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आदिवासी छात्र बन रहे हैं डॉक्टर-इंजीनियर: दाहोद में CM भूपेंद्र पटेल ने 300+ बच्चों का कराया दाखिला

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आदिवासी छात्र बन रहे हैं डॉक्टर-इंजीनियर: दाहोद में CM भूपेंद्र पटेल ने 300+ बच्चों का कराया दाखिला

सारांश

गुजरात के दाहोद में 24वें शाला प्रवेशोत्सव पर CM भूपेंद्र पटेल ने 300 से अधिक आदिवासी बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया। उनका दावा है कि पिछले अभियानों के छात्र अब डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बन चुके हैं — दशकों की शैक्षिक उपेक्षा के बाद आदिवासी इलाकों में बदलाव की एक ठोस तस्वीर।

मुख्य बातें

CM भूपेंद्र पटेल ने 24 जून को दाहोद में 24वें शाला प्रवेशोत्सव के दूसरे दिन 300 से अधिक बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया।
पटेल के अनुसार, पिछले नामांकन अभियानों के छात्र अब डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बन चुके हैं।
स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट और आधुनिक साइंस लैब की सुविधाएँ दी गई हैं।
स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को वापस लाने के लिए शिक्षा विभाग के अधिकारी घर-घर जाकर संपर्क कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदारी की अपील की।

गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बुधवार, 24 जून को दाहोद जिले में 24वें शाला प्रवेशोत्सव के दूसरे दिन कहा कि राज्य के दूरदराज आदिवासी इलाकों के छात्र अब विज्ञान, इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे प्रोफेशनल क्षेत्रों में करियर बना रहे हैं — जो पहले सीमित शिक्षा सुविधाओं के कारण उनकी पहुँच से बाहर था। उन्होंने मोती खराज, राहाडुंगरी और गंगारदा गांवों के स्कूलों में 300 से अधिक बच्चों का दाखिला कराया।

शाला प्रवेशोत्सव: एक जन-अभियान का स्वरूप

पटेल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किया गया स्कूल नामांकन उत्सव आज आदिवासी इलाकों में शिक्षा के विकास का एक विशाल आंदोलन बन चुका है। उनके अनुसार, जो उम्मीदें आदिवासी समुदायों की शिक्षा को लेकर दशकों से अधूरी थीं, वे अब धीरे-धीरे पूरी हो रही हैं।

पटेल ने कहा कि पिछले चरणों के नामांकन अभियानों में जिन बच्चों ने स्कूलों में दाखिला लिया था, वे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बने हैं। यह शिक्षा तक पहुँच बेहतर बनाने के निरंतर प्रयासों के दीर्घकालिक असर को दर्शाता है।

आधुनिक बुनियादी ढाँचे पर ज़ोर

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटी और आधुनिक साइंस लैब की सुविधाएँ उपलब्ध कराई हैं।

उनके अनुसार, इन सुविधाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँवों के छात्र भी आधुनिक तकनीक से सीख सकें और तेज़ी से बदलती दुनिया में प्रतिस्पर्धा कर सकें।

स्कूल छोड़ने वाले बच्चों को वापस लाने की पहल

पटेल ने बताया कि जो बच्चे बीच में पढ़ाई छोड़ चुके थे, उन्हें फिर से शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी ऐसे बच्चों के घर जाकर उनकी कठिनाइयाँ समझ रहे हैं और उन्हें स्कूल लौटने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी अपील की कि वे अपने बच्चों की शिक्षा में सक्रिय भागीदार बनें और उन्हें नियमित रूप से स्कूल भेजें।

आगे की राह

शाला प्रवेशोत्सव जैसे अभियान गुजरात में आदिवासी शिक्षा की दिशा में एक संरचनात्मक बदलाव का संकेत देते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रीय स्तर पर भी आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता और पहुँच को लेकर नीतिगत बहस तेज़ है। राज्य सरकार के अनुसार, आने वाले चरणों में अभियान को और अधिक जिलों तक विस्तारित किया जाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि नामांकन के बाद बच्चे स्कूल में टिकते कितने हैं। गुजरात के आदिवासी जिलों में ड्रॉपआउट दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है, और स्मार्ट क्लासरूम व साइंस लैब की उपस्थिति तब तक अर्थहीन है जब तक प्रशिक्षित शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित न हों। मुख्यमंत्री के दावे कि पिछले छात्र अब डॉक्टर और पायलट बन चुके हैं, प्रेरणादायक हैं, परंतु इन्हें सत्यापित डेटा से पुष्ट करना ज़रूरी है। बिना जवाबदेही तंत्र के, यह अभियान हर साल एक राजनीतिक आयोजन बनकर रह जाने का जोखिम उठाता है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

शाला प्रवेशोत्सव क्या है और यह कब से चल रहा है?
शाला प्रवेशोत्सव गुजरात सरकार का वार्षिक स्कूल नामांकन अभियान है, जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री रहते हुए की थी। इसका उद्देश्य आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को स्कूली शिक्षा से जोड़ना है। 24 जून 2025 को इसका 24वाँ संस्करण दाहोद जिले में आयोजित हुआ।
CM भूपेंद्र पटेल ने दाहोद में कितने बच्चों का दाखिला कराया?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने दाहोद जिले के मोती खराज, राहाडुंगरी और गंगारदा गांवों के स्कूलों में 300 से अधिक बच्चों का दाखिला कराया। यह कार्यक्रम 24वें शाला प्रवेशोत्सव के दूसरे दिन आयोजित हुआ।
गुजरात सरकार ने आदिवासी इलाकों के स्कूलों में क्या सुविधाएँ दी हैं?
राज्य सरकार ने आदिवासी और दूरदराज के इलाकों के स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, कंप्यूटर लैब, इंटरनेट कनेक्टिविटी और आधुनिक साइंस लैब की सुविधाएँ उपलब्ध कराई हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण छात्रों को आधुनिक शिक्षा पद्धति से जोड़ना है।
स्कूल छोड़ने वाले आदिवासी बच्चों को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
शिक्षा विभाग के अधिकारी और कर्मचारी स्कूल छोड़ने वाले बच्चों के घर जाकर उनकी कठिनाइयाँ समझ रहे हैं और उन्हें पुनः दाखिला लेने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। मुख्यमंत्री पटेल ने इस पहल का उल्लेख 24 जून को दाहोद में अपने संबोधन में किया।
क्या आदिवासी छात्र वाकई डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं?
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अनुसार, पिछले शाला प्रवेशोत्सव अभियानों के दौरान नामांकित बच्चे आगे चलकर डॉक्टर, इंजीनियर और पायलट बने हैं। यह दावा सरकारी बयान पर आधारित है और इसे स्वतंत्र आँकड़ों से अभी सत्यापित नहीं किया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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