24 सितंबर 2026
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कर्नाटक: कांग्रेस एमएलसी की 'गृह लक्ष्मी' योजना रोकने की मांग पर सियासी घमासान, भाजपा ने वित्तीय कुप्रबंधन का लगाया आरोप

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कर्नाटक: कांग्रेस एमएलसी की 'गृह लक्ष्मी' योजना रोकने की मांग पर सियासी घमासान, भाजपा ने वित्तीय कुप्रबंधन का लगाया आरोप

सारांश

कांग्रेस एमएलसी का अपनी ही सरकार की 'गृह लक्ष्मी' योजना पर सवाल — यह महज़ एक बयान नहीं, बल्कि राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं पर खुद सत्ताधारी पार्टी के भीतर उभरती दरार का संकेत है। भाजपा ने इसे हाथों हाथ लिया और कुप्रबंधन के आरोप जड़ दिए।

मुख्य बातें

कांग्रेस एमएलसी थिप्पन्ना कामाकानूर ने विधान परिषद में 'गृह लक्ष्मी' योजना की ₹2,000 मासिक सहायता को एक साल के लिए रोकने की माँग की।
कामाकानूर ने मेकेदातु, अपर कृष्णा फेज़ 3, कलासा बंदूरी सहित छह प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता देने का तर्क दिया।
अशोक (भाजपा) ने आरोप लगाया कि मृत लाभार्थियों के खातों में पैसे जा रहे हैं और विकास कार्य ठप हैं।
भाजपा ने इस घटनाक्रम को इंदी विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल के इस्तीफे से जोड़कर कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष का प्रमाण बताया।
'गृह लक्ष्मी' कांग्रेस की पाँच प्रमुख गारंटी योजनाओं में से एक है; राज्य सरकार ने अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

कर्नाटक विधान परिषद में कांग्रेस एमएलसी थिप्पन्ना कामाकानूर की ओर से राज्य सरकार की प्रमुख 'गृह लक्ष्मी' गारंटी योजना को एक साल के लिए निलंबित करने और सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की माँग ने 24 सितंबर 2026 को तीखा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। सत्ताधारी दल के भीतर से उठी इस आवाज़ ने राज्य में कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं की वित्तीय स्थिरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार को विधान परिषद में चर्चा के दौरान एमएलसी कामाकानूर ने माँग की कि राज्य में एक वर्ष तक सिंचाई कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, "एक साल तक सिंचाई के कामों को सबसे ज़्यादा प्राथमिकता मिलनी चाहिए। एक साल के लिए सभी डेवलपमेंट के काम रोक दिए जाने चाहिए, अलग अलग चीज़ें और जो ₹2,000 दिए जा रहे हैं, उन्हें भी बंद कर देना चाहिए।"

यह बयान सीधे तौर पर 'गृह लक्ष्मी' योजना के अंतर्गत परिवार की पात्र महिला मुखिया को दी जाने वाली ₹2,000 मासिक सहायता पर निशाना साधता है। कामाकानूर ने तर्क दिया कि राज्य को सूखे की स्थिति से उबारने के लिए कई अहम जल परियोजनाओं को पूरा करना अनिवार्य है।

उन्होंने विशेष रूप से मेकेदातु बैलेंसिंग रिज़र्वायर, अपर कृष्णा प्रोजेक्ट फेज़ 3, कलासा बंदूरी, अपर भद्रा प्रोजेक्ट, नवाली बैलेंसिंग रिज़र्वायर और येत्तिनाहोले प्रोजेक्ट का उल्लेख किया।

भाजपा की प्रतिक्रिया

विपक्ष के नेता आर. अशोक ने गुरुवार को कामाकानूर के बयान को हथियार बनाते हुए राज्य सरकार पर गारंटी योजनाओं के मामले में वित्तीय कुप्रबंधन का गंभीर आरोप लगाया। अशोक ने आरोप लगाया, "कांग्रेस ने खुद अपनी गारंटी वाली धोखाधड़ी का पर्दाफाश कर दिया है। पैसे मृत लोगों के खातों में जा रहे हैं, जबकि विकास कार्य ठप पड़े हैं।"

भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि फंड की कमी के कारण कई बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट रुके हुए हैं और इसे सीधे गारंटी योजनाओं पर हो रहे खर्च से जोड़ा। अशोक के अनुसार, सत्ताधारी पार्टी के एक एमएलसी का यह बयान स्वयं सिद्ध करता है कि सरकार की आर्थिक स्थिति को लेकर कांग्रेस के भीतर ही गहरी चिंताएँ हैं।

सरकार के भीतर असंतोष के संकेत

यह विवाद ऐसे समय में आया है जब राज्य में आंतरिक असंतोष के अन्य संकेत भी सामने आ रहे हैं। भाजपा नेता आर. अशोक ने इंदी के विधायक यशवंतरायगौड़ा पाटिल के इस्तीफे का भी जिक्र किया, जिन्होंने अपने तालुका को सूखा प्रभावित इलाकों की सूची में शामिल न किए जाने के कारण इस्तीफा दिया था। अशोक ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि वित्तीय और विकास संबंधी मुद्दों को सँभालने के तरीके को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि 'गृह लक्ष्मी' योजना कांग्रेस सरकार की पाँच प्रमुख गारंटी योजनाओं में से एक है, जो विधानसभा चुनाव में पार्टी के घोषणापत्र का केंद्रबिंदु थी। इस योजना के तहत परिवार की पात्र महिला मुखिया को प्रति माह ₹2,000 दिए जाते हैं।

आम जनता पर असर

यदि कामाकानूर की माँग को गंभीरता से लिया जाए, तो राज्य की लाखों महिला लाभार्थियों पर सीधा असर पड़ सकता है, जो इस मासिक सहायता पर निर्भर हैं। दूसरी ओर, सिंचाई परियोजनाओं के अभाव में सूखा प्रभावित किसानों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है — यह राज्य के सामने एक बड़ी नीतिगत दुविधा है।

क्या होगा आगे

कर्नाटक सरकार की ओर से अभी तक कामाकानूर के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विवाद राज्य की वित्तीय प्राथमिकताओं और चुनावी वादों के बीच के तनाव को उजागर करता है। आने वाले दिनों में सरकार को इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

दूसरी तरफ यह सवाल उठ खड़ा हुआ कि क्या लोकलुभावन योजनाएँ दीर्घकालिक विकास की कीमत पर चल रही हैं। 'गृह लक्ष्मी' जैसी योजनाएँ चुनावी जनादेश का हिस्सा हैं, इसलिए इन्हें रोकना राजनीतिक रूप से जोखिम भरा है — लेकिन इन पर टिके रहना वित्तीय रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। मृत लाभार्थियों को भुगतान का आरोप, अगर सत्यापित हुआ, तो यह महज़ प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि सिस्टेमिक खामी का संकेत होगा — और इसकी जवाबदेही सरकार को तय करनी होगी।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'गृह लक्ष्मी' योजना क्या है और इस पर विवाद क्यों हुआ?
'गृह लक्ष्मी' कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की पाँच प्रमुख गारंटी योजनाओं में से एक है, जिसके तहत परिवार की पात्र महिला मुखिया को प्रति माह ₹2,000 की सहायता दी जाती है। कांग्रेस एमएलसी थिप्पन्ना कामाकानूर ने विधान परिषद में इस योजना को एक साल के लिए रोककर सिंचाई परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की माँग की, जिससे राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।
कांग्रेस एमएलसी कामाकानूर ने योजना रोकने की माँग क्यों की?
कामाकानूर ने तर्क दिया कि राज्य में सूखे की गंभीर स्थिति से निपटने के लिए मेकेदातु, अपर कृष्णा फेज़ 3 और येत्तिनाहोले जैसी सिंचाई परियोजनाओं को एक साल के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, फंड की सीमितता को देखते हुए एक साल तक विकास कार्य और 'गृह लक्ष्मी' की ₹2,000 मासिक राशि भी रोकी जाए।
भाजपा ने इस विवाद पर क्या आरोप लगाए?
विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया कि मृत लाभार्थियों के खातों में 'गृह लक्ष्मी' का पैसा जा रहा है और गारंटी योजनाओं पर खर्च के कारण बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट रुक गए हैं। उन्होंने कामाकानूर के बयान को कांग्रेस के भीतर वित्तीय कुप्रबंधन की स्वीकारोक्ति बताया।
इस विवाद से कर्नाटक की आम जनता पर क्या असर पड़ सकता है?
यदि 'गृह लक्ष्मी' योजना रोकी जाती है, तो राज्य की लाखों महिला लाभार्थी इस मासिक सहायता से वंचित हो जाएंगी। दूसरी ओर, सिंचाई परियोजनाओं में देरी से सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को नुकसान हो रहा है — यह राज्य के सामने एक बड़ा नीतिगत संकट है।
कर्नाटक सरकार ने इस विवाद पर क्या कहा?
अभी तक कर्नाटक सरकार की ओर से कामाकानूर के बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद राज्य की गारंटी योजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता और सिंचाई प्राथमिकताओं के बीच के तनाव को उजागर करता है।
राष्ट्र प्रेस
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