8 अगस्त 2026
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बस्ती हत्याकांड: ₹5 लाख और ज़मीन के लिए भाई-भतीजे ने की बाबूलाल की हत्या, 48 घंटे में दोनों गिरफ्तार

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बस्ती हत्याकांड: ₹5 लाख और ज़मीन के लिए भाई-भतीजे ने की बाबूलाल की हत्या, 48 घंटे में दोनों गिरफ्तार

सारांश

बस्ती में ₹5 लाख और पैतृक ज़मीन के लिए सगे भाई ने भतीजे के साथ मिलकर बाबूलाल चौधरी की हत्या कर दी — और खुद ही अज्ञात पर मुकदमा दर्ज करा दिया। बस्ती पुलिस ने 48 घंटे में साजिश उजागर कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया।

मुख्य बातें

बाबूलाल चौधरी का शव 19 जून 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था।
मृतक के सगे भाई शिवकुमार चौधरी और पुत्र पंकज चौधरी ने ₹5 लाख और पैतृक ज़मीन के लिए हत्या की साजिश रची।
बस्ती पुलिस ने मात्र 48 घंटे के भीतर मामले का खुलासा कर दोनों आरोपियों को रतनपुर मोड़ के पास से गिरफ्तार किया।
पूछताछ में आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया; हत्या में प्रयुक्त ईंट और मोबाइल फोन बरामद।
वाल्टरगंज थाना पुलिस , स्वाट टीम और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई से सफलता मिली।

बस्ती पुलिस ने 21 जून 2026 को बाबूलाल चौधरी हत्याकांड का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया — मृतक के सगे भाई शिवकुमार चौधरी और उसके पुत्र पंकज चौधरी को। पुलिस के अनुसार, पैतृक संपत्ति और लगभग ₹5 लाख की रकम को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद ने इस हत्या की नींव रखी। घटना के मात्र 48 घंटे के भीतर पुलिस ने मामले का पर्दाफाश कर दिया।

घटनाक्रम: कैसे सामने आई साजिश

19 जून को बाबूलाल चौधरी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। इसके बाद मृतक के भाई शिवकुमार चौधरी ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कई टीमों का गठन किया।

जाँच के दौरान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सर्विलांस इनपुट और संदिग्धों की गतिविधियों के गहन विश्लेषण के बाद पुलिस की दिशा मृतक के परिजनों की ओर मुड़ गई। यह ऐसे समय में आया जब शिकायतकर्ता स्वयं शिवकुमार ही थे — जो बाद में मुख्य आरोपी निकले।

हत्या की वजह: संपत्ति और धन का विवाद

पुलिस के अनुसार, बाबूलाल चौधरी की कोई संतान या प्रत्यक्ष वारिस नहीं था। वह अपने हिस्से की लगभग ₹5 लाख की रकम की माँग कर रहे थे। इसके साथ ही पैतृक ज़मीन को लेकर भी परिवार के भीतर तनाव चल रहा था। आरोप है कि शिवकुमार और उनके पुत्र पंकज पैतृक संपत्ति पर एकाधिकार चाहते थे, और इसी लालच में दोनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची।

गिरफ्तारी और बरामदगी

पुलिस ने शिवकुमार चौधरी और पंकज चौधरी को रतनपुर मोड़ के पास से गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी रतनपुर अर्जुन गाँव के निवासी हैं। पूछताछ के दौरान दोनों ने अपना अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई ईंट तथा बाबूलाल का मोबाइल फोन बरामद किए गए।

पुलिस की भूमिका और तकनीकी कार्रवाई

सर्किल ऑफिसर (सदर) सत्येंद्र भूषण तिवारी ने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि वाल्टरगंज थाना पुलिस, स्वाट टीम और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई से यह सफलता मिली। तकनीकी साक्ष्यों और गहन पूछताछ के आधार पर हत्याकांड की पूरी साजिश उजागर की गई। आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई जारी है।

आगे क्या होगा

दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस पैतृक संपत्ति विवाद के अन्य पहलुओं की भी जाँच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस षड्यंत्र में कोई और भी शामिल था।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ निकटतम परिजन ही षड्यंत्रकारी बन जाते हैं। विशेष रूप से चिंताजनक यह है कि मुख्य आरोपी शिवकुमार ने खुद अज्ञात पर मुकदमा दर्ज कराकर जाँच को भटकाने की कोशिश की — जो सुनियोजित साजिश का संकेत है। बस्ती पुलिस की 48 घंटे की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन असली सवाल यह है कि बाबूलाल जैसे निसंतान व्यक्तियों की संपत्ति सुरक्षा के लिए कानूनी तंत्र कितना सक्षम है।
RashtraPress
8 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बाबूलाल चौधरी हत्याकांड में किसे गिरफ्तार किया गया?
बस्ती पुलिस ने मृतक बाबूलाल चौधरी के सगे भाई शिवकुमार चौधरी और उनके पुत्र पंकज चौधरी को गिरफ्तार किया है। दोनों रतनपुर अर्जुन गाँव के निवासी हैं और रतनपुर मोड़ के पास से पकड़े गए।
हत्या का मकसद क्या था?
पुलिस के अनुसार, बाबूलाल चौधरी अपने हिस्से की लगभग ₹5 लाख की रकम माँग रहे थे और पैतृक ज़मीन को लेकर भी पारिवारिक विवाद चल रहा था। आरोप है कि शिवकुमार और पंकज संपत्ति पर एकाधिकार के लिए इस हत्या की साजिश में शामिल हुए।
पुलिस ने इतनी जल्दी मामला कैसे सुलझाया?
वाल्टरगंज थाना पुलिस, स्वाट टीम और सर्विलांस टीम ने संयुक्त रूप से घटनास्थल के साक्ष्यों, सर्विलांस इनपुट और संदिग्धों की गतिविधियों का विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्यों और गहन पूछताछ के आधार पर 48 घंटे के भीतर आरोपियों तक पहुँचा गया।
क्या आरोपियों ने अपराध स्वीकार किया?
हाँ, पूछताछ के दौरान शिवकुमार चौधरी और पंकज चौधरी दोनों ने अपना अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त ईंट और बाबूलाल का मोबाइल फोन बरामद किया गया।
बाबूलाल चौधरी का शव कब मिला था?
बाबूलाल चौधरी का शव 19 जून 2026 को संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। इसके बाद उनके भाई शिवकुमार ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था, जो बाद में स्वयं मुख्य आरोपी निकले।
राष्ट्र प्रेस
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