15 जुलाई 2026
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लखनऊ में फर्जी दस्तावेज से करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश, दो वांछित आरोपी गिरफ्तार

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लखनऊ में फर्जी दस्तावेज से करोड़ों की जमीन हड़पने की साजिश, दो वांछित आरोपी गिरफ्तार

सारांश

लखनऊ में एक सुनियोजित भूमि-धोखाधड़ी गिरोह ने फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और कूटरचित वारिसान दस्तावेजों के सहारे करोड़ों की पैतृक जमीन हड़पने की कोशिश की — यहाँ तक कि जीवित माँ को मृत दर्शाया। पुलिस ने दो और फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले को और मज़बूत किया।

मुख्य बातें

लखनऊ पुलिस ने 30 मई 2026 को फर्जी दस्तावेज से जमीन हड़पने की साजिश में दो फरार आरोपी गिरफ्तार किए।
गिरफ्तार आरोपी फुरकान अहमद अब्बासी (46 वर्ष) और अभिषेक यादव (28 वर्ष) को बारादरी चौराहा, कैसरबाग से पकड़ा गया।
मुख्य अभियुक्त मोहम्मद फरीद मिर्जा ने जीवित माता को मृत दर्शाते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया।
मामला 11 दिसंबर 2025 को वादी समीर मिर्जा की शिकायत पर थाना मोहनलालगंज में दर्ज हुआ था।
इस मामले में मोहम्मद फरीद मिर्जा , मोहम्मद अशफाक मिर्जा उर्फ बाबू मियां और कलीम खान पहले से लखनऊ जिला जेल में बंद हैं।
आरोपियों ने भूमि विक्रय से प्राप्त धनराशि विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित की; वित्तीय जाँच जारी।

लखनऊ पुलिस ने 30 मई 2026 को फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर ग्राम अमेठी, तहसील मोहनलालगंज स्थित करोड़ों रुपये की पैतृक भूमि हड़पने की सुनियोजित साजिश के मामले में दो फरार वांछित आरोपियों को गिरफ्तार किया है। फुरकान अहमद अब्बासी (46 वर्ष) और अभिषेक यादव (28 वर्ष) को बारादरी चौराहा, कैसरबाग, लखनऊ के निकट से पकड़ा गया।

मुख्य घटनाक्रम

11 दिसंबर 2025 को वादी समीर मिर्जा पुत्र स्वर्गीय कैसर मिर्जा, निवासी ख्यालीगंज, थाना कैसरबाग, लखनऊ ने थाना मोहनलालगंज में अभियोग पंजीकृत कराया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनकी पैतृक भूमि पर फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए अवैध दावा प्रस्तुत कर भूमि हड़पने का प्रयास किया जा रहा है।

साजिश की परतें

पुलिस जाँच में सामने आया कि मुख्य अभियुक्त मोहम्मद फरीद मिर्जा ने स्वयं को वादी के स्वर्गीय चाचा खुसरू मिर्जा का वारिस दर्शाने के लिए कूटरचित अभिलेख तैयार कराए। इसके लिए उसने अपना वास्तविक पारिवारिक विवरण छिपाकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तथा अन्य दस्तावेज न्यायालय एवं अन्य मंचों पर प्रस्तुत किए।

इस षड्यंत्र का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि आरोपियों ने अपनी जीवित माता को मृत दर्शाते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया और उनके कथित दफन से संबंधित भ्रामक दस्तावेजों का भी उपयोग किया। संबंधित विभागों एवं संस्थानों से प्राप्त रिपोर्टों ने पुष्टि की कि ये सभी अभिलेख जाली थे।

वित्तीय लेन-देन और साक्ष्य

जाँच के दौरान यह भी उजागर हुआ कि आरोपियों ने भूमि विक्रय अनुबंधों से प्राप्त धनराशि विभिन्न बैंक खातों में स्थानांतरित की। गवाहों के बयान, बैंकिंग लेन-देन के अभिलेख तथा अन्य साक्ष्यों से अभियुक्तों की संलिप्तता प्रमाणित हुई। जाँच में यह भी पता चला कि इस साजिश में कई अन्य व्यक्तियों की भी सक्रिय भूमिका रही।

पहले से जेल में बंद आरोपी

इस मामले में मोहम्मद फरीद मिर्जा, मोहम्मद अशफाक मिर्जा उर्फ बाबू मियां और कलीम खान पहले से ही लखनऊ जिला जेल में बंद हैं। शुक्रवार को फरार चल रहे फुरकान अहमद अब्बासी और अभिषेक यादव की गिरफ्तारी के साथ पुलिस ने इस गिरोह के विरुद्ध कार्रवाई को और मज़बूत किया है।

आगे की जाँच

थाना मोहनलालगंज पुलिस के अनुसार, मामले में अन्य संदिग्धों की भूमिका की जाँच जारी है। साजिश में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें सक्रिय हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि सत्यापन की ज़िम्मेदारी किसकी है। उत्तर प्रदेश में भूमि धोखाधड़ी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन डिजिटल भू-अभिलेख प्रणाली के बावजूद फर्जी वारिसान दावे रोकने में प्रशासनिक चूक बनी हुई है। गिरफ्तारी स्वागत-योग्य है, पर असली जवाबदेही तब होगी जब यह भी पता चले कि ये जाली दस्तावेज किन सरकारी काउंटरों से होकर गुज़रे।
RashtraPress
15 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ जमीन हड़पने के मामले में क्या हुआ?
लखनऊ पुलिस ने फर्जी और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर ग्राम अमेठी, तहसील मोहनलालगंज की करोड़ों रुपये की पैतृक भूमि हड़पने की साजिश में दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया। यह मामला 11 दिसंबर 2025 को वादी समीर मिर्जा की शिकायत पर दर्ज हुआ था।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन्हें कहाँ से पकड़ा गया?
गिरफ्तार आरोपियों के नाम फुरकान अहमद अब्बासी (46 वर्ष) और अभिषेक यादव (28 वर्ष) हैं। थाना मोहनलालगंज की पुलिस टीम ने शुक्रवार को बारादरी चौराहा, कैसरबाग, लखनऊ के पास से दोनों को गिरफ्तार किया।
इस साजिश में फर्जी दस्तावेजों का किस तरह इस्तेमाल किया गया?
मुख्य अभियुक्त मोहम्मद फरीद मिर्जा ने खुद को वादी के स्वर्गीय चाचा खुसरू मिर्जा का वारिस दर्शाने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य कूटरचित दस्तावेज तैयार कराए। आरोपियों ने अपनी जीवित माता को भी मृत दर्शाते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया और इन दस्तावेजों को न्यायालय व अन्य मंचों पर प्रस्तुत किया।
इस मामले में अब तक कितने आरोपी जेल में हैं?
मोहम्मद फरीद मिर्जा, मोहम्मद अशफाक मिर्जा उर्फ बाबू मियां और कलीम खान पहले से लखनऊ जिला जेल में बंद हैं। ताज़ा गिरफ्तारी के बाद फुरकान अहमद अब्बासी और अभिषेक यादव भी हिरासत में आ गए हैं।
क्या इस मामले में और आरोपी हो सकते हैं?
जाँच के दौरान पुलिस को पता चला कि इस साजिश में कई अन्य व्यक्तियों की भी सक्रिय भूमिका थी। थाना मोहनलालगंज पुलिस के अनुसार, अन्य संदिग्धों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए जाँच जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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