जीआरपी कांस्टेबल सौम्य रंजन हत्याकांड: क्राइम ब्रांच ने 18वें आरोपी प्रदीप मंगराज को ढेंकनाल से दबोचा
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच ने जीआरपी कांस्टेबल सौम्य रंजन की भीड़ द्वारा हत्या के मामले में एक और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान प्रदीप मंगराज उर्फ दीपू (46) के रूप में हुई है, जो भुवनेश्वर के बलियांटा पुलिस थाना क्षेत्र के बेनुपुर गाँव का निवासी है। उसे ढेंकनाल जिले में उसके छिपने के ठिकाने से पकड़ा गया।
गिरफ्तारी का विवरण
क्राइम ब्रांच के एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को बताया, 'गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी प्रदीप मंगराज अलग-अलग जगहों पर छिपता फिर रहा था। विश्वसनीय सूचना मिलने के बाद, हमने उसे ढेंकनाल जिले में उसके छिपने के ठिकाने से गिरफ्तार किया।' अधिकारी ने आगे कहा कि वीडियो विश्लेषण में प्रदीप को सौम्य के साथ मारपीट करते हुए स्पष्ट रूप से देखा गया है, जिससे इस मामले में उसकी सक्रिय संलिप्तता प्रमाणित होती है।
अब तक इस हत्याकांड में कुल 18 आरोपी चिह्नित किए जा चुके हैं। इनमें बलियांटा पुलिस द्वारा पहले गिरफ्तार किए गए 11 आरोपी भी शामिल हैं। प्रदीप की गिरफ्तारी इस सिलसिले में क्राइम ब्रांच की ओर से की गई ताज़ा कार्रवाई है।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई थी हत्या
7 मई को भुवनेश्वर के बाहरी इलाके बलियांटा में यह दर्दनाक घटना घटी थी। रेलवे सुरक्षा बल (जीआरपी) कांस्टेबल सौम्य रंजन अपने मित्र ओम प्रकाश राउत के साथ भुवनेश्वर की ओर जा रहे थे। बलियांटा थाना क्षेत्र के भिंगारपुर-काजा इलाके में उनकी मुलाकात स्कूटर पर सवार दो लड़कियों से हुई।
कथित तौर पर मोटरसाइकिल और स्कूटर के बीच टक्कर होने के बाद दोनों पक्षों में बहस हो गई। लड़कियों में से एक ने सौम्य पर यौन उत्पीड़न के प्रयास का आरोप लगाया। उसकी चीखें सुनकर स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुँचे और दोनों युवकों के साथ मारपीट की। पुलिस ने बाद में उन्हें बचाकर अस्पताल पहुँचाया, जहाँ डॉक्टरों ने सौम्य को मृत घोषित कर दिया।
एनएचआरसी की जाँच
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की एक टीम इस हत्याकांड में मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की जाँच के लिए ओडिशा में मौजूद है। यह इस बात का संकेत है कि मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर गंभीर चिंता पैदा की है। गौरतलब है कि भीड़ द्वारा न्यायेतर हिंसा के मामलों में एनएचआरसी का हस्तक्षेप असाधारण परिस्थितियों में ही होता है।
आगे की जाँच
क्राइम ब्रांच अभी भी मामले की जाँच जारी रखे हुए है। 18 आरोपियों की पहचान के बावजूद जाँचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि क्या इस भीड़ हिंसा में और लोग शामिल थे। वीडियो विश्लेषण को साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल करना जाँच की दिशा को और मज़बूत करता है।