उत्तर प्रदेश में महिला सशक्तिकरण: योगी सरकार की 9 वर्षों की यात्रा
सारांश
Key Takeaways
- महिलाओं की सुरक्षा के लिए जीरो टॉलरेंस नीति लागू की गई है।
- कन्या सुमंगला योजना से बेटियों का विकास सुनिश्चित हो रहा है।
- महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं।
- महिला अपराधों में कमी आई है।
- आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का मानदेय बढ़ाया जाएगा।
आगरा, 22 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सफलतापूर्वक 9 वर्ष पूरे होने के मौके पर, आगरा में महिला कल्याण, बाल विकास और पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने रविवार को एक प्रेस वार्ता में अपने विभाग की उपलब्धियों का ब्योरा दिया।
उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने महिलाओं और बच्चों के विकास को केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा है। अब यह सुरक्षा, सम्मान, पोषण, शिक्षा, स्वावलंबन और सामाजिक न्याय का एक व्यापक मॉडल बन चुका है। कैबिनेट मंत्री ने उल्लेख किया कि यूपी में महिला सशक्तिकरण अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक जमीनी हकीकत बन चुका है। महिलाएं अब सिर्फ नौकरी की तलाश नहीं कर रही हैं, बल्कि नए अवसर भी उत्पन्न कर रही हैं।
कैबिनेट मंत्री बेबी रानी मौर्य ने जानकारी दी कि योगी सरकार ने बेटी के जन्म से लेकर उसके शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर होने तक एक संपूर्ण व्यवस्था स्थापित की है। कन्या सुमंगला योजना के तहत अब तक 26.81 लाख बेटियों को लाभान्वित किया गया है। मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना (कोविड और सामान्य) के माध्यम से 1 लाख 5 हजार से अधिक बेसहारा बच्चों को संरक्षण दिया गया। वहीं, मिशन वात्सल्य के अंतर्गत 1 लाख से अधिक बच्चों को उनके बिछड़े परिवारों से मिलाया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार बच्चों को केवल आंकड़े नहीं, बल्कि भविष्य के नागरिक के रूप में देखती है।
उन्होंने बताया कि पोषण और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगी सरकार के प्रयासों के परिणाम अब स्पष्ट हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना से 60 लाख माताएं लाभान्वित हुई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रसव पर 1400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये की सहायता दी जा रही है। संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 84 प्रतिशत के पार पहुंच गया है। प्रदेश में 0 से 5 वर्ष के बच्चों में स्टंटिंग (ठिगनापन) की दर में 6.6 प्रतिशत और अंडरवेट दर में 7.5 प्रतिशत का सुधार हुआ है। 2 करोड़ 12 लाख बच्चों और महिलाओं को अनुपूरक पुष्टाहार मिल रहा है। आंगनबाड़ी केंद्रों में 'संभव अभियान' के तहत तकनीक (पोषण ट्रैकर) का उपयोग कर कुपोषण के खिलाफ युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि महिला सुरक्षा के प्रति योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति के परिणाम दिख रहे हैं। 2016 में यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 1 घंटा 5 मिनट था, जो 2025 में घटकर केवल 06 मिनट 41 सेकंड रह जाएगा। प्रदेश के सभी थानों में मिशन शक्ति केंद्र स्थापित किए गए हैं और महिला अपराधों में भारी गिरावट आई है। बलात्कार की घटनाएं 33.92 प्रतिशत, अपहरण में 17.03 प्रतिशत और घरेलू हिंसा में 9.54 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यूपी पुलिस में महिलाओं के लिए 20 प्रतिशत पद आरक्षित किए गए हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज 44,000 से अधिक महिलाएं पुलिस बल का हिस्सा हैं। 3 नई महिला पीएसी बटालियन का गठन और हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड की तैनाती की गई है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि असली सशक्तिकरण आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही आता है। यूपी में 1 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) से जुड़ी हैं। 'लखपति दीदी योजना' के तहत 18.55 लाख से अधिक महिलाएं लखपति के स्तर तक पहुंच चुकी हैं। 39,885 बीसी सखियों ने 42,711 करोड़ रुपये का लेनदेन किया है और 116 करोड़ रुपये का लाभांश कमाया है। वहीं 15,409 विद्युत सखियों ने करोड़ों का बिल कलेक्शन कर कमीशन अर्जित किया है। औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है। 2017 में जहां महिला श्रम बल भागीदारी केवल 13 प्रतिशत थी, वह अब बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है।
मंत्री बेबी रानी मौर्य ने प्रेस वार्ता के अंत में कहा कि योगी सरकार ने जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं का मानदेय अप्रैल 2026 से बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा उन्हें जीवन ज्योति और सुरक्षा बीमा योजनाओं से भी जोड़ा गया है। 1.90 लाख से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों को अब प्री-स्कूल के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत 5.20 लाख बेटियों की शादी कराई गई है। योगी सरकार की स्पष्ट नीयत, पारदर्शी नीतियों और ईमानदार क्रियान्वयन ने यूपी में आधी आबादी की तस्वीर बदल दी है। 'सुरक्षित नारी, सक्षम नारी, स्वावलंबी नारी' - यही आज के नए और समृद्ध उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला है।