1 अक्टूबर 2026
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गोपालगंज में गंडक का तटबंध टूटा, बैकुंठपुर के कई गांव जलमग्न; परिवार बच्चों की किताबें तक न बचा सके

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गोपालगंज में गंडक का तटबंध टूटा, बैकुंठपुर के कई गांव जलमग्न; परिवार बच्चों की किताबें तक न बचा सके

सारांश

गंडक नदी का तटबंध टूटते ही गोपालगंज के बैकुंठपुर में रात के अंधेरे में घरों में पानी घुस गया — अनाज, कपड़े, बच्चों की किताबें सब डूब गईं। 14 नावें और पाँच सामुदायिक रसोई तैनात हैं, लेकिन हज़ारों परिवारों के सामने खाने-रहने का संकट बरकरार है।

मुख्य बातें

गंडक नदी का तटबंध टूटने के बाद 1 अक्टूबर 2026 को बैकुंठपुर प्रखंड के कई गांवों में बाढ़ का पानी फैला।
बांसघाट मसुरियां , शीतलपुर , खोम्हारीपुर और दीपउ-पकड़ी समेत कई गांव प्रभावित; बांसघाट मसुरियां में स्थिति सर्वाधिक गंभीर।
बाढ़ पीड़ितों का अनाज, कपड़े और बच्चों की किताबें पानी में बर्बाद; गन्ना, मक्का और धान की फसलों को भी नुकसान।
प्रशासन ने 5 स्थानों पर सामुदायिक रसोई शुरू की, मेडिकल व पशु चिकित्सा शिविर लगाए।
राहत कार्य में 14 SDRF एवं पंजीकृत नावें तैनात; 24 घंटे सतर्कता के निर्देश जारी।
ग्रामीणों ने और अधिक नावें, राहत सामग्री और आर्थिक सहायता की माँग की है।

बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ने और तटबंध टूटने के बाद बैकुंठपुर प्रखंड के कई गांवों में 1 अक्टूबर 2026 को बाढ़ का पानी तेज़ी से फैल गया। बांसघाट मसुरियां, शीतलपुर, खोम्हारीपुर और दीपउ-पकड़ी समेत कई गांवों में घरों और सड़कों पर पानी भर गया, जिससे हज़ारों ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित बांसघाट मसुरियां गांव में स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है।

रात में अचानक आया पानी, सामान समेटने का मौका नहीं मिला

ग्रामीणों के अनुसार, तटबंध टूटने के बाद रात के अंधेरे में पानी अचानक और तेज़ी से बढ़ा, देखते ही देखते घरों में घुस गया। परिवारों को अपना ज़रूरी सामान समेटने तक का समय नहीं मिला।

बाढ़ पीड़ित मालती देवी ने बताया कि घर में रखा अनाज, कपड़े और बच्चों की किताबें पानी में बर्बाद हो गईं। उन्होंने कहा कि अब परिवार के सामने रहने और खाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। सुधा देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने भी प्रशासन से जल्द राहत सामग्री और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

शिक्षा और कृषि पर भी गहरा असर

बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा — प्रभावित इलाकों के कई स्कूलों में पानी प्रवेश कर गया है, जिससे पढ़ाई बाधित हो गई है। स्कूल परिसरों में जलभराव के कारण बच्चों और शिक्षकों की आवाजाही मुश्किल हो गई है।

कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुँचा है। खेतों में पानी भरने से गन्ना, मक्का और धान की फसलों को नुकसान पहुँचने की सूचना है। यह ऐसे समय में आया है जब किसान खरीफ फसल की कटाई के करीब थे और लागत वसूल होने की उम्मीद बांधे बैठे थे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया

जिला प्रशासन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। अपर समाहर्ता राजेश्वरी पांडेय, अनुमंडल पदाधिकारी (गोपालगंज) डॉ. प्रेरणा सिंह, अंचलाधिकारी रजत वर्णवाल और अन्य पदाधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में कैंप कर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

प्रशासन ने पाँच स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित की है — रामपुर टेंगराही, जागीरीटोला के मंगुराहा मध्य विद्यालय, मेहंदिया हीरा पकड़, कटघरवा के रामनगर और राजवाही में लोगों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल और पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं।

14 नावों से चल रहा बचाव अभियान

राहत और बचाव कार्य के लिए 14 सरकारी SDRF एवं पंजीकृत नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनके ज़रिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने और ज़रूरी राहत सामग्री वितरित करने का काम जारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नावों की संख्या और बढ़ाने की माँग की है ताकि दूर-दराज़ के परिवारों तक भी मदद पहुँच सके।

प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और अतिरिक्त पदाधिकारियों व कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। घर और सामान गंवा चुके ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि जल्द भोजन, आवश्यक सामग्री और आर्थिक सहायता मिलेगी — और प्रशासन की राहत व्यवस्था इस उम्मीद पर खरी उतरेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि हर मानसून में एक ही नदी एक ही जगह बार-बार क्यों तोड़ती है — और इसकी जवाबदेही कब तय होगी।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोपालगंज में बाढ़ कैसे आई?
गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने और तटबंध टूटने के बाद 1 अक्टूबर 2026 को रात में अचानक पानी तेज़ी से फैला और बैकुंठपुर प्रखंड के कई गांवों में घरों में घुस गया। ग्रामीणों को सामान समेटने का मौका भी नहीं मिला।
कौन-कौन से गांव बाढ़ से प्रभावित हैं?
बांसघाट मसुरियां, शीतलपुर, खोम्हारीपुर और दीपउ-पकड़ी समेत बैकुंठपुर प्रखंड के कई गांव प्रभावित हैं। बांसघाट मसुरियां में स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है।
प्रशासन ने राहत के लिए क्या कदम उठाए हैं?
जिला प्रशासन ने पाँच स्थानों पर सामुदायिक रसोई शुरू की है और 14 SDRF व पंजीकृत नावों से बचाव अभियान चलाया जा रहा है। मेडिकल और पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं तथा 24 घंटे सतर्कता के निर्देश जारी हैं।
बाढ़ से फसलों को कितना नुकसान हुआ है?
खेतों में पानी भरने से गन्ना, मक्का और धान की फसलों को नुकसान पहुँचने की सूचना है। यह नुकसान ऐसे समय हुआ है जब किसान खरीफ फसल की कटाई के करीब थे।
बाढ़ पीड़ितों की प्रमुख माँगें क्या हैं?
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल राहत सामग्री, नावों की संख्या में बढ़ोतरी और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की माँग की है। मालती देवी और सुधा देवी जैसे पीड़ितों ने खाने-रहने की तत्काल ज़रूरत पर ज़ोर दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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