बस्ती हत्याकांड: ₹5 लाख और ज़मीन के लिए भाई-भतीजे ने की बाबूलाल की हत्या, 48 घंटे में दोनों गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
बस्ती पुलिस ने 21 जून 2026 को बाबूलाल चौधरी हत्याकांड का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया — मृतक के सगे भाई शिवकुमार चौधरी और उसके पुत्र पंकज चौधरी को। पुलिस के अनुसार, पैतृक संपत्ति और लगभग ₹5 लाख की रकम को लेकर चल रहे पारिवारिक विवाद ने इस हत्या की नींव रखी। घटना के मात्र 48 घंटे के भीतर पुलिस ने मामले का पर्दाफाश कर दिया।
घटनाक्रम: कैसे सामने आई साजिश
19 जून को बाबूलाल चौधरी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद हुआ था। इसके बाद मृतक के भाई शिवकुमार चौधरी ने अज्ञात लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल कई टीमों का गठन किया।
जाँच के दौरान घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, सर्विलांस इनपुट और संदिग्धों की गतिविधियों के गहन विश्लेषण के बाद पुलिस की दिशा मृतक के परिजनों की ओर मुड़ गई। यह ऐसे समय में आया जब शिकायतकर्ता स्वयं शिवकुमार ही थे — जो बाद में मुख्य आरोपी निकले।
हत्या की वजह: संपत्ति और धन का विवाद
पुलिस के अनुसार, बाबूलाल चौधरी की कोई संतान या प्रत्यक्ष वारिस नहीं था। वह अपने हिस्से की लगभग ₹5 लाख की रकम की माँग कर रहे थे। इसके साथ ही पैतृक ज़मीन को लेकर भी परिवार के भीतर तनाव चल रहा था। आरोप है कि शिवकुमार और उनके पुत्र पंकज पैतृक संपत्ति पर एकाधिकार चाहते थे, और इसी लालच में दोनों ने मिलकर हत्या की साजिश रची।
गिरफ्तारी और बरामदगी
पुलिस ने शिवकुमार चौधरी और पंकज चौधरी को रतनपुर मोड़ के पास से गिरफ्तार किया। दोनों आरोपी रतनपुर अर्जुन गाँव के निवासी हैं। पूछताछ के दौरान दोनों ने अपना अपराध स्वीकार किया। उनकी निशानदेही पर हत्या में इस्तेमाल की गई ईंट तथा बाबूलाल का मोबाइल फोन बरामद किए गए।
पुलिस की भूमिका और तकनीकी कार्रवाई
सर्किल ऑफिसर (सदर) सत्येंद्र भूषण तिवारी ने पुलिस लाइन सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि वाल्टरगंज थाना पुलिस, स्वाट टीम और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई से यह सफलता मिली। तकनीकी साक्ष्यों और गहन पूछताछ के आधार पर हत्याकांड की पूरी साजिश उजागर की गई। आरोपियों के विरुद्ध आवश्यक विधिक कार्रवाई जारी है।
आगे क्या होगा
दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की प्रक्रिया चल रही है। पुलिस पैतृक संपत्ति विवाद के अन्य पहलुओं की भी जाँच कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या इस षड्यंत्र में कोई और भी शामिल था।