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ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र के विवादित बयान पर विपक्ष का हमला, सख्त कार्रवाई की माँग

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ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र के विवादित बयान पर विपक्ष का हमला, सख्त कार्रवाई की माँग

सारांश

ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र अहमद के 'महिलाओं को बॉक्स में बंद रखो' वाले बयान ने राष्ट्रीय विवाद खड़ा कर दिया है। कांग्रेस, TMC और केरल सरकार ने एकजुट होकर निंदा की और सख्त कार्रवाई की माँग की — यह बहस संविधान बनाम धार्मिक बयानबाज़ी की केंद्रीय टकराहट को फिर सामने ले आई है।

मुख्य बातें

ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र अहमद ने कहा कि महिलाएं सोने की तरह हैं और उन्हें बॉक्स में बंद रखना चाहिए ।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मुफ्ती को 'सरकारी एजेंट' बताते हुए इस्लामिक ज्ञान पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता उदित राज ने संविधान का हवाला देते हुए सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की।
TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा कि धार्मिक नेताओं को सामाजिक मामलों पर चुप रहना चाहिए।
केरल मंत्री बिंदी कृष्णा ने कहा कि ऐसे बयान महिलाओं को सदियों पीछे धकेलते हैं और संविधान की मूल भावना के विरुद्ध हैं।

भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र अहमद द्वारा महिलाओं को 'सोने की तरह बॉक्स में बंद रखने' की दी गई विवादित सलाह पर 31 अगस्त को विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और केरल सरकार के प्रतिनिधियों ने एकस्वर में इस बयान की निंदा करते हुए दोषी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की।

मुफ्ती का विवादित बयान

शेख अबूबक्र अहमद ने सार्वजनिक मंच पर कहा था कि महिलाएं सोने की तरह हैं — उन्हें बॉक्स में सँभालकर रखना चाहिए और बाहर नहीं निकलने देना चाहिए। यह टिप्पणी तत्काल विवाद का विषय बन गई और सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक चर्चा में आ गई। यह ऐसे समय में आई है जब महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'जो व्यक्ति इस्लामिक विद्वान नहीं है, उसे इस्लाम की जानकारी नहीं हो सकती। रजिया सुल्तान कौन थीं? हमारे लिए हज़रत आयशा का क्या दर्जा है? जिसे इस्लाम की जानकारी नहीं है, उसे सिर्फ दाढ़ी रखने या टोपी पहनने से इस्लामिक विद्वान नहीं कहा जा सकता। ये नकली लोग, सरकार द्वारा प्रायोजित लोग जिन्हें आजकल टीवी डिबेट के लिए सैलरी पर रखा जाता है, उनके हुलिए से ही पता चलता है कि वे इस्लामिक विद्वान नहीं हैं। वे सरकारी एजेंट और सैलरी पाने वाले कर्मचारी हैं।'

कांग्रेस नेता उदित राज ने भी कड़े शब्दों में कहा, 'जिस महिला ने किसी व्यक्ति को जन्म दिया, उसके गर्भ का अपमान करना सही नहीं है। हमारा भारतीय संविधान आज़ादी, समानता, समान अधिकार और समान वोट का अधिकार देता है। यहाँ बकवास बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।'

TMC और केरल सरकार का रुख

TMC सांसद सौगत रॉय ने संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए। समाज से जुड़े ऐसे मामलों पर धार्मिक नेताओं को चुप रहना चाहिए।'

केरल की महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदी कृष्णा ने कहा, 'केरल जैसा समाज ऐसे बयानों को स्वीकार नहीं कर सकता। इस तरह के बयान महिलाओं को सदियों पीछे धकेलते हैं। हम भारत के संविधान का पालन करते हैं, जो लिंग, धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किए बिना महिलाओं और पुरुषों को समानता की गारंटी देता है।'

संवैधानिक और सामाजिक संदर्भ

गौरतलब है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 15 लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के बयान सामाजिक ताने-बाने और महिलाओं की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक व्यक्तित्व के महिला-विरोधी बयान ने राष्ट्रीय विवाद को जन्म दिया हो।

आगे क्या होगा

विपक्षी दलों ने सरकार से माँग की है कि इस मामले में स्पष्ट कानूनी कदम उठाए जाएँ। अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस विवाद के राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव आने वाले दिनों में और स्पष्ट होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ऐसे बयान देने वाले धार्मिक पदाधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग के बावजूद अब तक कोई ठोस तंत्र क्यों नहीं बना। यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक नेता के महिला-विरोधी बयान ने सुर्खियाँ बटोरीं और फिर मामला ठंडे बस्ते में चला गया। संविधान की दुहाई देना पर्याप्त नहीं — जवाबदेही के लिए संस्थागत ढाँचे की ज़रूरत है, जो अभी तक अनुपस्थित है।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र अहमद ने महिलाओं के बारे में क्या कहा?
शेख अबूबक्र अहमद ने कहा कि महिलाएं सोने की तरह हैं और उन्हें बॉक्स में सँभालकर रखना चाहिए, बाहर नहीं निकलने देना चाहिए। इस बयान को महिला-विरोधी और संविधान की भावना के विरुद्ध बताते हुए व्यापक निंदा हुई।
विपक्ष ने मुफ्ती के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
कांग्रेस, TMC और केरल सरकार के नेताओं ने बयान की कड़ी निंदा की। कांग्रेस नेता उदित राज और सांसद इमरान मसूद, TMC सांसद सौगत रॉय तथा केरल मंत्री बिंदी कृष्णा ने सख्त कार्रवाई की माँग करते हुए संविधान की समानता की गारंटी का हवाला दिया।
इमरान मसूद ने मुफ्ती पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि मुफ्ती वास्तविक इस्लामिक विद्वान नहीं हैं और उन्हें 'सरकार द्वारा प्रायोजित' बताया। उन्होंने रजिया सुल्तान और हज़रत आयशा का उदाहरण देते हुए कहा कि इस्लाम में महिलाओं का सम्मानजनक स्थान है।
केरल सरकार ने इस विवाद पर क्या रुख अपनाया?
केरल की महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदी कृष्णा ने स्पष्ट किया कि केरल जैसा प्रगतिशील समाज ऐसे बयान स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान लिंग या धर्म के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है और ऐसे बयान महिलाओं को सदियों पीछे धकेलते हैं।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार से कानूनी कदम उठाने की माँग की है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह मामला महिला अधिकारों और धार्मिक बयानबाज़ी की जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस को और तेज़ कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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