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दिल्ली पुलिस ने नकली Apple टेक-सपोर्ट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, 7 गिरफ्तार; अमेरिकी नागरिक थे निशाने पर

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दिल्ली पुलिस ने नकली Apple टेक-सपोर्ट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया, 7 गिरफ्तार; अमेरिकी नागरिक थे निशाने पर

सारांश

दिल्ली के नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में 'वेप्ट्रा' नाम से चल रहा नकली Apple टेक-सपोर्ट कॉल सेंटर ध्वस्त — 7 गिरफ्तार। आरोपी खुद को Apple एग्ज़ीक्यूटिव बताकर अमेरिकी नागरिकों से गिफ्ट कार्ड के कोड ऐंठते थे। 5 लैपटॉप, 12 मोबाइल और एक ऑडी कार ज़ब्त।

मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने 25 सितंबर 2026 को नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में 'वेप्ट्रा' नामक नकली Apple टेक-सपोर्ट कॉल सेंटर पर छापा मारा।
कॉल सेंटर के कथित मालिक अरुण (29) , साझेदार सलीम (28) और पाँच कॉलर्स समेत कुल 7 लोग गिरफ्तार ।
आरोपी अमेरिकी नागरिकों को वायरस/मैलवेयर का डर दिखाकर गिफ्ट कार्ड खरीदवाते और कोड ऐंठ लेते थे।
ज़ब्त सामग्री में 5 लैपटॉप , 12 मोबाइल फोन , 10 क्रेडिट/डेबिट कार्ड और एक ऑडी A3 35 TDI कार शामिल।
एफआईआर BNS धाराओं 318(4), 319(2), 61(2), 3(5) और IT Act धारा 66D के तहत 26 सितंबर को दर्ज।
नेटवर्क के व्यापक संपर्कों, गिफ्ट-कार्ड लेनदेन और धन-प्रवाह की जाँच जारी।

दिल्ली पुलिस ने नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया से संचालित एक कथित नकली Apple/iOS टेक्निकल-सपोर्ट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है और गिफ्ट-कार्ड स्कैम के ज़रिए अमेरिकी नागरिकों को ठगने के आरोप में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। 25 सितंबर 2026 को की गई इस छापेमारी में कॉल सेंटर के कथित मालिक समेत पाँच ऑपरेटर पकड़े गए।

छापेमारी का घटनाक्रम

25 सितंबर को वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड को सब-इंस्पेक्टर गजेंद्र माथुर के ज़रिए एक विशेष सूचना मिली, जिसके आधार पर टीम ने नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में 'वेप्ट्रा' नाम से चल रहे संदिग्ध कॉल सेंटर पर धावा बोला। कॉल सेंटर के कथित मालिक अरुण (29) और उसके साझेदार सलीम (28) — दोनों काकरोला निवासी — को मौके पर ही दबोच लिया गया। इनके साथ पाँच कॉलर्स भी पकड़े गए।

गिरफ्तार अन्य आरोपियों में काकरोला के निखिल (30), पीतमपुरा के मोंटू सिंह (34), किशनगढ़ के तिरहुचू (26), उत्तम नगर के करण (28) और सागरपुर के विशाल (29) शामिल हैं।

ठगी का तरीका

जाँच के अनुसार, आरोपी टोल-फ्री नंबरों के ज़रिए अमेरिका में रहने वाले लोगों से संपर्क करते थे और खुद को Apple टेक्निकल-सपोर्ट एग्ज़ीक्यूटिव बताते थे। कॉलर्स पीड़ितों को यह कहकर घबराहट में डालते थे कि उनके डिवाइस में वायरस, मैलवेयर या आपत्तिजनक सामग्री पाई गई है और तत्काल तकनीकी सहायता की आवश्यकता है।

इसके बाद पीड़ितों को कथित तकनीकी समस्याओं के 'समाधान' के नाम पर गिफ्ट कार्ड खरीदने के लिए मनाया जाता था। कॉलर्स गिफ्ट-कार्ड के कोड और विवरण हासिल कर उन्हें नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुँचा देते थे। कॉलर्स नकली अंग्रेज़ी नाम अपनाते थे और लैपटॉप व हेडफोन का उपयोग कर अमेरिकी पीड़ितों से बात करते थे।

ज़ब्त साक्ष्य और तकनीकी सुराग

ज़ब्त लैपटॉप की प्रारंभिक जाँच में iBeam, UltraViewer और AnyDesk जैसे रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर इंस्टॉल मिले, साथ ही अमेरिकी नंबरों की कॉल हिस्ट्री भी पाई गई। पुलिस ने कुल पाँच लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन, दो राउटर, छह हेडफोन, 10 क्रेडिट/डेबिट कार्ड, पाँच चेकबुक और एक ऑडी A3 35 TDI कार ज़ब्त की है।

कानूनी कार्रवाई

छापेमारी के अगले दिन, 26 सितंबर को नारायणा पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज की गई। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 318(4), 319(2), 61(2) और 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत दर्ज किया गया है।

आगे की जाँच

पुलिस के अनुसार, इस व्यापक नेटवर्क की जड़ों तक पहुँचने, टोल-फ्री नंबरों के स्रोत का पता लगाने, गिफ्ट-कार्ड लेनदेन की पड़ताल करने, ज़ब्त डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण करने और धन के प्रवाह को ट्रेस करने के लिए जाँच जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय टेक-सपोर्ट फ्रॉड के मामलों में भारत-आधारित कॉल सेंटरों की संलिप्तता लगातार चिंता का विषय बनती जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

विशेषकर अमेरिकियों, को निशाना बनाता है। गौरतलब है कि 'वेप्ट्रा' जैसे ऑपरेशन अक्सर बड़े नेटवर्क की छोटी कड़ी होते हैं — टोल-फ्री नंबरों का स्रोत, गिफ्ट-कार्ड कोड का अंतिम गंतव्य और धन का प्रवाह अभी भी अज्ञात है। जाँच एजेंसियों के लिए असली परीक्षा यह है कि क्या वे केवल फ्रंट-ऑपरेटरों तक सीमित रहेंगी या इस श्रृंखला के ऊपरी सिरे तक पहुँच पाएँगी।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली में नकली Apple टेक-सपोर्ट कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कैसे हुआ?
सब-इंस्पेक्टर गजेंद्र माथुर को मिली विशेष सूचना के आधार पर वेस्ट डिस्ट्रिक्ट की एंटी-ऑटो थेफ्ट स्क्वाड ने 25 सितंबर 2026 को नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में 'वेप्ट्रा' नामक कॉल सेंटर पर छापा मारा और सात लोगों को गिरफ्तार किया।
आरोपी अमेरिकी नागरिकों को कैसे ठगते थे?
आरोपी खुद को Apple टेक्निकल-सपोर्ट एग्ज़ीक्यूटिव बताकर टोल-फ्री नंबरों से अमेरिकियों को कॉल करते थे और उनके डिवाइस में वायरस या मैलवेयर होने का झूठा डर दिखाते थे। इसके बाद पीड़ितों को गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर उनके कोड ऐंठ लिए जाते थे।
गिरफ्तार आरोपियों पर कौन-सी धाराएँ लगाई गई हैं?
26 सितंबर को नारायणा थाने में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएँ 318(4), 319(2), 61(2) और 3(5) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D लगाई गई हैं।
छापेमारी में क्या-क्या ज़ब्त किया गया?
पुलिस ने पाँच लैपटॉप, 12 मोबाइल फोन, दो राउटर, छह हेडफोन, 10 क्रेडिट/डेबिट कार्ड, पाँच चेकबुक और एक ऑडी A3 35 TDI कार ज़ब्त की। लैपटॉप में iBeam, UltraViewer और AnyDesk जैसे रिमोट-एक्सेस सॉफ्टवेयर और अमेरिकी नंबरों की कॉल हिस्ट्री मिली।
इस मामले में आगे की जाँच किन बिंदुओं पर केंद्रित है?
पुलिस के अनुसार जाँच में टोल-फ्री नंबरों का स्रोत, गिफ्ट-कार्ड लेनदेन की पड़ताल, ज़ब्त डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण और इस नेटवर्क से जुड़े व्यापक संपर्कों की पहचान शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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