देहरादून में राष्ट्रीय महिला आयोग की जनसुनवाई: 27 मामलों में घरेलू हिंसा और भरण-पोषण के मुद्दे छाए
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने 30 अक्टूबर 2026 को देहरादून में महिलाओं की शिकायतें सुनने के लिए जनसुनवाई आयोजित की, जिसमें कुल 27 मामले सामने आए। घरेलू हिंसा, भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े विविध मुद्दों पर आयोग ने संज्ञान लेते हुए कई मामलों का मौके पर ही समाधान किया। यह आयोग की उत्तराखंड में एक सक्रिय उपस्थिति का हिस्सा है, जिसके बाद दो दिवसीय कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
मुख्य घटनाक्रम
जनसुनवाई में सर्वाधिक शिकायतें घरेलू हिंसा से संबंधित थीं। महिलाओं ने न केवल शारीरिक हिंसा, बल्कि उससे उपजी दूसरी परेशानियों — जैसे बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव और भरण-पोषण की अनुपलब्धता — को भी आयोग के समक्ष रखा। आयोग ने प्रत्येक शिकायत की प्रकृति के अनुसार संबंधित पक्षों और अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
सामने आए मामलों की प्रकृति
जनसुनवाई में शिकायतों का दायरा व्यापक रहा। लिव-इन रिलेशनशिप और ब्रीच ऑफ ट्रस्ट से जुड़े मामले भी सामने आए, जो आधुनिक सामाजिक संदर्भों में महिलाओं के सामने खड़ी नई चुनौतियों को उजागर करते हैं। कुछ मामले सिविल प्रकृति के थे, जबकि मारपीट और शारीरिक हिंसा से जुड़ी शिकायतें भी दर्ज की गईं। गौरतलब है कि इस तरह की जनसुनवाईयाँ उन महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण मंच बनती हैं जो प्रशासनिक तंत्र की पहुँच से दूर रहती हैं।
आयोग की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
अध्यक्ष विजया रहाटकर ने बताया कि 27 में से कई मामलों का समाधान जनसुनवाई के दौरान ही किया गया। जिन मामलों में तत्काल निराकरण संभव नहीं था, उनमें संबंधित व्यवस्थाओं को कार्रवाई शुरू करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया गया और समाधान की दिशा में ठोस प्रयास किए जाएँगे।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तराखंड में महिला सुरक्षा और न्याय तक पहुँच को लेकर नागरिक समाज की माँगें बढ़ रही हैं। जनसुनवाई जैसे कार्यक्रम दूरदराज़ के क्षेत्रों की महिलाओं को सीधे राष्ट्रीय संस्थाओं से जोड़ने का अवसर देते हैं, जो अन्यथा कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलता से हतोत्साहित हो जाती हैं।
आगे क्या होगा
आयोग का देहरादून में दो दिवसीय कार्यक्रम भी प्रस्तावित है, जिसमें संभवतः महिला सशक्तीकरण और विधिक जागरूकता पर सत्र आयोजित किए जाएँगे। जिन मामलों में निर्देश जारी किए गए हैं, उनकी अनुपालन स्थिति पर आयोग नज़र बनाए रखेगा।