मध्य प्रदेश महिला आयोग की संयुक्त बेंच ने 38 मामलों की सुनवाई की, दहेज-घरेलू हिंसा पर सख्त निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग की संयुक्त बेंच ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को भोपाल में दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा, बलात्कार और कार्यस्थल उत्पीड़न सहित कुल 38 गंभीर प्रकरणों की सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्रत्येक मामले में अविलंब और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
सुनवाई में क्या-क्या सामने आया
आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव और सदस्य साधना स्थापक की संयुक्त बेंच के समक्ष इन 38 प्रकरणों में आवेदक और अनावेदक दोनों पक्ष उपस्थित हुए। मामलों का वर्गीकरण इस प्रकार रहा: महिला प्रताड़ना के 10, दहेज प्रताड़ना के 5, घरेलू अत्याचार के 5 और बलात्कार के 3 प्रकरण शामिल थे।
इसके अतिरिक्त मारपीट, विभागीय विवाद, पारिवारिक कलह, हत्या, यौन शोषण, हिंसा और अन्य श्रेणी से संबंधित एक-एक प्रकरण की भी सुनवाई की गई। बेंच ने दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद प्रकरणों की प्रकृति के अनुसार संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।
कार्यस्थल उत्पीड़न का मामला
सुनवाई के दौरान एक विशेष रूप से उल्लेखनीय प्रकरण कार्यस्थल प्रताड़ना से जुड़ा था। एक स्टाफ नर्स ने अस्पताल की प्रभारी मेट्रन और वार्ड इंचार्ज पर दीर्घकालीन मानसिक उत्पीड़न तथा निजी जीवन को लेकर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियाँ करने के आरोप लगाए।
शिकायतकर्ता के अनुसार, स्वास्थ्य कारणों से डॉक्टर की सलाह पर नाइट ड्यूटी से राहत माँगने के बाद उसके साथ कथित रूप से अभद्र व्यवहार किया गया। नर्स ने आयोग से संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई और कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की माँग रखी।
दहेज प्रताड़ना का प्रकरण
एक अन्य प्रकरण में एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर दहेज की माँग को लेकर मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना करने तथा स्त्रीधन और आभूषण अपने पास रखे जाने के आरोप लगाए। महिला ने बताया कि वह पूर्व में पुलिस और महिला थाने में शिकायत दर्ज करा चुकी है।
दोनों पक्षों के बीच राजीनामा होने के बावजूद महिला के अनुसार विवाद पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ। उसने पति द्वारा लगातार संपर्क किए जाने और बिना सूचना के मिलने आने का भी आरोप लगाया। महिला ने आयोग से मामले में न्याय और उचित कार्रवाई की अपील की।
आयोग का रुख और आगे की कार्रवाई
आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने स्पष्ट किया कि महिलाओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार के अत्याचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न की शिकायतें लगातार आयोग तक पहुँच रही हैं, और यह सुनवाई उस व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार महिला सुरक्षा को लेकर नीतिगत स्तर पर सक्रियता का दावा करती रही है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।