गार्गी पुरस्कार योजना: राजस्थान की 3.63 लाख छात्राओं को ₹109 करोड़ वितरित, CM भजनलाल ने किया संबोधन
सारांश
मुख्य बातें
राजस्थान सरकार ने गार्गी पुरस्कार योजना के अंतर्गत राज्य की 3.63 लाख छात्राओं को ₹109 करोड़ की प्रोत्साहन राशि वितरित की है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मंगलवार, 3 नवंबर 2026 को जयपुर के मानसरोवर स्थित आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित प्रतिभा विकास शिविर में कहा कि बेटियाँ समाज और राष्ट्र की शक्ति हैं, और लड़कियों की शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रतिभा विकास शिविर को संबोधित करते हुए कहा कि जब लड़कियों को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर मिलते हैं, तो उनकी प्रगति से न केवल वे स्वयं, बल्कि उनके परिवार और पूरा समाज लाभान्वित होता है। इस अवसर पर उन्होंने रामायण पर आधारित एक ज्ञान परीक्षा का पोस्टर भी जारी किया।
शर्मा ने कहा कि शिक्षा को केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करने का साधन नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इसे व्यक्ति के व्यक्तित्व, सोच और मूल्यों के विकास की नींव के रूप में देखा जाना चाहिए।
सरकारी योजनाओं का विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि यूनिफॉर्म और स्कूल बैग के लिए वित्तीय सहायता योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों और कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से प्रति छात्र ₹800 सीधे हस्तांतरित किए जा रहे हैं। यह पहल छात्राओं की शिक्षा में आर्थिक बाधाओं को कम करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में लड़कियों के लिए समान अवसर, सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर विशेष ज़ोर दिया गया है, साथ ही उनकी शिक्षा में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए विशिष्ट प्रावधान भी किए गए हैं।
केंद्र-राज्य समन्वय और 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ'
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इस अभियान ने देशभर में लड़कियों की शिक्षा और सशक्तिकरण के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की 'डबल इंजन' सरकार की नीतियों ने लड़कियों के जन्म, शिक्षा और समाज में उनकी भागीदारी के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया है।
यह ऐसे समय में आया है जब राजस्थान में बालिका शिक्षा की दर में सुधार तो हुआ है, परंतु ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में ड्रॉपआउट दर अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
सांस्कृतिक मूल्यों पर जोर
शर्मा ने कहा कि भारत की संस्कृति ने जीवन, मूल्यों और कर्तव्यों के बारे में अमूल्य शिक्षाएँ प्रदान की हैं। इस समृद्ध विरासत और महान व्यक्तित्वों के आदर्शों को युवा पीढ़ी तक पहुँचाना वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल अधिकारों पर ध्यान केंद्रित करना पर्याप्त नहीं है — व्यक्तियों को परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियाँ भी समझनी होंगी।
आगे की राह
राज्य सरकार की ओर से गार्गी पुरस्कार योजना जैसी पहलों के ज़रिये छात्राओं को प्रोत्साहित करने का यह क्रम जारी रहने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि DBT आधारित वित्तीय सहायता और पुरस्कार योजनाओं का संयोजन बालिका शिक्षा में दीर्घकालिक सुधार की दिशा में महत्त्वपूर्ण साबित हो सकता है।