13 जुलाई 2026
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यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी का रियाद में निधन, 80 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

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यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी का रियाद में निधन, 80 वर्ष की आयु में ली अंतिम सांस

सारांश

यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी, जिनके कार्यकाल में देश गृहयुद्ध की गहरी खाई में उतरा और सऊदी नेतृत्व वाला सैन्य हस्तक्षेप शुरू हुआ, 28 मई 2026 को रियाद में 80 वर्ष की आयु में चल बसे। उनका जाना यमन के एक त्रासद राजनीतिक अध्याय के अंत का प्रतीक है।

मुख्य बातें

यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी का 28 मई 2026 को रियाद के एक अस्पताल में 80 वर्ष की आयु में निधन हुआ।
हादी का जन्म 1 सितंबर 1945 को दक्षिणी प्रांत अबयान में हुआ था; वे अक्टूबर 1994 में उपराष्ट्रपति बने।
उन्होंने फरवरी 2012 में खाड़ी-समर्थित परिवर्तन योजना के तहत राष्ट्रपति पद संभाला।
26 मार्च 2015 को उनके आग्रह पर सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों के विरुद्ध सैन्य हस्तक्षेप किया, जो विश्व के सबसे बड़े मानवीय संकटों में से एक बन गया।
अप्रैल 2022 में हादी ने अपनी शक्तियाँ आठ सदस्यीय राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद को सौंप दीं।
उनके निधन के बाद भी यमन हूती नियंत्रित उत्तर और सरकार-नियंत्रित दक्षिण में बँटा हुआ है।

यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्द-रब्बू मंसूर हादी का गुरुवार, 28 मई 2026 को रियाद के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। यमन सरकारी टेलीविजन और परिवार के एक करीबी सूत्र ने इस दुखद खबर की पुष्टि की। हादी का नाम यमन के सबसे उथल-पुथल भरे दशकों से अटूट रूप से जुड़ा है — एक ऐसा दौर जिसने देश को गृहयुद्ध की आग में झोंक दिया और दुनिया के सबसे भीषण मानवीय संकटों में से एक को जन्म दिया।

अंतिम क्षण और मृत्यु की पुष्टि

परिवार के सूत्र के अनुसार, हाल के दिनों में अचानक स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न होने के बाद 28 मई 2026 की सुबह रियाद के एक अस्पताल में उनका निधन हुआ। सऊदी अरब से संचालित यमन सरकारी प्रसारक यमन टीवी ने यह समाचार प्रसारित किया। गौरतलब है कि हादी पिछले कई वर्षों से रियाद में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे थे।

जीवन परिचय: सैनिक से राष्ट्रपति तक

हादी का जन्म 1 सितंबर 1945 को यमन के दक्षिणी प्रांत अबयान में हुआ था। उन्होंने सैन्य और राजनीतिक सोपान पर धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई और अक्टूबर 1994 में उपराष्ट्रपति पद पर आसीन हुए।

फरवरी 2012 में हादी ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली। यह खाड़ी देशों के समर्थन से तैयार किए गए एक राजनीतिक परिवर्तन योजना का हिस्सा था, जो तब अस्तित्व में आई जब दीर्घकालिक राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह ने 'अरब स्प्रिंग' के दौरान उठे व्यापक जन-आंदोलन के दबाव में इस्तीफा दे दिया।

सत्ता संभालते ही टूटा सपना

राष्ट्रपति बनने के बाद हादी ने यमन की सैन्य और सुरक्षा संस्थाओं के ढाँचे में व्यापक सुधार की पहल की — विरोधी सशस्त्र गुटों को एकीकृत करने और सेना को पुनर्गठित करने का प्रयास किया गया। किंतु यह राजनीतिक परिवर्तन तब संकट में पड़ गया जब हूती बलों ने दक्षिण की ओर कूच करते हुए सना की प्रमुख सरकारी संस्थाओं पर कब्जा जमा लिया।

जनवरी 2015 में हूती लड़ाकों ने राष्ट्रपति भवन को घेर लिया और हादी को राजधानी में नज़रबंद कर दिया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया। अगले महीने वे दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन फरार हो गए, अपना इस्तीफा वापस लिया और विदेशी सैन्य हस्तक्षेप की अपील की।

सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन का हस्तक्षेप

26 मार्च 2015 को हादी के आग्रह पर सऊदी अरब के नेतृत्व में एक सैन्य गठबंधन ने हूतियों के विरुद्ध हवाई अभियान शुरू किया। इस हस्तक्षेप ने एक विनाशकारी संघर्ष को जन्म दिया जो वर्षों तक जारी रहा और जिसे संयुक्त राष्ट्र ने विश्व के सबसे भीषण मानवीय संकटों में से एक करार दिया।

यह ऐसे समय में आया जब यमन पहले से ही आर्थिक बदहाली और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था। गौरतलब है कि 'अरब स्प्रिंग' — 2010 के अंत में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में उठी लोकतंत्र-समर्थक क्रांतिकारी लहर — ने क्षेत्र के कई दशकों पुराने सत्तावादी शासनों को हिलाकर रख दिया था।

सत्ता हस्तांतरण और विरासत

अप्रैल 2022 में हादी ने अपनी राष्ट्रपति शक्तियाँ आठ सदस्यीय राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद को सौंप दीं। इस परिषद का उद्देश्य हूती-विरोधी गुटों को एकजुट करना और संघर्ष के राजनीतिक समाधान की दिशा में नए सिरे से प्रयास करना था।

हादी के निधन के समय भी यमन बँटा हुआ है — हूती विद्रोही सना और उत्तरी यमन के अधिकांश हिस्से पर काबिज हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार अदन से संचालित होती है। हादी के जाने से यमन के संकट का एक अध्याय बंद होता है, लेकिन देश का भविष्य अब भी अनिश्चितता के धुंध में है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न ही दक्षिणी अलगाववादियों को एकजुट कर सके — यह उनकी व्यक्तिगत विफलता से अधिक उस अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विफलता है जिसने यमन को एक शतरंज की बिसात मान लिया। सऊदी नेतृत्व वाला सैन्य हस्तक्षेप जो उनके आग्रह पर शुरू हुआ, वह दशक भर बाद भी यमनी जनता के लिए तबाही का पर्याय बना हुआ है। असली सवाल यह है कि उनके बाद राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद उस राजनीतिक वैधता को कहाँ से लाएगी जो हादी के पास भी नाममात्र की ही थी।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमन के पूर्व राष्ट्रपति हादी का निधन कब और कहाँ हुआ?
अब्द-रब्बू मंसूर हादी का निधन 28 मई 2026 को सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एक अस्पताल में हुआ। परिवारी सूत्र के अनुसार हाल के दिनों में अचानक स्वास्थ्य समस्या उत्पन्न होने के बाद उनका निधन हुआ।
अब्द-रब्बू मंसूर हादी कौन थे और उन्होंने यमन पर कब तक शासन किया?
हादी यमन के राष्ट्रपति थे जिन्होंने फरवरी 2012 से अप्रैल 2022 तक पद संभाला। वे खाड़ी-समर्थित परिवर्तन योजना के तहत सत्ता में आए थे और उनका कार्यकाल यमन के गृहयुद्ध तथा हूती उभार से चिह्नित रहा।
यमन में हूती संकट और हादी का क्या संबंध था?
जनवरी 2015 में हूती लड़ाकों ने सना में राष्ट्रपति भवन घेर लिया और हादी को नज़रबंद कर दिया, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। बाद में अदन से इस्तीफा वापस लेकर उन्होंने सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन से सैन्य हस्तक्षेप की माँग की, जिसने 26 मार्च 2015 को हूतियों के विरुद्ध अभियान शुरू किया।
हादी ने अपनी राष्ट्रपति शक्तियाँ कब और किसे सौंपीं?
अप्रैल 2022 में हादी ने अपनी शक्तियाँ आठ सदस्यीय राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद को हस्तांतरित कीं। इस परिषद का उद्देश्य हूती-विरोधी गुटों को एकजुट करना और संघर्ष के राजनीतिक समाधान की कोशिशों को नई दिशा देना था।
हादी के निधन के बाद यमन की स्थिति क्या है?
हादी के निधन के समय यमन अभी भी बँटा हुआ है — हूती विद्रोही सना और उत्तरी यमन के अधिकांश हिस्से पर काबिज हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार अदन से संचालित होती है। राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद अब सरकार का नेतृत्व कर रही है।
राष्ट्र प्रेस
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