अहमदाबाद सीबीआई अदालत ने आयकर अधिकारी जरनैल सिंह को 2013 रिश्वत मामले में दोषी ठहराया, 3 साल की सजा
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने 21 अगस्त 2026 को आयकर विभाग के अधिकारी जरनैल सिंह को वर्ष 2013 के रिश्वतखोरी मामले में दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और ₹20,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। यह मामला एक चैरिटेबल ट्रस्ट को कर छूट प्रमाणपत्र दिलाने के बदले ₹10,000 की रिश्वत माँगने से जुड़ा था।
मामले का पूरा घटनाक्रम
केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, यह मामला 22 फरवरी 2013 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि जरनैल सिंह — जो उस समय अहमदाबाद स्थित प्रत्यक्षकर भवन में संयुक्त/अतिरिक्त आयकर आयुक्त (ऑडिट) के कार्यालय में आयकर अधिकारी (OSD) के पद पर तैनात थे — ने श्रीलेखा विविधलक्षी चैरिटेबल ट्रस्ट को आयकर अधिनियम की धारा 11 और धारा 80जी के तहत कर छूट का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र जारी करने के बदले शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत माँगी थी।
CBI ने जाल बिछाकर सिंह को शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। उसी दिन उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया गया और 2013 में ही आरोपपत्र दाखिल किया गया।
अधिकारी की सेवा और निलंबन का इतिहास
मई 2026 में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की अहमदाबाद पीठ द्वारा पारित एक आदेश के अनुसार, जरनैल सिंह ने 1993 में आयकर विभाग में निरीक्षक के रूप में सेवा शुरू की थी और 2001 में आयकर अधिकारी पद पर पदोन्नत हुए थे।
CBI की कार्रवाई के बाद 2013 में उन्हें निलंबित कर दिया गया, परंतु फरवरी 2014 में उन्हें सेवा में बहाल कर दिया गया। इसके बाद नवंबर 2019 में विभागीय जाँच और आपराधिक मामला लंबित रहते हुए उन्हें मौलिक नियम 56(जे) के तहत समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया गया।
अदालत का फैसला
अहमदाबाद की विशेष CBI अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद जरनैल सिंह को दोषी करार दिया और तीन वर्ष के कठोर कारावास के साथ-साथ ₹20,000 का जुर्माना लगाया। CAT के आदेश में भी यह पुष्टि की गई है कि रिश्वतखोरी के आरोप आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ₹10,000 की माँग से संबंधित थे।
भ्रष्टाचार के विरुद्ध संदेश
यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के मामले — चाहे राशि कितनी भी छोटी हो — दीर्घकालिक कानूनी परिणाम लाते हैं। गौरतलब है कि घटना के 12 वर्ष से अधिक बाद आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई को भी उजागर करता है। CBI की ट्रैप कार्रवाई से लेकर अंतिम सजा तक का यह सफर दर्शाता है कि एजेंसी ऐसे मामलों में अभियोजन को अंत तक ले जाने में सक्षम है।