13 जुलाई 2026
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₹20 लाख इनामी माओवादी रीजनल कमांडर रवींद्र गंझू गिरफ्तार, 4 पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपी

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₹20 लाख इनामी माओवादी रीजनल कमांडर रवींद्र गंझू गिरफ्तार, 4 पुलिसकर्मियों की हत्या का मुख्य आरोपी

सारांश

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान की बड़ी सफलता — ₹20 लाख इनामी माओवादी रीजनल कमांडर रवींद्र गंझू को लातेहार के हेसला गाँव से गिरफ्तार किया गया। 55 से अधिक आपराधिक मामलों का आरोपी यह कमांडर 2019 के उस हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है जिसमें चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।

मुख्य बातें

लातेहार पुलिस और सीआरपीएफ ने 13 जुलाई को ₹20 लाख इनामी माओवादी रीजनल कमांडर रवींद्र गंझू को हेसला गाँव के पास से गिरफ्तार किया।
उस पर झारखंड पुलिस का ₹15 लाख और एनआईए का ₹5 लाख का इनाम था।
वह 22 नवंबर 2019 के चंदवा पीसीआर वाहन हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है, जिसमें 4 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
आरोपी के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में हत्या, रंगदारी, विस्फोट सहित करीब 55 मामले दर्ज हैं।
एनआईए पहले ही उसके बांझीटोला स्थित आवास को सील कर चुकी है — संपत्ति रंगदारी से अर्जित बताई जाती है।

झारखंड के लातेहार जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है — लातेहार पुलिस और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की संयुक्त टीम ने सोमवार, 13 जुलाई को प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन के ₹20 लाख के इनामी रीजनल कमांडर रवींद्र गंझू को गिरफ्तार कर लिया। वह 22 नवंबर 2019 को चंदवा थाना क्षेत्र में हुए उस नक्सली हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है, जिसमें चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।

गिरफ्तारी का विवरण

पुलिस के अनुसार, रवींद्र गंझू को लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र स्थित उसके गाँव हेसला के निकट दबोचा गया। उस पर झारखंड पुलिस ने ₹15 लाख और राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने ₹5 लाख का इनाम घोषित कर रखा था — कुल मिलाकर ₹20 लाख का इनाम। वह मुकेश गंझू और सुरेंद्र गंझू के नाम से भी जाना जाता है।

आरोपों की फेहरिस्त

जाँच एजेंसियों के मुताबिक, रवींद्र गंझू के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में हत्या, नक्सली हिंसा, रंगदारी, विस्फोट और हथियार रखने से जुड़े करीब 55 मामले दर्ज हैं। 22 नवंबर 2019 को लुकुईया मोड़ के पास पीसीआर वाहन पर हुए नक्सली हमले में उसकी केंद्रीय भूमिका बताई जाती है। जाँच एजेंसियों के अनुसार, यह हमला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के झारखंड दौरे के दिन अंजाम दिया गया था, और कथित तौर पर रेकी करने वालों को भुगतान भी किया गया था।

एनआईए की जाँच और संपत्ति सीलिंग

रवींद्र गंझू कई एनआईए मामलों में वांछित था। इनमें करोड़ों रुपये के इनामी माओवादी केंद्रीय कमेटी सदस्य सुधाकरण से जुड़े मामले, चंदवा पुलिस हमला कांड तथा वर्ष 2022 में लातेहार-लोहरदगा सीमा के बुलबुल जंगल में 'ऑपरेशन डबल बुल' के दौरान हथियार बरामदगी से जुड़े मामले शामिल हैं। एनआईए पहले ही हेसला स्थित बांझीटोला में उसके आवास को सील कर चुकी है — एजेंसी का आरोप है कि यह संपत्ति लेवी और रंगदारी से अर्जित धन से बनाई गई थी।

पूछताछ और आगे की कार्रवाई

फिलहाल गिरफ्तार माओवादी से गहन पूछताछ जारी है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि इससे संगठन के नेटवर्क, हथियारों के भंडार, वित्तीय स्रोतों और अन्य सक्रिय माओवादियों के बारे में अहम जानकारी मिलेगी। सुरक्षा बल इस गिरफ्तारी को झारखंड में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ अब तक की बड़ी कामयाबियों में से एक मान रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उस व्यापक सवाल को नहीं मिटाती कि झारखंड में माओवादी नेटवर्क दशकों की कार्रवाई के बावजूद नए कमांडर क्यों पैदा करता रहता है। 55 मामलों का एक आरोपी वर्षों तक अपने ही गाँव के आसपास सक्रिय रहा — यह खुफिया तंत्र और स्थानीय प्रशासन की उन खामियों की ओर इशारा करता है जो महज एक गिरफ्तारी से नहीं भरतीं। एनआईए की संपत्ति सीलिंग और वित्तीय जाँच सही दिशा में है, परंतु असली परीक्षण यह होगा कि पूछताछ से मिली जानकारी नेटवर्क को कितनी गहराई तक तोड़ पाती है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रवींद्र गंझू कौन है और उसे क्यों गिरफ्तार किया गया?
रवींद्र गंझू प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) संगठन का रीजनल कमांडर है, जिस पर झारखंड पुलिस और एनआईए मिलाकर ₹20 लाख का इनाम घोषित कर चुकी थीं। उसे 13 जुलाई को लातेहार जिले के हेसला गाँव के पास से गिरफ्तार किया गया। वह 2019 के चंदवा पीसीआर वाहन हमले का मुख्य साजिशकर्ता माना जाता है जिसमें चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
रवींद्र गंझू पर कितने और किस तरह के मामले दर्ज हैं?
रवींद्र गंझू के खिलाफ झारखंड के विभिन्न थानों में हत्या, नक्सली हिंसा, रंगदारी, विस्फोट और हथियार रखने से जुड़े करीब 55 मामले दर्ज हैं। वह एनआईए के कई मामलों में भी वांछित था, जिनमें माओवादी केंद्रीय कमेटी सदस्य सुधाकरण से जुड़े मामले और 2022 के 'ऑपरेशन डबल बुल' में हथियार बरामदगी के मामले शामिल हैं।
22 नवंबर 2019 का चंदवा हमला क्या था?
22 नवंबर 2019 को लातेहार के चंदवा थाना क्षेत्र के लुकुईया मोड़ के पास माओवादियों ने पीसीआर वाहन पर हमला किया था, जिसमें चार पुलिसकर्मी शहीद हुए थे। जाँच एजेंसियों के अनुसार यह हमला केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के झारखंड दौरे के दिन किया गया था और रवींद्र गंझू ने इसकी योजना बनाई थी।
एनआईए ने रवींद्र गंझू के मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
एनआईए ने रवींद्र गंझू पर ₹5 लाख का इनाम घोषित करने के अलावा लातेहार के हेसला स्थित बांझीटोला में उसके आवास को पहले ही सील कर दिया था। एजेंसी का आरोप है कि यह संपत्ति लेवी और रंगदारी से अर्जित धन से बनाई गई थी। अब गिरफ्तारी के बाद उससे संगठन के वित्तीय नेटवर्क को लेकर पूछताछ की जा रही है।
इस गिरफ्तारी से झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान पर क्या असर पड़ेगा?
सुरक्षा एजेंसियाँ इसे झारखंड में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कामयाबी मान रही हैं। पूछताछ से संगठन के नेटवर्क, हथियारों के भंडार और अन्य सक्रिय माओवादियों की जानकारी मिलने की उम्मीद है, जो आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगी।
राष्ट्र प्रेस
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