गिरिडीह में ₹50 लाख की नकली विदेशी शराब फैक्ट्री सील, 350 पेटी बरामद
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गिरिडीह जिले में उत्पाद विभाग और पुलिस की संयुक्त छापेमारी में ₹50 लाख मूल्य की नकली ब्रांडेड विदेशी शराब बनाने वाले एक बड़े संगठित नेटवर्क का 12 जुलाई को भंडाफोड़ हुआ। बेंगाबाद थाना क्षेत्र के घाघरा गांव में संचालित इस अवैध फैक्ट्री को सील कर दिया गया और भारी मात्रा में उपकरण व तैयार माल जब्त किया गया।
मुख्य घटनाक्रम
उत्पाद विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि बेंगाबाद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से विदेशी शराब का निर्माण हो रहा है। इसी सूचना के आधार पर उत्पाद अधीक्षक शिव कुमार साहू के नेतृत्व में उत्पाद विभाग और बेंगाबाद थाना प्रभारी अमन कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल की संयुक्त टीम ने घाघरा गांव की फैक्ट्री पर धावा बोला। अभियान में उत्पाद विभाग के अवर निरीक्षक जानानाथ पाल, रवि रंजन, सहायक अवर निरीक्षक लक्ष्मण महतो और सत्यराज बल सहित अन्य अधिकारी भी शामिल थे।
बरामदगी का ब्यौरा
छापेमारी में 350 पेटी तैयार नकली विदेशी शराब बरामद की गई, जिन पर रॉयल स्टैग, रॉयल चैलेंज और आइकोनिक जैसे लोकप्रिय ब्रांडों के लेबल लगे थे। इसके अलावा 4,000 लीटर क्षमता की पानी की टंकी, 55 रोल नकली रैपर, 25,000 ढक्कन, 20 रोल होलोग्राम, 1,000 कार्टन, 60 खाली बोतलें, एक एसीई मशीन तथा 20 फीट पाइप सहित निर्माण में इस्तेमाल होने वाले अन्य उपकरण भी जब्त किए गए। अधिकारियों के अनुसार, बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि यहाँ संगठित तरीके से औद्योगिक स्तर पर नकली शराब तैयार की जा रही थी।
सरकार और जनस्वास्थ्य पर असर
उत्पाद विभाग के अफसरों ने बताया कि इस अवैध कारोबार से सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुँच रहा था। साथ ही, नामी ब्रांडों की आड़ में संभावित रूप से खतरनाक नकली शराब बाजार में बेचकर आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावटी या रासायनिक रूप से असुरक्षित शराब के सेवन से गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है।
कानूनी कार्रवाई
इस मामले में झारखंड उत्पाद अधिनियम की धारा 47(ए), 52(डी) और 55 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। फैक्ट्री को सील कर दिया गया है और पूरे नेटवर्क की जाँच जारी है।
आगे की जाँच
अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए छापेमारी का अभियान जारी है। जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह नकली शराब किन-किन बाजारों में आपूर्ति की जा रही थी और नेटवर्क की जड़ें कहाँ तक फैली हैं।