गुजरात CM भूपेंद्र पटेल ने साइंस सिटी में 20 कॉकलियर इंप्लांट लाभार्थी बच्चों से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 24 मई 2025 को अहमदाबाद की साइंस सिटी में राज्य सरकार के कॉकलियर इंप्लांट एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर रिप्लेसमेंट प्रोग्राम के अंतर्गत लाभान्वित 20 बच्चों से स्नेहपूर्ण मुलाकात की। इस भेंट में मुख्यमंत्री ने एक अभिभावक की तरह बच्चों के साथ बातचीत की, जिससे बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बच्चों के साथ साइंस सिटी की प्रसिद्ध 'एक्वाटिक गैलरी' का भ्रमण किया और रंग-बिरंगी मछलियों व जलचर प्रजातियों को देखते बच्चों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने बच्चों के साथ सहज बाल-सुलभ बातें कीं, जिससे वहाँ उपस्थित अभिभावकों और अधिकारियों की आँखें भी हर्ष से नम हो गईं। इस अवसर पर खाद्य एवं औषधि आयुक्त डॉ. रतनकंवर गढ़वी चारण और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव पी. भारती भी उपस्थित रहीं।
अभिभावकों की प्रतिक्रिया
अभिभावक सोनलबेन भावसार ने बताया कि विवाह के 13 वर्षों बाद संतान सुख मिला, लेकिन बच्चे के सुनने-बोलने में अक्षम होने की जानकारी से वे टूट गई थीं। आँगनबाड़ी के दौरे के दौरान राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम ने जाँच की और असारवा सिविल हॉस्पिटल में निःशुल्क ऑपरेशन कराया। उन्होंने कहा, 'इस सरकारी योजना ने हमारी बहुत बड़ी आर्थिक और मानसिक मदद की है।'
अभिभावक ऋतुल पंचाल ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व जब उनकी बेटी रूही के दोनों कानों से न सुन पाने का पता चला, तो वे चिंतित हो गए। सोला सिविल हॉस्पिटल के ईएनटी और ऑडियोलॉजी विभाग के मार्गदर्शन में सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न हुई और एक वर्ष की स्पीच थेरेपी के बाद रूही अब पूरी तरह सामान्य रूप से बोलती है।
अभिभावक जैनम शाह ने बताया कि उनकी बेटी हाश्वी जब डेढ़ वर्ष की थी, तब कान की समस्या का पता चला। सोला सिविल हॉस्पिटल में कॉकलियर इंप्लांट ऑपरेशन और स्पीच थेरेपी के बाद आठ महीने में ही हाश्वी अच्छी तरह बोलने लगी। ऑपरेशन के डेढ़ वर्ष बाद साढ़े तीन वर्ष की हाश्वी अब एक सामान्य स्कूल में पढ़ रही है।
योजना का विस्तार और लाभ
कॉकलियर इंप्लांट एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर रिप्लेसमेंट प्रोग्राम गुजरात सरकार द्वारा 6 वर्ष तक की आयु के संपूर्ण बहरेपन से पीड़ित बच्चों के लिए निःशुल्क संचालित किया जाता है। यह कार्यक्रम वर्ष 2014 से 'शाला आरोग्य कार्यक्रम' के अंतर्गत शुरू हुआ है, जिसके तहत अब तक 3,500 से अधिक बच्चों का कॉकलियर इंप्लांट हो चुका है। राज्य के 10 प्रतिष्ठित अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
वर्ष 2024 में राज्य सरकार ने एक संवेदनशील निर्णय लेते हुए यह व्यवस्था की कि जिन बच्चों के एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर खराब, टूट या गुम हो गए हैं, उन्हें एक बार निःशुल्क रिप्लेस किया जाएगा। अब तक 401 बच्चों के स्पीच प्रोसेसर बदले जा चुके हैं। बाज़ार में एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर की अनुमानित कीमत लगभग ₹3.5 लाख है, जो मध्यम और निम्न-आय वर्ग के परिवारों के लिए वहन करना संभव नहीं होता।
तकनीकी पहलू
कॉकलियर इंप्लांट ऑपरेशन के दो मुख्य भाग होते हैं — इंटरनल इंप्लांट और एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर। प्रोसेसर बाहरी ध्वनि को कान में प्रत्यारोपित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तक पहुँचाता है, जहाँ से विद्युत संकेत आंतरिक कान (कॉक्लिया) के माध्यम से मस्तिष्क तक भेजे जाते हैं। एक्सटर्नल स्पीच प्रोसेसर का जीवनकाल लगभग 10 वर्ष होता है और दैनिक उपयोग, नमी, बैटरी की घटती क्षमता या शॉर्ट सर्किट के कारण यह समय से पहले भी खराब हो सकता है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने उपस्थित अभिभावकों से अनुरोध किया कि यदि समाज में अभी भी ऐसे जरूरतमंद बच्चे हों, तो उन्हें और उनके परिवारों को इस योजना का लाभ दिलाने में मार्गदर्शन करें। विशेषज्ञ ईएनटी सर्जन, ऑडियोलॉजिस्ट और स्पीच लैंग्वेज थेरेपिस्ट की समर्पित टीम इस कार्यक्रम को निरंतर प्रभावी बनाने में जुटी है।