घरेलू हिंसा के मामले सबसे ज़्यादा आयोग तक पहुँचते हैं, पुलिस संवेदनशीलता दिखाए: बबीता चौहान
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान ने 30 अक्टूबर 2026 को आगरा में कहा कि आयोग के पास आने वाली महिला शिकायतों में घरेलू हिंसा के मामले सर्वाधिक हैं और पुलिस यदि थोड़ी संवेदनशीलता दिखाए तो अनेक छोटी शिकायतें थाने स्तर पर ही हल हो सकती हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि आयोग के पास दर्ज 100 या उससे अधिक आवेदनों में से प्रत्येक का शत-प्रतिशत निस्तारण किया जाएगा।
आयोग तक क्यों पहुँच रहे हैं छोटे मामले
चौहान ने कहा कि पुलिस की लापरवाही के कारण ऐसी शिकायतें भी आयोग तक पहुँच रही हैं, जिन्हें कुछ ही मिनटों में थाने में सुलझाया जा सकता था। उनके अनुसार, पीड़ित की बात मात्र दो मिनट ध्यान से सुन लेने से उसे न्याय मिलने का भरोसा होता है — लेकिन अभी पुलिस पूरी तरह मित्रवत व्यवहार नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि शिकायतों की बढ़ती संख्या की एक बड़ी वजह पुलिस स्तर पर पर्याप्त सुनवाई न होना भी है।
शिकायतों के बदलते स्वरूप
अध्यक्ष ने बताया कि अब कई महिलाएँ मुकदमा लड़ने या कानूनी कार्रवाई की बजाय समझौते या संबंध-विच्छेद की माँग लेकर आती हैं। उन्होंने कहा कि शिकायतों के इस बदलते स्वरूप को समझना ज़रूरी है। यह ऐसे समय में आया है जब मिशन शक्ति और हेल्पलाइन नंबरों के ज़रिये महिलाओं की जागरूकता बढ़ी है, जिससे वे छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर भी थाने या आयोग पहुँच रही हैं।
परिवारों पर उठाए सवाल: मथुरा और अन्य मामले
मथुरा में सामने आए एक मामले का उल्लेख करते हुए चौहान ने बताया कि एक महिला को ससुराल में गंभीर प्रताड़ना के बाद भी उसके मायके वालों ने सामाजिक दबाव में बार-बार वापस भेजा। उन्होंने पूछा, 'क्या शादी के बाद माता-पिता की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?' एक अन्य उदाहरण में उन्होंने बताया कि चार महीने पहले शादी हुई एक लड़की चार बार मायके आ चुकी थी और हर बार उसे जबरदस्ती वापस ले जाया गया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि लड़कियों को गलत रिश्ते की सज़ा पूरी ज़िंदगी नहीं भुगतनी चाहिए।
आयोग की अपील — महिलाओं और परिवारों को
चौहान ने माता-पिता से बेटियों के अधिकारों को समझने और उनका साथ देने की अपील की। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि जीवन के महत्त्वपूर्ण निर्णय जल्दबाज़ी में न लें और अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें। उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल में बिचौलिये गायब हो जाते हैं, जबकि लड़कियाँ उसका खामियाजा भुगतती हैं — इसलिए परिवार का सक्रिय समर्थन अनिवार्य है।
आगे क्या होगा
चौहान ने भरोसा दिलाया कि आयोग अपनी जिम्मेदारी से नहीं हटेगा और मामला किसी भी स्तर का हो, हर शिकायत का निस्तारण होगा। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में मिशन शक्ति के तहत थाना स्तर पर महिला हेल्प डेस्क की स्थापना पहले से है, फिर भी मामले आयोग तक पहुँचना पुलिस संवेदनशीलता की कमी को रेखांकित करता है। आयोग की यह टिप्पणी पुलिस प्रशिक्षण और जवाबदेही की दिशा में नए सुधारों की आवश्यकता की ओर संकेत करती है।