गढ़चिरौली में कथित नक्सली पर्चा बरामद, ओम साईं मेमोरियल कंपनी को बंद करने की चेतावनी; पुलिस अलर्ट
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में 12 जुलाई को एटापल्ली तहसील के पिपली-बुर्गी पुलिस थाना क्षेत्र में मुख्य सड़क किनारे एक कथित नक्सली पर्चा बरामद होने के बाद सुरक्षा एजेंसियाँ हाई अलर्ट पर आ गई हैं। पर्चे में ओम साईं मेमोरियल कंपनी को बंद करने की चेतावनी दी गई है और भाजपा नेता अशोक कामड़े का नाम भी उल्लेखित है। यह घटना गृह मंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद उन्मूलन के लिए तय की गई समयसीमा के बाद जिले में इस प्रकार का पहला कथित पर्चा सामने आने के रूप में देखी जा रही है।
पर्चे का विवरण और बरामदगी
सूत्रों के अनुसार, लाल रंग के कपड़े पर चेतावनी संदेश लिखकर सड़क किनारे लगाया गया था। इसके साथ ही सफेद कागज पर लाल स्याही से लिखा एक अलग पर्चा भी मिला। सूचना मिलते ही गढ़चिरौली पुलिस मौके पर पहुँची, पर्चे को अपने कब्जे में लिया और जाँच शुरू कर दी।
ओम साईं मेमोरियल कंपनी पर विरोध
बताया जा रहा है कि पर्चे में मुख्य रूप से ओम साईं मेमोरियल कंपनी की गतिविधियों को लेकर विरोध जताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इस कंपनी को खनन कार्य के लिए लगभग 640 हेक्टेयर भूमि आवंटित की गई है और यह जिले में अपने कार्यों का विस्तार कर रही है। पर्चे में भाजपा नेता अशोक कामड़े के नाम का उल्लेख होना भी जाँच का अहम हिस्सा बन गया है।
प्रमाणिकता पर सवाल
पुलिस इस बात की जाँच कर रही है कि यह पर्चा वास्तव में किसी नक्सली संगठन की ओर से जारी किया गया है या किसी अन्य समूह द्वारा माहौल बनाने का प्रयास है। एक उल्लेखनीय तथ्य यह है कि पर्चे में लॉयड्स मेटल कंपनी का नाम शामिल नहीं है, जबकि इससे पहले कथित नक्सली संगठनों की ओर से लॉयड्स मेटल परियोजना का कई बार विरोध किया जा चुका है। इसी विसंगति के कारण सुरक्षा एजेंसियाँ पर्चे की प्रमाणिकता को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस की प्रतिक्रिया
अधिकारियों के अनुसार, इलाके में गश्त और तलाशी अभियान तेज कर दिए गए हैं। किसी भी संभावित अप्रिय घटना को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें गढ़चिरौली जैसे संवेदनशील जिलों में नक्सल-विरोधी अभियानों को और तेज करने की दिशा में काम कर रही हैं।
आगे क्या
पुलिस पर्चे की जाँच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर कर रही है। जाँच के नतीजे यह तय करेंगे कि यह वास्तविक नक्सली गतिविधि है या किसी और उद्देश्य से रचा गया माहौल। गढ़चिरौली में खनन और औद्योगिक विस्तार को लेकर पहले से चली आ रही संवेदनशीलता इस मामले को और जटिल बनाती है।