ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र के विवादित बयान पर विपक्ष का हमला, सख्त कार्रवाई की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारत के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र अहमद द्वारा महिलाओं को 'सोने की तरह बॉक्स में बंद रखने' की दी गई विवादित सलाह पर 31 अगस्त को विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC) और केरल सरकार के प्रतिनिधियों ने एकस्वर में इस बयान की निंदा करते हुए दोषी के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की माँग की।
मुफ्ती का विवादित बयान
शेख अबूबक्र अहमद ने सार्वजनिक मंच पर कहा था कि महिलाएं सोने की तरह हैं — उन्हें बॉक्स में सँभालकर रखना चाहिए और बाहर नहीं निकलने देना चाहिए। यह टिप्पणी तत्काल विवाद का विषय बन गई और सोशल मीडिया से लेकर संसद के गलियारों तक चर्चा में आ गई। यह ऐसे समय में आई है जब महिला सशक्तीकरण और लैंगिक समानता को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज़ है।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, 'जो व्यक्ति इस्लामिक विद्वान नहीं है, उसे इस्लाम की जानकारी नहीं हो सकती। रजिया सुल्तान कौन थीं? हमारे लिए हज़रत आयशा का क्या दर्जा है? जिसे इस्लाम की जानकारी नहीं है, उसे सिर्फ दाढ़ी रखने या टोपी पहनने से इस्लामिक विद्वान नहीं कहा जा सकता। ये नकली लोग, सरकार द्वारा प्रायोजित लोग जिन्हें आजकल टीवी डिबेट के लिए सैलरी पर रखा जाता है, उनके हुलिए से ही पता चलता है कि वे इस्लामिक विद्वान नहीं हैं। वे सरकारी एजेंट और सैलरी पाने वाले कर्मचारी हैं।'
कांग्रेस नेता उदित राज ने भी कड़े शब्दों में कहा, 'जिस महिला ने किसी व्यक्ति को जन्म दिया, उसके गर्भ का अपमान करना सही नहीं है। हमारा भारतीय संविधान आज़ादी, समानता, समान अधिकार और समान वोट का अधिकार देता है। यहाँ बकवास बर्दाश्त नहीं की जाएगी और ऐसे व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।'
TMC और केरल सरकार का रुख
TMC सांसद सौगत रॉय ने संक्षिप्त लेकिन स्पष्ट शब्दों में कहा, 'यह गलत है। ऐसा नहीं होना चाहिए। महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए। समाज से जुड़े ऐसे मामलों पर धार्मिक नेताओं को चुप रहना चाहिए।'
केरल की महिला एवं बाल विकास मंत्री बिंदी कृष्णा ने कहा, 'केरल जैसा समाज ऐसे बयानों को स्वीकार नहीं कर सकता। इस तरह के बयान महिलाओं को सदियों पीछे धकेलते हैं। हम भारत के संविधान का पालन करते हैं, जो लिंग, धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किए बिना महिलाओं और पुरुषों को समानता की गारंटी देता है।'
संवैधानिक और सामाजिक संदर्भ
गौरतलब है कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को कानून के समक्ष समानता की गारंटी देता है, जबकि अनुच्छेद 15 लिंग के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के बयान सामाजिक ताने-बाने और महिलाओं की प्रगति पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। यह पहली बार नहीं है जब किसी धार्मिक व्यक्तित्व के महिला-विरोधी बयान ने राष्ट्रीय विवाद को जन्म दिया हो।
आगे क्या होगा
विपक्षी दलों ने सरकार से माँग की है कि इस मामले में स्पष्ट कानूनी कदम उठाए जाएँ। अभी तक केंद्र सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इस विवाद के राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव आने वाले दिनों में और स्पष्ट होंगे।