19 जुलाई 2026
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पुणे 2030 तक देश का ग्रोथ इंजन बनेगा: CM फडणवीस ने ₹950 करोड़ के तीन एलिवेटेड कॉरिडोर का किया शिलान्यास

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पुणे 2030 तक देश का ग्रोथ इंजन बनेगा: CM फडणवीस ने ₹950 करोड़ के तीन एलिवेटेड कॉरिडोर का किया शिलान्यास

सारांश

पुणे सिर्फ एक शहर नहीं, अब एक राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा है। CM फडणवीस ने ₹950 करोड़ के तीन एलिवेटेड कॉरिडोर के शिलान्यास के साथ 2030 तक पुणे को डीप टेक और GCC का वैश्विक केंद्र बनाने का रोडमैप पेश किया — जिसमें मेट्रो-संगत डिज़ाइन, डबल-ट्यूब टनल और रिंग रोड नेटवर्क शामिल हैं।

मुख्य बातें

CM देवेंद्र फडणवीस ने 19 जुलाई 2025 को पुणे में तीन एलिवेटेड कॉरिडोर का शिलान्यास किया, जिनसे सरकार को कुल ₹950 करोड़ का प्रारंभिक प्रीमियम मिला।
पुणे–शिरूर से ₹500 करोड़ , तलेगांव–चाकण–शिक्रापुर से ₹300 करोड़ और हडपसर–यवत से ₹150 करोड़ प्रीमियम प्राप्त हुआ।
तीनों कॉरिडोर मेट्रो-संगत डिज़ाइन के साथ बने हैं, जिससे भविष्य की अलाइनमेंट लागत में 40% तक की बचत होगी।
173 किमी आउटर रिंग रोड और 86 किमी इनर रिंग रोड दो वर्षों में पूरे होने पर ट्रैफिक जाम में 30% कमी का अनुमान।
पुरंदर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए 50% से अधिक भूमि अधिग्रहण पूरा; डाइव घाट से डबल-ट्यूब टनल की योजना।
GICA और विश्व बैंक की सहायता से बड़े पैमाने पर STP स्थापित किए जा रहे हैं।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 19 जुलाई 2025 को घोषणा की कि पुणे 'डीप टेक' और 'ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स' (GCC) के लिए एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और 2030 तक देश के अग्रणी आधुनिक शहर एवं 'ग्रोथ इंजन' के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर लेगा। यह ऐलान पुणे–शिरूर, तलेगांव–चाकण–शिक्रापुर और हडपसर–यवत — तीन बड़े एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजनाओं के शिलान्यास समारोह में किया गया, जिनसे सरकारी खज़ाने में कुल ₹950 करोड़ का प्रारंभिक प्रीमियम प्राप्त हुआ है।

तीन एलिवेटेड कॉरिडोर: क्या है योजना

महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) द्वारा 'बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर' (BOT) मॉडल पर लागू की जा रही इन परियोजनाओं से सरकार को अलग-अलग प्रीमियम प्राप्त हुआ है। पुणे–शिरूर कॉरिडोर से ₹500 करोड़, तलेगांव–चाकण–शिक्रापुर कॉरिडोर से ₹300 करोड़ और हडपसर–यवत कॉरिडोर से ₹150 करोड़ — कुल मिलाकर ₹950 करोड़ का प्रारंभिक राजस्व सरकार के पास आया है।

फडणवीस ने बताया कि इन तीनों एलिवेटेड कॉरिडोर को भविष्य की मेट्रो लाइनों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा फ्लाईओवर के ब्लूप्रिंट में मेट्रो का स्ट्रक्चरल डिज़ाइन पहले से शामिल करने से भविष्य में कोई अवरोध नहीं आएगा और भावी अलाइनमेंट की लागत में कम से कम 40 प्रतिशत की बचत होगी।

पुरंदर एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी और टनल परियोजना

आगामी पुरंदर इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक निर्बाध संपर्क सुनिश्चित करने के लिए सरकार 'डाइव घाट' से होकर एक डबल-ट्यूब टनल बनाने की योजना पर काम कर रही है, जिसमें सड़क और मेट्रो — दोनों तरह के परिवहन की सुविधा होगी। उल्लेखनीय है कि इस एयरपोर्ट के लिए 50 प्रतिशत से अधिक भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है, जिसे अधिकारियों ने राष्ट्रीय स्तर पर एक रिकॉर्ड गति बताया है।

रिंग रोड और ट्रैफिक राहत

173 किलोमीटर लंबा आउटर रिंग रोड और 86 किलोमीटर लंबा इनर रिंग रोड अगले दो वर्षों में पूरा होने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम में 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी — एक ऐसी समस्या जो वर्षों से पुणे के विकास की रफ़्तार पर ब्रेक लगाती रही है।

जल प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना

दीर्घकालिक टिकाऊ विकास पर जोर देते हुए फडणवीस ने बताया कि शहरी अपशिष्ट जल (वेस्टवॉटर) को पुनर्चक्रित करने के लिए GICA और विश्व बैंक की सहायता से बड़े पैमाने पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए जा रहे हैं। यह कदम पुणे की बढ़ती जनसंख्या और औद्योगिक विस्तार के मद्देनज़र जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

केंद्र सरकार का समर्थन

समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि ये तीन एलिवेटेड कॉरिडोर पुणे में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को उल्लेखनीय रूप से कम करेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि राजमार्ग विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण की जटिलताओं के कारण अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग समाधान अपनाए जा रहे हैं। गौरतलब है कि पुणे महानगर क्षेत्र में पिछले एक दशक में आईटी और विनिर्माण क्षेत्र की तेज़ वृद्धि के कारण यातायात का दबाव कई गुना बढ़ गया है, जिससे बुनियादी ढाँचे का यह उन्नयन और भी ज़रूरी हो गया था। आने वाले वर्षों में इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन ही तय करेगा कि पुणे वाकई 2030 तक देश का ग्रोथ इंजन बन पाता है या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसकी असली परीक्षा क्रियान्वयन की गति में है — महाराष्ट्र में बड़े बुनियादी ढाँचे की परियोजनाएँ अक्सर भूमि अधिग्रहण और वित्तपोषण की अड़चनों से वर्षों पिछड़ जाती हैं। BOT मॉडल से ₹950 करोड़ का प्रारंभिक राजस्व उत्साहजनक है, परंतु 173 किमी के आउटर रिंग रोड को दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है और इसे संदेह की नज़र से देखा जाना चाहिए। डीप टेक और GCC हब की संभावना वास्तविक है, किंतु बिना विश्वसनीय समयसीमा और जवाबदेही तंत्र के, यह घोषणा भी पिछले शहरी मास्टरप्लान की तरह कागज़ों तक सीमित रह सकती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पुणे के तीन एलिवेटेड कॉरिडोर प्रोजेक्ट क्या हैं?
ये तीन परियोजनाएँ हैं — पुणे–शिरूर, तलेगांव–चाकण–शिक्रापुर और हडपसर–यवत एलिवेटेड कॉरिडोर। इन्हें MSRDC द्वारा BOT मॉडल पर लागू किया जा रहा है और इनसे सरकार को कुल ₹950 करोड़ का प्रारंभिक प्रीमियम प्राप्त हुआ है।
पुणे 2030 तक ग्रोथ इंजन कैसे बनेगा?
CM फडणवीस के अनुसार, पुणे डीप टेक और GCC का वैश्विक हब बनने की राह पर है। इसके लिए एलिवेटेड कॉरिडोर, रिंग रोड नेटवर्क, पुरंदर एयरपोर्ट और मेट्रो विस्तार जैसे बुनियादी ढाँचे के कदम उठाए जा रहे हैं।
पुरंदर इंटरनेशनल एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी के लिए क्या योजना है?
सरकार डाइव घाट से होकर एक डबल-ट्यूब टनल बनाने की योजना बना रही है, जिसमें सड़क और मेट्रो दोनों की सुविधा होगी। एयरपोर्ट के लिए 50% से अधिक भूमि अधिग्रहण पहले ही पूरा हो चुका है।
पुणे के रिंग रोड से ट्रैफिक पर क्या असर पड़ेगा?
173 किमी लंबा आउटर रिंग रोड और 86 किमी लंबा इनर रिंग रोड दो वर्षों में पूरे होने की उम्मीद है। अनुमान है कि इससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम में 30 प्रतिशत तक की कमी आएगी।
एलिवेटेड कॉरिडोर में मेट्रो-संगत डिज़ाइन क्यों रखा गया है?
फडणवीस ने बताया कि मौजूदा फ्लाईओवर के ब्लूप्रिंट में मेट्रो का स्ट्रक्चरल डिज़ाइन पहले से शामिल करने से भविष्य में कोई अवरोध नहीं आएगा और भावी मेट्रो अलाइनमेंट की लागत में कम से कम 40 प्रतिशत की बचत होगी।
राष्ट्र प्रेस
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