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यमन के पूर्व राष्ट्रपति हादी के निधन पर भारत का शोक, दूतावास पहुंचीं विदेश सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन

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यमन के पूर्व राष्ट्रपति हादी के निधन पर भारत का शोक, दूतावास पहुंचीं विदेश सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन

सारांश

यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी के निधन पर भारत ने आधिकारिक शोक प्रकट किया। विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने नई दिल्ली के यमन दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। भारत ने हादी को ‘सच्चा मित्र’ बताते हुए द्विपक्षीय संबंधों में उनके योगदान को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी का निधन 28 मई को हुआ।
विदेश मंत्रालय की सचिव श्रीप्रिया रंगनाथन ने 3 जून को नई दिल्ली स्थित यमन दूतावास में श्रद्धांजलि दी।
भारत सरकार ने हादी को ‘भारत का सच्चा मित्र’ बताया और परिवार व यमन की जनता को संवेदनाएं भेजीं।
हादी के कार्यकाल में भारत-यमन के राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा मिली थी।
दूतावास में विभिन्न देशों के राजनयिक भी शोक व्यक्त करने पहुंचे।

भारत सरकार ने यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए 3 जून को नई दिल्ली स्थित यमन गणराज्य के दूतावास में औपचारिक श्रद्धांजलि अर्पित की। विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन ने दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए और दिवंगत नेता को नमन किया। पूर्व राष्ट्रपति हादी का निधन 28 मई को हुआ था।

विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान

विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि भारत सरकार पूर्व राष्ट्रपति हादी के परिवार, यमन सरकार और वहां की जनता के प्रति अपनी हार्दिक संवेदनाएं व्यक्त करती है। बयान में भारत ने इस कठिन घड़ी में यमन के साथ अपनी एकजुटता भी दोहराई।

‘भारत के सच्चे मित्र’ के रूप में याद

आधिकारिक बयान में पूर्व राष्ट्रपति हादी को ‘भारत का सच्चा मित्र’ बताते हुए कहा गया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके नेतृत्व में भारत और यमन के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा मिली थी।

राजनीतिक विरासत और भूमिका

अब्दरब्बुह मंसूर हादी यमन की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे और उन्होंने देश के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में नेतृत्व संभाला। उनके कार्यकाल के दौरान भारत-यमन के मित्रतापूर्ण संबंध बनाए रखने और उन्हें आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की जाती रही है।

दूतावास में राजनयिकों की उपस्थिति

नई दिल्ली स्थित यमन दूतावास में विभिन्न देशों के राजनयिकों और अधिकारियों ने भी पहुंचकर शोक संवेदनाएं प्रकट कीं। इस अवसर पर हादी के योगदान और उनकी राजनीतिक विरासत को याद किया गया। गौरतलब है कि भारत और यमन के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं, और दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रीय व अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर मिलकर सहयोग किया है।

आगे की राह

भारत ने उम्मीद जताई कि पूर्व राष्ट्रपति हादी की विरासत दोनों देशों के बीच मित्रता और सहयोग को आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती रहेगी। भारत सरकार ने दिवंगत नेता की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए यमन की जनता के प्रति अपनी संवेदनाएं एक बार फिर दोहराईं। पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के बीच यह राजनयिक संदेश भारत की संतुलित विदेश नीति का संकेत भी माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पश्चिम एशिया में संतुलन साधने की रणनीति का संकेत भी है। हादी का कार्यकाल यमन के सबसे अस्थिर दौर से जुड़ा रहा, और उनकी सरकार को सऊदी अरब समर्थित गठबंधन की पीठ मिली थी — ऐसे में भारत का खुला शोक संदेश खाड़ी देशों के साथ उसके गहराते रिश्तों के अनुरूप है। गौरतलब है कि हूती संकट और लाल सागर में जहाजों पर हमलों के बीच भारत की यमन-नीति अब महज मानवीय सहायता तक सीमित नहीं, बल्कि व्यापक क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ गई है। आने वाले समय में नई दिल्ली पर नज़र रहेगी कि वह यमन की निर्वासित मान्यता-प्राप्त सरकार के साथ संवाद की कौन-सी नई परतें खोलती है।
RashtraPress
20 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यमन के पूर्व राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी कौन थे?
अब्दरब्बुह मंसूर हादी यमन के पूर्व राष्ट्रपति और देश की राजनीति के प्रमुख नेताओं में से एक थे, जिन्होंने यमन के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में भारत और यमन के बीच राजनीतिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक सहयोग को मजबूती मिली।
भारत की ओर से यमन दूतावास में किसने श्रद्धांजलि दी?
विदेश मंत्रालय की सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) श्रीप्रिया रंगनाथन ने 3 जून को नई दिल्ली स्थित यमन गणराज्य के दूतावास पहुंचकर शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने भारत सरकार की ओर से दिवंगत नेता को औपचारिक श्रद्धांजलि अर्पित की।
पूर्व राष्ट्रपति हादी का निधन कब हुआ?
विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति अब्दरब्बुह मंसूर हादी का निधन 28 मई को हुआ था। भारत सरकार ने उनके परिवार, यमन सरकार और जनता के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
भारत-यमन संबंधों के लिए हादी का योगदान क्या रहा?
विदेश मंत्रालय के बयान में हादी को ‘भारत का सच्चा मित्र’ बताया गया है, जिन्होंने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई गति मिली।
क्या किसी अन्य देश के राजनयिकों ने भी शोक व्यक्त किया?
हां, नई दिल्ली स्थित यमन दूतावास में विभिन्न देशों के राजनयिकों और अधिकारियों ने पहुंचकर शोक संवेदनाएं प्रकट कीं। इस अवसर पर हादी के राजनीतिक योगदान और विरासत को याद किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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