शिवराज सिंह चौहान बोले — 'एक कचौड़ी, दो समोसा' नारे की नौबत क्यों आई, यह पूरे समाज के लिए चिंता का विषय
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल और सांची में आयोजित कार्यक्रमों में शिरकत की और महिलाओं की सुरक्षा, मधुमेह की चुनौती तथा ड्राइवरों के बच्चों की शिक्षा जैसे कई अहम मुद्दों पर खुलकर बात की। सांची में उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल नारे 'एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा' का जिक्र करते हुए कहा कि यह नारा पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
महिला सुरक्षा पर समाज से आत्ममंथन की अपील
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज यह सोचने की ज़रूरत है कि ऐसी परिस्थितियाँ क्यों बन रही हैं जब बेटियों को पुरुषों के प्रति अविश्वास जताने वाला नारा लिखना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह नारा कभी 'सार्थक और सफल' नहीं होना चाहिए — अर्थात् समाज को ऐसी स्थिति ही नहीं बनने देनी चाहिए जहाँ इसकी प्रासंगिकता बने।
चौहान ने कहा कि बेटियों को गलत नज़रों से देखने वाले अक्सर कोई अनजान नहीं, बल्कि जान-पहचान के लोग होते हैं। उन्होंने पुरुषों, बेटों और उनके माता-पिता से भी आत्ममंथन करने की अपील की और कहा कि बहन-बेटियों का सम्मान केवल परिवार की नहीं, पूरे समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा — 'नारी मेरे लिए माँ के समान और बेटी देवी के समान है।'
मधुमेह सम्मेलन में विशेषज्ञों के साथ चर्चा
इससे पहले चौहान रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडीज़ ऑफ डायबिटीज़ इन इंडिया के 11वें वार्षिक सम्मेलन में शामिल हुए, जो उनके संसदीय क्षेत्र विदिशा के सांची में आयोजित था। उन्होंने कहा कि मधुमेह अब किसी व्यक्ति विशेष की बीमारी नहीं, बल्कि तेज़ी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है।
मंत्री ने चिकित्सकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि नई तकनीकों और अनुसंधान ने उपचार के क्षेत्र में कई नए रास्ते खोले हैं। उनके अनुसार, रोकथाम, जागरूकता और निरंतर शोध पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
ड्राइवरों के बच्चों को छात्रवृत्ति — 'ये देश चलाते हैं'
भोपाल स्थित सेज यूनिवर्सिटी में श्रीराम फाइनेंस लिमिटेड के 'नवगति' कार्यक्रम में चौहान ने ड्राइवरों के बच्चों को छात्रवृत्ति वितरित की। उन्होंने भावुक अंदाज़ में कहा — 'ये ड्राइवर अकेले ट्रक नहीं चलाते, ये देश चलाते हैं।'
छात्रवृत्ति का विवरण इस प्रकार है: कक्षा 8वीं से 10वीं तक के 60 प्रतिशत से अधिक अंक वाले विद्यार्थियों को ₹4,000 सालाना; कक्षा 11वीं-12वीं के लिए ₹4,500; और 90 प्रतिशत से अधिक अंक वाले छात्रों को ₹5,000 प्रतिवर्ष। उन्होंने बच्चों को आश्वस्त किया कि उनकी शिक्षा से जुड़ा डेटाबेस उनके पास भी रहेगा और ज़रूरत पड़ने पर वे हरसंभव सहायता करेंगे।
चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र में चल रही 'मामा कोचिंग क्लास' का भी उल्लेख किया, जहाँ बच्चों को नि:शुल्क प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा नहीं, बल्कि कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसर भी बच्चों तक पहुँचाने की दिशा में काम जारी है।
क्रिकेट, एशियन गेम्स और पायलट के साहस की सराहना
चौहान ने भारतीय क्रिकेट टीम के वनडे वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन और पाकिस्तान पर भारतीय टीम की जीत का उल्लेख किया। उन्होंने एशियन गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों और महिला हॉकी टीम द्वारा चीन को हराकर करीब 40 साल बाद गोल्ड मेडल जीतने की विशेष रूप से सराहना की।
उन्होंने एक विमान हादसे का भी ज़िक्र किया, जिसमें बताया गया कि इज़राइल के नागरिकों से भरे विमान को क्रैश करने की कोशिश हुई, लेकिन भारतीय पायलट ने घायल होने के बावजूद धैर्य बनाए रखा और हनुमान चालीसा का पाठ करते हुए विमान को सुरक्षित उतारा।
आगे क्या
चौहान ने स्पष्ट किया कि ड्राइवरों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति, कोचिंग और कौशल विकास की यह पहल आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने समाज, सरकार और कॉर्पोरेट जगत — तीनों से मिलकर इन प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। महिला सुरक्षा के सवाल पर उनका संदेश स्पष्ट था — समाज को अपनी दिशा तय करनी होगी, वरना बेटियों और बहनों का विश्वास टूटने का खामियाजा पूरे देश को भुगतना पड़ेगा।