28 अक्टूबर 2026
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शिवराज सिंह चौहान का कॉरपोरेट जगत से आह्वान: गांव, गरीब और खेती को न भूलें

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शिवराज सिंह चौहान का कॉरपोरेट जगत से आह्वान: गांव, गरीब और खेती को न भूलें

सारांश

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में कॉरपोरेट जगत को याद दिलाया कि असली भारत गांवों में बसता है। CSR को कानूनी मजबूरी नहीं, सेवा भावना बताते हुए उन्होंने 3 करोड़ लखपति दीदी और ₹10 लाख करोड़ के SHG वित्तीय लिंकेज जैसी उपलब्धियां गिनाईं।

मुख्य बातें

शिवराज सिंह चौहान ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में 'डूइंग गुड फॉर भारत अवॉर्ड्स 2026' और OPIF समापन समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने CSR को 2 प्रतिशत की कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि समाज के प्रति सेवा भावना बताया।
देश में 10 करोड़ बहनें SHG से जुड़ी हैं; इनमें से 3 करोड़ 'लखपति दीदी' बन चुकी हैं।
बैंकों के माध्यम से 5 वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का वित्तीय लिंकेज; NPA केवल 1 प्रतिशत ।
चौहान ने 'लैब टू लैंड' और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा रासायनिक खाद के अत्यधिक उपयोग पर रोक की अपील की।
गांधीवादी ट्रस्टीशिप का हवाला देते हुए उद्योग जगत से वंचितों के कल्याण में आगे आने का आग्रह।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'डूइंग गुड फॉर भारत अवॉर्ड्स 2026' और तीन दिवसीय 'वन पर्पस इंडिया फोरम (OPIF)' के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने कॉरपोरेट जगत को स्पष्ट संदेश दिया कि शहरी विकास की चमक-दमक में ग्रामीण भारत, किसान और कृषि को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

भारतीय दर्शन और गांधीवादी ट्रस्टीशिप का आह्वान

अपने संबोधन में चौहान ने भारतीय चिंतन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी संस्कृति का मूल मंत्र 'आत्मवत सर्वभूतेषु', 'वसुधैव कुटुंबकम' और विश्व कल्याण की भावना रही है। उन्होंने महाभारत के यक्ष प्रश्न का संदर्भ देते हुए कहा कि संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य यही है कि मनुष्य यह जानते हुए भी कि यह दुनिया अस्थायी है, सब कुछ केवल अपने लिए संचित करता रहता है।

महात्मा गांधी की ट्रस्टीशिप अवधारणा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कॉरपोरेट और संपन्न वर्ग से अपील की कि वे अपनी अर्जित संपत्ति को केवल व्यक्तिगत न मानें। उन्होंने कहा कि जल, जंगल, ज़मीन और खनिज जैसे प्राकृतिक संसाधनों पर पूरे समाज का अधिकार है। उद्योग जगत को इन संसाधनों का 'ट्रस्टी' बनकर वंचितों के कल्याण में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया।

सीएसआर: कानूनी मजबूरी नहीं, सेवा भावना

चौहान ने स्पष्ट किया कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) केवल 2 प्रतिशत की कानूनी बाध्यता नहीं है, बल्कि यह समाज के प्रति दायित्व और प्रेम से उपजी सेवा भावना होनी चाहिए। उन्होंने कॉरपोरेट संस्थाओं और परोपकारी संगठनों से आग्रह किया कि वे महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाज़ार से जोड़ने में CSR के माध्यम से सहयोग दें।

महिला स्व-सहायता समूहों की उपलब्धियां

ग्रामीण विकास की उपलब्धियों को साझा करते हुए चौहान ने बताया कि देशभर में महिला स्व-सहायता समूहों (SHG) से 10 करोड़ बहनें जुड़ी हैं, जिनमें से 3 करोड़ 'लखपति दीदी' का दर्जा प्राप्त कर चुकी हैं। बैंकों के माध्यम से 5 वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का वित्तीय लिंकेज सुनिश्चित किया गया है। उल्लेखनीय है कि इन समूहों का एनपीए (NPA) महज 1 प्रतिशत के आसपास है, जो बड़े कॉरपोरेट कर्जदारों की तुलना में उल्लेखनीय रूप से कम है।

कृषि, पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा

चौहान ने अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से भूमि की घटती उर्वरा शक्ति पर चिंता जताई और कहा कि आज ज़मीन को उपजाऊ बनाने वाले केंचुए तक गायब होते जा रहे हैं। उन्होंने 'लैब टू लैंड' की अवधारणा पर बल देते हुए कहा कि वैज्ञानिकों के शोध को सीधे खेतों तक पहुँचाना होगा।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए उन्होंने सभी से जन्मदिन, विवाह वर्षगांठ और पूर्वजों की स्मृति में पेड़ लगाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की खाद्य सुरक्षा पूरी तरह आत्मनिर्भर और अभेद्य है।

समारोह में उपस्थित प्रमुख हस्तियाँ

समारोह में CSRBox के संस्थापक एवं सीईओ भौमिक शाह, IIT मद्रास के प्रोफेसर अश्विन महालिंगम, और नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल सहित कॉरपोरेट, सामाजिक संस्थाओं और परोपकारी जगत के प्रमुख प्रतिनिधि उपस्थित रहे। तीन दिवसीय इस मंथन का समापन विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग को मज़बूत करने के साझा संकल्प के साथ हुआ।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि CSR निधि वास्तव में ग्रामीण SHG तक कितनी पहुँच पा रही है — जबकि आँकड़े बताते हैं कि बड़े कॉरपोरेट अपनी CSR राशि का बड़ा हिस्सा शहरी शिक्षा और स्वास्थ्य परियोजनाओं में लगाते हैं। 3 करोड़ लखपति दीदी की उपलब्धि वास्तविक है, लेकिन ब्रांडिंग और मार्केट लिंकेज में CSR सहयोग की जो माँग मंत्री ने की, वह वर्षों से लंबित है। 'लैब टू लैंड' का नारा नया नहीं है — इसे धरातल पर उतारने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों और किसान उत्पादक संगठनों के बीच संस्थागत पुलों की ज़रूरत है, जो अभी तक पर्याप्त मज़बूत नहीं हुए।
RashtraPress
28 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शिवराज सिंह चौहान ने 'डूइंग गुड फॉर भारत अवॉर्ड्स 2026' में क्या कहा?
उन्होंने कॉरपोरेट जगत से आग्रह किया कि शहरी विकास की चमक-दमक में गांव, गरीब और कृषि को न भूलें, क्योंकि असली भारत गांवों में बसता है। उन्होंने गांधीवादी ट्रस्टीशिप और भारतीय दार्शनिक परंपराओं का उल्लेख करते हुए CSR को सेवा भावना बताया।
लखपति दीदी योजना क्या है और इसमें कितनी महिलाएं जुड़ी हैं?
लखपति दीदी योजना के तहत स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को कौशल विकास एवं वित्तीय सहायता देकर उनकी वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे अधिक करने का लक्ष्य है। चौहान के अनुसार, देश में 10 करोड़ बहनें SHG से जुड़ी हैं और 3 करोड़ लखपति दीदी बन चुकी हैं।
CSR को लेकर केंद्रीय मंत्री का क्या संदेश था?
चौहान ने कहा कि CSR केवल 2 प्रतिशत की कानूनी बाध्यता नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज के प्रति दायित्व और प्रेम से उपजी सेवा भावना होनी चाहिए। उन्होंने कॉरपोरेट संस्थाओं से महिला SHG को प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाज़ार लिंकेज में सहयोग देने की अपील की।
'वन पर्पस इंडिया फोरम (OPIF) 2026' का क्या निष्कर्ष रहा?
तीन दिवसीय इस फोरम का समापन 28 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में हुआ। इसका निष्कर्ष विकसित भारत के निर्माण में जनभागीदारी और संस्थागत सहयोग को निरंतर मज़बूत करने के साझा संकल्प के रूप में सामने आया।
महिला SHG का बैंक NPA इतना कम क्यों है?
चौहान ने बताया कि 5 वर्षों में बैंकों के माध्यम से ₹10 लाख करोड़ का वित्तीय लिंकेज सुनिश्चित किया गया है और इन समूहों का NPA केवल 1 प्रतिशत के आसपास है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामाजिक जवाबदेही और समूह-आधारित ऋण संरचना इस कम NPA का प्रमुख कारण है।
राष्ट्र प्रेस
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