर नहीं आते — जो निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता।
RashtraPress
3 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में ताइवान का प्रस्ताव क्यों खारिज हुआ?
79वीं WHA ने एक-चीन सिद्धांत के आधार पर ताइवान से संबंधित प्रस्ताव को एजेंडे में शामिल नहीं किया — यह लगातार दसवाँ वर्ष है। चीन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बहुमत सहमति एक-चीन सिद्धांत के पक्ष में है।
1992 की सहमति क्या है और इसका ताइवान विवाद से क्या संबंध है?
'1992 की सहमति' वह अनौपचारिक समझ है जिसके तहत चीन और ताइवान दोनों 'एक चीन' के सिद्धांत को स्वीकार करते हैं, हालाँकि उसकी व्याख्या अलग-अलग है। DPP सरकार इस सहमति को मानने से इनकार करती है, जिसे बीजिंग ताइवान की WHO भागीदारी में सबसे बड़ी बाधा बताता है।
क्या ताइवान पूरी तरह WHO से कटा हुआ है?
नहीं। चीन के अनुसार, पिछले एक वर्ष में ताइवान के 18 चिकित्सा विशेषज्ञों ने WHO की तकनीकी गतिविधियों में भाग लिया। अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत ताइवान WHO की सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकालीन जानकारी भी तुरंत प्राप्त कर सकता है।
DPP का 'ताइवान स्वतंत्रता' रुख क्या है?
डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (DPP) ताइवान को एक स्वतंत्र राजनीतिक इकाई मानती है और एक-चीन सिद्धांत को खारिज करती है। चीन इस रुख को 'अलगाववादी' बताता है और कहता है कि यही नीति ताइवान की अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य भागीदारी में बाधक है।
आगे क्या होने की संभावना है?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक 1992 की सहमति पर दोनों पक्षों में कोई सहमति नहीं बनती, WHA में ताइवान की पूर्ण भागीदारी का मार्ग अवरुद्ध रहेगा। चीन ने स्पष्ट किया है कि एक-चीन सिद्धांत के बिना किसी भी 'शॉर्टकट' को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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