कन्या सुमंगला योजना: 27 लाख से अधिक बालिकाओं को मिला लाभ, ₹674 करोड़ DBT से सीधे खातों में
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने राज्य में बालिका सशक्तीकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया है — अब तक 27,37,703 बालिकाओं को इस योजना का लाभ मिल चुका है और ₹674.15 करोड़ की राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जा चुकी है। महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित यह योजना 2019 में शुरू हुई थी और जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक बालिकाओं को चरणबद्ध आर्थिक सहायता देती है।
योजना की संरचना और सहायता राशि
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के तहत छह चरणों में कुल ₹25,000 की सहायता राशि दी जाती है। बच्ची के जन्म पर ₹5,000, एक वर्ष तक पूर्ण टीकाकरण पर ₹2,000, कक्षा-1 में प्रवेश पर ₹3,000, कक्षा-6 में प्रवेश पर ₹3,000, कक्षा-9 में प्रवेश पर ₹5,000 और इंटरमीडिएट/हाईस्कूल उत्तीर्ण कर डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश पर ₹7,000 की राशि दी जाती है। यह संरचना बालिकाओं की शिक्षा को प्रत्येक महत्वपूर्ण पड़ाव पर प्रोत्साहित करती है और परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने में सहायक है।
डिजिटल व्यवस्था और पारदर्शिता
योजना का संचालन पूरी तरह ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जा रहा है। पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम (PFMS) और DBT के संयुक्त उपयोग ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर दी है और भुगतान में अनियमितताओं की संभावना पर प्रभावी अंकुश लगाया है। समयबद्ध भुगतान और डिजिटल पारदर्शिता ने आम परिवारों का योजना के प्रति भरोसा मज़बूत किया है।
अधिकारियों का क्या कहना है
महिला कल्याण विभाग की निदेशक सी. इन्दुमती ने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित करने में भी अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया कि सभी जिलों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी पात्र बालिका योजना के लाभ से वंचित न रहे और समयबद्ध पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में बालिका शिक्षा और लिंगानुपात सुधार एक सतत चुनौती रही है। गौरतलब है कि 2019 में योजना की शुरुआत के बाद से लाभार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में योजना की पहुँच को दर्शाती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार ने बालिकाओं के सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर भविष्य के लिए इस योजना को प्राथमिकता दी है।
आगे की राह
विभाग के अनुसार, आने वाले समय में पंजीकरण प्रक्रिया को और सरल बनाने तथा दूरदराज़ के क्षेत्रों तक योजना की पहुँच विस्तारित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि DBT-आधारित यह मॉडल अन्य कल्याण योजनाओं के लिए भी एक प्रभावी उदाहरण बन सकता है।