पुणे 2030 तक देश का ग्रोथ इंजन बनेगा: CM फडणवीस ने ₹950 करोड़ के तीन एलिवेटेड कॉरिडोर का किया शिलान्यास
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 19 जुलाई 2025 को घोषणा की कि पुणे 'डीप टेक' और 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCC) के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और 2030 तक देश के अग्रणी आधुनिक शहर एवं 'ग्रोथ इंजन' के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर लेगा। यह ऐलान पुणे–शिरूर, तलेगांव–चाकण–शिक्रापुर और हडपसर–यवत — तीन बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं के शिलान्यास समारोह में किया गया, जिनसे सरकारी खज़ाने में कुल ₹950 करोड़ का प्रारंभिक प्रीमियम प्राप्त हुआ है।
तीन एलिवेटेड कॉरिडोर: क्या है योजना
महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) द्वारा 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (BOT) मॉडल पर लागू की जा रही इन परियोजनाओं से सरकार को अलग-अलग प्रीमियम प्राप्त हुआ है। पुणे–शिरूर कॉरिडोर से ₹500 करोड़, तलेगांव–चाकण–शिक्रापुर कॉरिडोर से ₹300 करोड़ और हडपसर–यवत कॉरिडोर से ₹150 करोड़ — कुल मिलाकर ₹950 करोड़ का प्रारंभिक राजस्व सरकार के पास आया है।
फडणवीस ने बताया कि इन तीनों एलिवेटेड कॉरिडोर को भविष्य की मेट्रो लाइनों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा फ्लाईओवर के ब्लूप्रिंट में मेट्रो का स्ट्रक्चरल डिज़ाइन पहले से शामिल करने से भविष्य में कोई अवरोध नहीं आएगा और भावी अलाइनमेंट की लागत में कम से कम 40 प्रतिशत की बचत होगी।
पुरंदर एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी और टनल परियोजना
आगामी पुरंदर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए सरकार 'डाइव घाट' से होकर एक डबल-ट्यूब टनल बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसमें सड़क और मेट्रो — दोनों तरह के परिवहन की सुविधा होगी। उल्लेखनीय है कि इस एयरपोर्ट के लिए 50 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है, जिसे अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्तर पर एक रिकॉर्ड गति बताया है।
रिंग रोड और ट्रैफिक राहत
173 किलोमीटर लंबा आउटर रिंग रोड और 86 किलोमीटर लंबा इनर रिंग रोड अगले दो वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम में 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी — एक ऐसी समस्या जो वर्षों से पुणे के विकास की रफ़्तार पर ब्रेक लगाती रही है।
जल प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना
दीर्घकालिक टिकाऊ विकास पर जोर देते हुए फडणवीस ने बताया कि शहरी अपशिष्ट जल (वेस्टवॉटर) को पुनर्चक्रित करने के लिए GICA और विश्व बैंक की सहायता से बड़े पैमाने पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए जा रहे हैं। यह कदम पुणे की बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिक विस्तार के मद्देनज़र जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
केंद्र सरकार का समर्थन
समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ये तीन एलिवेटेड कॉरिडोर पुणे में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को उल्लेखनीय रूप से कम करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि राजमार्ग विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग समाधान अपनाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि पुणे महानगर क्षेत्र में पिछले एक दशक में आईटी और विनिर्माण क्षेत्र की तेज़ वृद्धि के कारण यातायात का दबाव कई गुना बढ़ गया है, जिससे बुनियादी ढाँचे का यह उन्नयन और भी ज़रूरी हो गया था। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन ही तय करेगा कि पुणे वाकई 2030 तक देश का ग्रोथ इंजन बन पाता है या नहीं।