गिरिडीह में ₹25 लाख इनामी माओवादी अजय महतो 'टाइगर' गिरफ्तार, 100 से अधिक मामलों में था वांछित
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गिरिडीह में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। गिरिडीह पुलिस, सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन की संयुक्त टीम ने 17 जुलाई 2026 को प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन के ₹25 लाख के इनामी नक्सली अजय महतो उर्फ टाइगर उर्फ बासुदेव को गिरफ्तार कर लिया। संगठन की स्पेशल एरिया कमेटी (SAC) का सदस्य अजय महतो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ था।
गिरफ्तारी का घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, खुफिया सूचना मिली थी कि अजय महतो गिरिडीह के जंगलों से निकलकर मैदानी इलाके की ओर आ रहा है। इस सूचना के आधार पर संयुक्त सुरक्षा दल ने हरलाडीह क्षेत्र में घेराबंदी कर अभियान चलाया और उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के दौरान उसके पास से हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए गए।
आरोपी की पृष्ठभूमि और आपराधिक रिकॉर्ड
अजय महतो गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र के नावाडीह गांव का मूल निवासी है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ गिरिडीह, बोकारो, धनबाद और हजारीबाग समेत कई जिलों के थानों में हत्या, पुलिस व सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला, सरकारी संपत्तियों को नुकसान, आईईडी विस्फोट, रंगदारी वसूली और नक्सली संगठन के विस्तार से जुड़े 100 से अधिक मामले दर्ज हैं। झारखंड सरकार पहले ही यूएपीए (UAPA) समेत अन्य गंभीर धाराओं में उसके अभियोजन की मंजूरी दे चुकी है।
माओवादी नेटवर्क से संबंध
जांच एजेंसियों के मुताबिक, अजय महतो माओवादी संगठन के शीर्ष नेता और ₹1 करोड़ के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है। पारसनाथ क्षेत्र में संगठन की गतिविधियों के संचालन और लेवी नेटवर्क को मजबूत करने में उसकी अहम भूमिका बताई जाती है। वह गिरिडीह और बोकारो के कोयलांचल क्षेत्र में सड़क निर्माण एजेंसियों, क्रशर संचालकों और अन्य कारोबारियों से रंगदारी वसूलने वाले नेटवर्क का संचालन करता था।
गौरतलब है कि अजय महतो का नाम वर्ष 2012 में मधुबन स्थित भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी के तत्कालीन महाप्रबंधक पीसी शर्मा की हत्या के चर्चित मामले में भी सामने आया था, जिसके बाद से वह लगातार फरार चल रहा था।
आगे की जांच
फिलहाल आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियों को उससे माओवादी संगठन के नेटवर्क, अन्य सक्रिय सदस्यों और हथियारों के ठिकानों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है। सुरक्षा बलों का मानना है कि इस गिरफ्तारी से पारसनाथ क्षेत्र में सक्रिय माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है।