गोपालगंज में गंडक का तटबंध टूटा, बैकुंठपुर के कई गांव जलमग्न; परिवार बच्चों की किताबें तक न बचा सके
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के गोपालगंज जिले में गंडक नदी का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ने और तटबंध टूटने के बाद बैकुंठपुर प्रखंड के कई गांवों में 1 अक्टूबर 2026 को बाढ़ का पानी तेज़ी से फैल गया। बांसघाट मसुरियां, शीतलपुर, खोम्हारीपुर और दीपउ-पकड़ी समेत कई गांवों में घरों और सड़कों पर पानी भर गया, जिससे हज़ारों ग्रामीणों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया। बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित बांसघाट मसुरियां गांव में स्थिति सबसे गंभीर बताई जा रही है।
रात में अचानक आया पानी, सामान समेटने का मौका नहीं मिला
ग्रामीणों के अनुसार, तटबंध टूटने के बाद रात के अंधेरे में पानी अचानक और तेज़ी से बढ़ा, देखते ही देखते घरों में घुस गया। परिवारों को अपना ज़रूरी सामान समेटने तक का समय नहीं मिला।
बाढ़ पीड़ित मालती देवी ने बताया कि घर में रखा अनाज, कपड़े और बच्चों की किताबें पानी में बर्बाद हो गईं। उन्होंने कहा कि अब परिवार के सामने रहने और खाने की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। सुधा देवी समेत अन्य ग्रामीणों ने भी प्रशासन से जल्द राहत सामग्री और आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।
शिक्षा और कृषि पर भी गहरा असर
बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा — प्रभावित इलाकों के कई स्कूलों में पानी प्रवेश कर गया है, जिससे पढ़ाई बाधित हो गई है। स्कूल परिसरों में जलभराव के कारण बच्चों और शिक्षकों की आवाजाही मुश्किल हो गई है।
कृषि क्षेत्र को भी भारी नुकसान पहुँचा है। खेतों में पानी भरने से गन्ना, मक्का और धान की फसलों को नुकसान पहुँचने की सूचना है। यह ऐसे समय में आया है जब किसान खरीफ फसल की कटाई के करीब थे और लागत वसूल होने की उम्मीद बांधे बैठे थे।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
जिला प्रशासन के अनुसार, प्रभावित क्षेत्रों में युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य चलाया जा रहा है। अपर समाहर्ता राजेश्वरी पांडेय, अनुमंडल पदाधिकारी (गोपालगंज) डॉ. प्रेरणा सिंह, अंचलाधिकारी रजत वर्णवाल और अन्य पदाधिकारी प्रभावित क्षेत्रों में कैंप कर स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
प्रशासन ने पाँच स्थानों पर सामुदायिक रसोई संचालित की है — रामपुर टेंगराही, जागीरीटोला के मंगुराहा मध्य विद्यालय, मेहंदिया हीरा पकड़, कटघरवा के रामनगर और राजवाही में लोगों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल और पशु चिकित्सा शिविर भी लगाए गए हैं।
14 नावों से चल रहा बचाव अभियान
राहत और बचाव कार्य के लिए 14 सरकारी SDRF एवं पंजीकृत नावों का परिचालन किया जा रहा है। इनके ज़रिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाने और ज़रूरी राहत सामग्री वितरित करने का काम जारी है। ग्रामीणों ने प्रशासन से नावों की संख्या और बढ़ाने की माँग की है ताकि दूर-दराज़ के परिवारों तक भी मदद पहुँच सके।
प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और अतिरिक्त पदाधिकारियों व कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। घर और सामान गंवा चुके ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि जल्द भोजन, आवश्यक सामग्री और आर्थिक सहायता मिलेगी — और प्रशासन की राहत व्यवस्था इस उम्मीद पर खरी उतरेगी।