21 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अहमदाबाद सीबीआई अदालत ने आयकर अधिकारी जरनैल सिंह को 2013 रिश्वत मामले में दोषी ठहराया, 3 साल की सजा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अहमदाबाद सीबीआई अदालत ने आयकर अधिकारी जरनैल सिंह को 2013 रिश्वत मामले में दोषी ठहराया, 3 साल की सजा

सारांश

12 साल पुराने रिश्वत मामले में अहमदाबाद की CBI अदालत ने आयकर अधिकारी जरनैल सिंह को दोषी ठहराया। ₹10,000 की रिश्वत के लिए रंगे हाथों पकड़े गए सिंह को 3 साल कठोर कारावास और ₹20,000 जुर्माने की सजा मिली।

मुख्य बातें

अहमदाबाद की विशेष CBI अदालत ने 21 अगस्त 2026 को आयकर अधिकारी जरनैल सिंह को 2013 के रिश्वतखोरी मामले में दोषी करार दिया।
सजा: 3 वर्ष कठोर कारावास और ₹20,000 जुर्माना।
मामला श्रीलेखा विविधलक्षी चैरिटेबल ट्रस्ट को धारा 80जी प्रमाणपत्र दिलाने के बदले ₹10,000 रिश्वत माँगने से जुड़ा था।
CBI ने 22 फरवरी 2013 को जाल बिछाकर सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।
सिंह को नवंबर 2019 में मौलिक नियम 56(जे) के तहत समय से पहले सेवानिवृत्त किया जा चुका था।

अहमदाबाद की विशेष सीबीआई अदालत ने 21 अगस्त 2026 को आयकर विभाग के अधिकारी जरनैल सिंह को वर्ष 2013 के रिश्वतखोरी मामले में दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और ₹20,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। यह मामला एक चैरिटेबल ट्रस्ट को कर छूट प्रमाणपत्र दिलाने के बदले ₹10,000 की रिश्वत माँगने से जुड़ा था।

मामले का पूरा घटनाक्रम

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) के अनुसार, यह मामला 22 फरवरी 2013 को दर्ज किया गया था। आरोप था कि जरनैल सिंह — जो उस समय अहमदाबाद स्थित प्रत्यक्षकर भवन में संयुक्त/अतिरिक्त आयकर आयुक्त (ऑडिट) के कार्यालय में आयकर अधिकारी (OSD) के पद पर तैनात थे — ने श्रीलेखा विविधलक्षी चैरिटेबल ट्रस्ट को आयकर अधिनियम की धारा 11 और धारा 80जी के तहत कर छूट का लाभ दिलाने के लिए आवश्यक प्रमाणपत्र जारी करने के बदले शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत माँगी थी।

CBI ने जाल बिछाकर सिंह को शिकायतकर्ता से ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। उसी दिन उनके विरुद्ध प्रकरण दर्ज कर लिया गया और 2013 में ही आरोपपत्र दाखिल किया गया।

अधिकारी की सेवा और निलंबन का इतिहास

मई 2026 में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) की अहमदाबाद पीठ द्वारा पारित एक आदेश के अनुसार, जरनैल सिंह ने 1993 में आयकर विभाग में निरीक्षक के रूप में सेवा शुरू की थी और 2001 में आयकर अधिकारी पद पर पदोन्नत हुए थे।

CBI की कार्रवाई के बाद 2013 में उन्हें निलंबित कर दिया गया, परंतु फरवरी 2014 में उन्हें सेवा में बहाल कर दिया गया। इसके बाद नवंबर 2019 में विभागीय जाँच और आपराधिक मामला लंबित रहते हुए उन्हें मौलिक नियम 56(जे) के तहत समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया गया।

अदालत का फैसला

अहमदाबाद की विशेष CBI अदालत ने लंबी सुनवाई के बाद जरनैल सिंह को दोषी करार दिया और तीन वर्ष के कठोर कारावास के साथ-साथ ₹20,000 का जुर्माना लगाया। CAT के आदेश में भी यह पुष्टि की गई है कि रिश्वतखोरी के आरोप आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत प्रमाणपत्र जारी करने के लिए ₹10,000 की माँग से संबंधित थे।

भ्रष्टाचार के विरुद्ध संदेश

यह मामला इस बात को रेखांकित करता है कि सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के मामले — चाहे राशि कितनी भी छोटी हो — दीर्घकालिक कानूनी परिणाम लाते हैं। गौरतलब है कि घटना के 12 वर्ष से अधिक बाद आया यह फैसला न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई को भी उजागर करता है। CBI की ट्रैप कार्रवाई से लेकर अंतिम सजा तक का यह सफर दर्शाता है कि एजेंसी ऐसे मामलों में अभियोजन को अंत तक ले जाने में सक्षम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इतनी लंबी प्रक्रिया पीड़ित पक्ष के लिए न्याय की वास्तविकता पर भी सवाल उठाती है।
RashtraPress
21 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जरनैल सिंह पर क्या आरोप था और उन्हें क्या सजा मिली?
जरनैल सिंह पर आरोप था कि उन्होंने 2013 में एक चैरिटेबल ट्रस्ट को आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत प्रमाणपत्र जारी करने के बदले ₹10,000 की रिश्वत माँगी। अहमदाबाद की CBI अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 3 साल कठोर कारावास और ₹20,000 जुर्माने की सजा सुनाई।
CBI ने जरनैल सिंह को कैसे पकड़ा?
CBI ने शिकायतकर्ता की मदद से जाल बिछाया और 22 फरवरी 2013 को जरनैल सिंह को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। उसी दिन उनके विरुद्ध मामला दर्ज किया गया और 2013 में ही आरोपपत्र दाखिल हुआ।
गिरफ्तारी के बाद जरनैल सिंह की सेवा का क्या हुआ?
CBI कार्रवाई के बाद 2013 में उन्हें निलंबित किया गया, लेकिन फरवरी 2014 में बहाल कर दिया गया। बाद में नवंबर 2019 में विभागीय जाँच और आपराधिक मामला लंबित रहते हुए उन्हें मौलिक नियम 56(जे) के तहत समय से पहले सेवानिवृत्त किया गया।
धारा 80जी के तहत कर छूट प्रमाणपत्र क्या होता है?
आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत पंजीकृत चैरिटेबल ट्रस्ट को दान करने वाले दाताओं को कर छूट मिलती है। इस प्रमाणपत्र को जारी करने का अधिकार संबंधित आयकर अधिकारी के पास होता है, जिसका दुरुपयोग इस मामले में किया गया।
यह मामला इतने वर्षों तक अदालत में क्यों चला?
मामला 2013 में दर्ज हुआ और 2026 में फैसला आया — यानी 12 से अधिक वर्ष। भारत में CBI के भ्रष्टाचार-विरोधी मामलों में गवाहों की जाँच, विभागीय कार्यवाही और न्यायिक प्रक्रिया की लंबाई के कारण ऐसी देरी असामान्य नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 घंटे पहले
  2. 4 सप्ताह पहले
  3. 5 महीने पहले
  4. 7 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 9 महीने पहले
  8. 1 साल पहले