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वतन प्रेम योजना से बदला नानी भटलाव गांव, ₹17.50 लाख से बनी 24 घंटे निशुल्क लाइब्रेरी गुजरात का रोल मॉडल

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वतन प्रेम योजना से बदला नानी भटलाव गांव, ₹17.50 लाख से बनी 24 घंटे निशुल्क लाइब्रेरी गुजरात का रोल मॉडल

सारांश

एक जर्जर कम्युनिटी हॉल से शुरू हुई यह यात्रा आज दो मंजिला आधुनिक पुस्तकालय तक पहुँची है। ₹17.50 लाख की मिली-जुली राशि और एक युवा सरपंच के संकल्प ने आदिवासी बहुल बारडोली के नानी भटलाव गांव को गुजरात में ग्रामीण शिक्षा का रोल मॉडल बना दिया है।

मुख्य बातें

गुजरात सरकार की वतन प्रेम योजना के तहत बारडोली तालुका के नानी भटलाव गांव में आधुनिक पुस्तकालय स्थापित।
प्रवासी भारतीय प्रतापभाई पंड्या का ₹7 लाख दान और सरकार की ₹10.50 लाख अनुदान राशि से निर्मित दो मंजिला भवन।
लाइब्रेरी 24 घंटे खुली, पूरी तरह निशुल्क ; क्षमता 123 विद्यार्थी , रोज़ाना 100 से अधिक छात्र आते हैं।
आसपास के 15 से 20 गांवों के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए यहाँ आते हैं।
वाई-फाई, सभी विषयों की पुस्तकें, मॉक टेस्ट और परीक्षा केंद्रों तक परिवहन की व्यवस्था उपलब्ध।
दूर से आने वाले विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल निर्माणाधीन।

गुजरात के बारडोली तालुका के नानी भटलाव गांव में गुजरात सरकार की 'वतन प्रेम योजना' के अंतर्गत स्थापित एक आधुनिक पुस्तकालय आज आसपास के 15 से 20 गांवों के विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। प्रवासी भारतीय प्रतापभाई पंड्या के ₹7 लाख के दान और सरकार की ₹10.50 लाख की अनुदान राशि से निर्मित यह दो मंजिला भवन सामुदायिक भागीदारी और सरकारी सहयोग का जीवंत उदाहरण है।

कैसे हुई शुरुआत

नानी भटलाव गांव के युवा सरपंच अंकित चौधरी ने वर्ष 2021 में कोरोना महामारी के दौरान गांव के युवाओं को पढ़ाई की सुविधा देने के उद्देश्य से एक जर्जर कम्युनिटी हॉल में इस पुस्तकालय की नींव रखी थी। तब सीमित संसाधनों के साथ शुरू हुई यह लाइब्रेरी आज वतन प्रेम योजना की बदौलत दो मंजिला आधुनिक भवन में तब्दील हो चुकी है। गौरतलब है कि यह क्षेत्र आदिवासी बहुल है और यहाँ के विद्यार्थियों के पास पहले पढ़ाई के सीमित विकल्प थे।

सुविधाएँ और क्षमता

इस पुस्तकालय की क्षमता 123 विद्यार्थियों की है और रोज़ाना 100 से अधिक छात्र-छात्राएँ यहाँ अध्ययन के लिए आते हैं। लाइब्रेरी 24 घंटे खुली रहती है और पूरी तरह निशुल्क है — किसी भी प्रकार की फीस नहीं ली जाती। सभी विषयों की पुस्तकें, वाई-फाई सुविधा और ऑनलाइन अध्ययन की व्यवस्था यहाँ उपलब्ध है।

इसके अलावा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तर्ज पर मॉक टेस्ट भी आयोजित किए जाते हैं, ताकि विद्यार्थियों को परीक्षा हॉल जैसा अनुभव मिल सके। सरपंच अंकित चौधरी के अनुसार, जिन विद्यार्थियों के परीक्षा केंद्र सूरत, अहमदाबाद या गांधीनगर में होते हैं, उन्हें वहाँ तक पहुँचाने की व्यवस्था भी लाइब्रेरी की ओर से की जाती है।

विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया

पास के गांव बड़वानी से आने वाले विद्यार्थी निश्चल चौधरी ने बताया कि वे पिछले एक साल से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और यह लाइब्रेरी उनके लिए बेहद उपयोगी साबित हुई है। उन्होंने कहा, '24 घंटे लाइब्रेरी खुली होती है, शुल्क नहीं लिया जाता और जो भी किताब चाहिए वो मिल जाती है।'

विद्यार्थी श्वेताबेन चौधरी ने बताया कि यहाँ लड़कियों और लड़कों दोनों के लिए समान सुविधाएँ हैं। उन्होंने कहा, 'यहाँ तक कि कोई एग्जाम है उससे संबंधित कॉम्पिटिटिव टेस्ट भी लिए जाते हैं — एग्जाम में जिस तरह से हॉल में बैठकर एग्जाम देते हैं, वही अनुभव हम यहाँ भी करते हैं।'

सफलता और आगे की राह

बीते वर्षों में इस पुस्तकालय में पढ़ाई करने वाले कई विद्यार्थी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो चुके हैं और सरकारी व निजी क्षेत्र में नौकरी कर रहे हैं। दूर से आने वाले परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए एक हॉस्टल भी निर्माणाधीन है। यह ऐसे समय में आया है जब ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुँच एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। नानी भटलाव की यह लाइब्रेरी अब पूरे गुजरात के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

सामुदायिक दान और सरकारी अनुदान एक साथ काम करते हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या वतन प्रेम योजना के ऐसे मॉडल को व्यवस्थित रूप से दोहराया जा सकता है, या यह किसी एक युवा सरपंच की असाधारण पहल पर निर्भर है? आदिवासी बहुल क्षेत्रों में शिक्षा की पहुँच बढ़ाने के लिए ऐसे प्रयोगों को संस्थागत ढाँचे की ज़रूरत है — केवल प्रेरणादायक कहानियों की नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वतन प्रेम योजना क्या है और इसके तहत नानी भटलाव में क्या हुआ?
वतन प्रेम योजना गुजरात सरकार की एक पहल है जिसके अंतर्गत प्रवासी भारतीयों के दान को सरकारी अनुदान से जोड़कर गाँवों में विकास कार्य किए जाते हैं। बारडोली तालुका के नानी भटलाव गांव में इस योजना के तहत ₹17.50 लाख की संयुक्त राशि से एक जर्जर कम्युनिटी हॉल को आधुनिक दो मंजिला पुस्तकालय में बदला गया।
नानी भटलाव लाइब्रेरी में कौन-कौन सी सुविधाएँ हैं?
यह पुस्तकालय 24 घंटे खुला रहता है और पूरी तरह निशुल्क है। यहाँ सभी विषयों की पुस्तकें, वाई-फाई, ऑनलाइन अध्ययन की व्यवस्था, मॉक टेस्ट और परीक्षा केंद्रों तक परिवहन की सुविधा उपलब्ध है। इसकी बैठक क्षमता 123 विद्यार्थियों की है।
इस लाइब्रेरी से कितने गांवों के विद्यार्थी लाभ उठा रहे हैं?
आसपास के 15 से 20 गांवों के विद्यार्थी नियमित रूप से इस पुस्तकालय में आते हैं। रोज़ाना 100 से अधिक छात्र-छात्राएँ यहाँ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
लाइब्रेरी की शुरुआत कैसे और कब हुई?
युवा सरपंच अंकित चौधरी ने वर्ष 2021 में कोरोना काल के दौरान गांव के युवाओं को पढ़ाई की सुविधा देने के लिए एक जर्जर कम्युनिटी हॉल में इस पुस्तकालय की शुरुआत की थी। बाद में वतन प्रेम योजना के तहत मिली राशि से इसे आधुनिक रूप दिया गया।
आगे इस लाइब्रेरी के विस्तार की क्या योजना है?
दूर से आने वाले परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए एक हॉस्टल निर्माणाधीन है, ताकि वे वहाँ रहकर पढ़ाई कर सकें। बीते वर्षों में यहाँ से पढ़े कई विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर सरकारी व निजी क्षेत्र में नौकरी कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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