25 अगस्त 2026
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गोवा में 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड: ईडी ने दो गिरफ्तार, ₹27,850 करोड़ के लेनदेन का खुलासा

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गोवा में 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड: ईडी ने दो गिरफ्तार, ₹27,850 करोड़ के लेनदेन का खुलासा

सारांश

गोवा में 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर चल रहा साइबर ठगी का जाल महज एक मामला नहीं — यह ₹27,850 करोड़ के लेनदेन वाला संगठित नेटवर्क है। ईडी की गिरफ्तारी ने उस तंत्र को उजागर किया है जो लाइसेंसी मनी चेंजरों की आड़ में काम करता था और 20 राज्यों में ₹417 करोड़ से अधिक की ठगी से जुड़ा है।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय ( ईडी ) ने 25 अगस्त 2026 को गोवा में 'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड मामले में फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुइन सैयद को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया।
दोनों आरोपियों को 29 अगस्त तक 5 दिन की ईडी हिरासत में भेजा गया है।
उत्तर गोवा की एक महिला को 21 मई से 2 जून के बीच 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर ₹2.60 करोड़ की ठगी की गई।
नेटवर्क ने ₹27,850 करोड़ से अधिक का बैंक लेनदेन किया; ₹2,904 करोड़ नकद जमा किए गए।
फर्जी कंपनियों के खाते 20 राज्यों में 163 एफआईआर और 330 शिकायतों से जुड़े; कुल ठगी ₹417.49 करोड़ ।
ईडी ने ₹3.25 करोड़ नकद बरामद किए और ₹30 करोड़ से अधिक का बैंक बैलेंस फ्रीज किया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 25 अगस्त 2026 को गोवा में फर्जी 'डिजिटल अरेस्ट' के नाम पर संचालित एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का भंडाफोड़ किया और मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि इस नेटवर्क ने ₹27,850 करोड़ से अधिक का बैंक लेनदेन किया और 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में ₹417.49 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया।

गिरफ्तारी और न्यायिक कार्यवाही

गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों की पहचान फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुइन सैयद के रूप में हुई है। दोनों को रविवार, 24 अगस्त को हिरासत में लिया गया और सोमवार, 25 अगस्त को गोवा की स्पेशल पीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने उन्हें 29 अगस्त तक पाँच दिन की ईडी हिरासत में भेज दिया है। यह कार्रवाई उत्तर गोवा की एक महिला की शिकायत के बाद शुरू हुई।

पीड़िता के साथ क्या हुआ

उत्तर गोवा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार, ठगों ने एक स्थानीय महिला को 21 मई से 2 जून के बीच लगातार वीडियो कॉल के ज़रिए 'डिजिटल अरेस्ट' का भय दिखाकर निगरानी में रखा। आरोपियों ने उसे एक 'सीक्रेट सुपरविजन अकाउंट' में रकम ट्रांसफर करने के लिए मजबूर किया, जिससे महिला को ₹2.60 करोड़ का नुकसान हुआ। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।

ठगी का जटिल नेटवर्क

जांच में पता चला कि पीड़िता का पैसा महज कुछ घंटों में 400 से अधिक बैंक खातों में बाँट दिया गया — बंद पड़े और नए खोले गए खातों की पहली परत से होते हुए। इसके लिए ट्रांसफर, नकद निकासी, सेल्फ चेक और पेमेंट गेटवे का उपयोग किया गया। ईडी के अनुसार, इस नेटवर्क ने साइबर ठगी की रकम को आरबीआई लाइसेंस प्राप्त मनी चेंजरों के ज़रिए नकद और विदेशी मुद्रा में परिवर्तित किया।

जांच में ट्रेडिंग, ट्रैवल और फॉरेन एक्सचेंज कंपनियों का एक परस्पर जुड़ा नेटवर्क मिला, जिसने कुल ₹27,850 करोड़ से अधिक का बैंक लेनदेन किया। इस नेटवर्क ने ₹2,904 करोड़ नकद जमा किए, जिनमें से ₹584.70 करोड़ 61,448 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के ज़रिए बल्क नोट एक्सेप्टेंस मशीनों से जमा किए गए। गौरतलब है कि 101 शिकायतों में एक ही पीड़ित का पैसा एक ही गिरोह की दो या अधिक कंपनियों में भेजा गया, जो यह स्पष्ट करता है कि ये खाते साझा पूल की तरह संचालित हो रहे थे।

गिरोह ने सिंगल रूम में रहने वाले ड्राइवरों और कर्मचारियों के नाम पर फर्जी कंपनियाँ बनाईं और उन्हें डमी डायरेक्टर बनाया, जबकि पूरा ऑपरेशन बाहर से नियंत्रित किया जाता था। इन फर्जी कंपनियों के खातों का संबंध 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज 163 एफआईआर और 330 शिकायतों से है, जिनमें कुल ₹417.49 करोड़ की ठगी का आरोप है।

छापेमारी और बरामदगी

ईडी ने 17 जुलाई और 21 अगस्त को मुंबई और गोवा में 20 स्थानों पर छापेमारी की। इसमें ₹3.25 करोड़ नकद बरामद हुए और ₹30 करोड़ से अधिक का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया। एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस, बही-खाते और अन्य दस्तावेज़ भी जब्त किए हैं, जिनकी जांच जारी है।

आगे क्या होगा

यह मामला उस व्यापक राष्ट्रीय चिंता का हिस्सा है जो 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे नए साइबर अपराध के तरीकों को लेकर उभरी है, जिसमें ठग खुद को सरकारी अधिकारी बताकर पीड़ितों को मनोवैज्ञानिक दबाव में रखते हैं। ईडी की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

850 करोड़ का यह लेनदेन आँकड़ा बताता है कि 'डिजिटल अरेस्ट' महज एक साइबर ट्रिक नहीं, बल्कि एक सुव्यवस्थित वित्तीय अपराध तंत्र है जो आरबीआई-लाइसेंसी संस्थाओं की आड़ में फला-फूला। सवाल यह है कि इतने बड़े पैमाने पर मनी चेंजरों के ज़रिए रकम बदली जाती रही और नियामकीय निगरानी तंत्र कहाँ था। 400 से अधिक खातों में पैसे की परत-दर-परत आवाजाही और 20 राज्यों में फैले नेटवर्क से स्पष्ट है कि यह किसी एक राज्य की पुलिस की पहुँच से बाहर का मामला था — केंद्रीय एजेंसियों की सक्रियता देर से, लेकिन निर्णायक रही। अब असली परीक्षा यह है कि नेटवर्क के मास्टरमाइंड तक जांच पहुँचती है या सिर्फ 'डमी डायरेक्टर' स्तर पर रुक जाती है।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'डिजिटल अरेस्ट' साइबर फ्रॉड क्या होता है?
'डिजिटल अरेस्ट' एक साइबर ठगी का तरीका है जिसमें ठग खुद को पुलिस, सीबीआई या कस्टम अधिकारी बताकर पीड़ित को वीडियो कॉल पर 'डिजिटल निगरानी' में रखते हैं और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाते हैं। गोवा मामले में एक महिला को 21 मई से 2 जून के बीच इसी तरह ₹2.60 करोड़ की ठगी का शिकार बनाया गया।
ईडी ने गोवा में किसे और क्यों गिरफ्तार किया?
ईडी ने फहीम मोइन हुसैन सैयद और नईम मुइन सैयद को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया, क्योंकि वे कथित तौर पर साइबर ठगी की रकम को मनी चेंजरों के ज़रिए नकद और विदेशी मुद्रा में बदलने वाले नेटवर्क से जुड़े थे। दोनों को 29 अगस्त तक 5 दिन की ईडी हिरासत में भेजा गया है।
इस नेटवर्क का दायरा कितना बड़ा है?
जांच के अनुसार, इस नेटवर्क ने ₹27,850 करोड़ से अधिक का बैंक लेनदेन किया और 20 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में 163 एफआईआर और 330 शिकायतों से जुड़ा है। कुल ₹417.49 करोड़ की ठगी इन मामलों में दर्ज है।
ईडी की छापेमारी में क्या बरामद हुआ?
17 जुलाई और 21 अगस्त को मुंबई और गोवा में 20 स्थानों पर की गई छापेमारी में ₹3.25 करोड़ नकद बरामद हुए और ₹30 करोड़ से अधिक का बैंक बैलेंस फ्रीज किया गया। डिजिटल डिवाइस, बही-खाते और अन्य दस्तावेज़ भी जब्त किए गए हैं।
इस मामले में फर्जी कंपनियों की भूमिका क्या थी?
गिरोह ने ड्राइवरों और कर्मचारियों के नाम पर फर्जी कंपनियाँ बनाकर उन्हें डमी डायरेक्टर बनाया, जबकि पूरा ऑपरेशन बाहर से नियंत्रित होता था। इन कंपनियों के खाते साझा पूल की तरह काम करते थे — 101 शिकायतों में एक ही पीड़ित का पैसा एक ही गिरोह की दो या अधिक कंपनियों में भेजा गया।
राष्ट्र प्रेस
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