30 अक्टूबर 2026
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गुमला पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: AK-56 राइफल, देसी कार्बाइन और गोलियों का जखीरा बरामद, एक गिरफ्तार

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गुमला पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: AK-56 राइफल, देसी कार्बाइन और गोलियों का जखीरा बरामद, एक गिरफ्तार

सारांश

झारखंड के गुमला में पुलिस की सतर्कता ने एक बड़ी आपराधिक साजिश को विफल कर दिया। AK-56 राइफल और देसी कार्बाइन जैसे घातक हथियारों की बरामदगी सवाल उठाती है — इस नेटवर्क के तार कहाँ तक फैले हैं?

मुख्य बातें

गुमला पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को सिसई थाना क्षेत्र में छापेमारी कर बड़ी आपराधिक साजिश नाकाम की।
लाल रंग की संदिग्ध कार से AK-56 राइफल , तीन मैगजीन , देसी कार्बाइन और जिंदा गोलियाँ बरामद।
राजेंद्र यादव को मौके से गिरफ्तार किया गया; मुख्य आरोपी रोहित शर्मा सहित चार-पाँच संदिग्ध फरार।
छापेमारी दल का नेतृत्व SDPO सुरेश प्रसाद यादव ने किया; SP हरीश बिन जमा के निर्देश पर गठित।
हथियारों की आपूर्ति का स्रोत और आपराधिक नेटवर्क के अन्य सदस्यों की पहचान के लिए जाँच जारी।

झारखंड के गुमला जिले की पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को एक बड़ी आपराधिक साजिश को उस वक्त नाकाम कर दिया, जब सिसई थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान एक संदिग्ध लाल रंग की कार से एक AK-56 राइफल, तीन मैगजीन, एक देसी कार्बाइन और बड़ी मात्रा में जिंदा गोलियाँ बरामद की गईं। इस कार्रवाई में पुलिस ने राजेंद्र यादव नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि चार से पाँच अन्य संदिग्ध रात के अंधेरे और घने जंगल की आड़ लेकर मौके से फरार हो गए।

गुप्त सूचना से शुरू हुई छापेमारी

गुमला के पुलिस अधीक्षक हरीश बिन जमा ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस को विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली थी कि सिसई थाना क्षेत्र के निवासी रोहित शर्मा अपने चार-पाँच साथियों के साथ टोली गाँव निवासी राजेंद्र यादव के घर पहुँचे हैं। सूचना के अनुसार इन लोगों के पास अवैध और घातक हथियार थे तथा वे किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।

सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल तत्काल गठित किया गया। इस टीम में सिसई के सर्किल इंस्पेक्टर विनय कुमार सहित सिसई और भरनो थाना के पुलिस पदाधिकारी और जवान शामिल थे।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे पकड़े गए संदिग्ध

जब पुलिस की विशेष टीम टोली गाँव की ओर बढ़ रही थी, तभी रास्ते में एक संदिग्ध लाल रंग की कार दिखाई दी। पुलिस के अनुसार, कार में सवार चार-पाँच लोगों ने जैसे ही पुलिस वाहन देखा, वे घबरा गए और कार छोड़कर भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेरने का प्रयास किया, लेकिन रात के घने अंधेरे और आसपास के सघन जंगल की वजह से अधिकांश संदिग्ध फरार होने में सफल रहे।

इसके बाद पुलिस ने लावारिस छोड़ी गई कार की गहन तलाशी ली। कार के भीतर से एक देसी कार्बाइन, मैगजीन, गोलियाँ और अन्य संदिग्ध सामग्रियाँ बरामद हुईं। मौके से गिरफ्तार राजेंद्र यादव की निशानदेही पर पुलिस ने एक अन्य स्थान की तलाशी ली, जहाँ से AK-56 राइफल और गोलियों का अतिरिक्त जखीरा बरामद किया गया।

बरामद हथियार और उनकी अहमियत

बरामद की गई AK-56 राइफल एक अत्याधुनिक स्वचालित हथियार है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर संगठित अपराध और नक्सली गतिविधियों में होता रहा है। झारखंड जैसे राज्य में, जहाँ वामपंथी उग्रवाद की पृष्ठभूमि रही है, इस तरह के हथियारों की बरामदगी विशेष रूप से संवेदनशील मानी जाती है। गौरतलब है कि गुमला जिला पहले भी अवैध हथियारों की तस्करी और नक्सल गतिविधियों से जुड़ी घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहा है।

जाँच का दायरा और आगे की कार्रवाई

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये अत्याधुनिक हथियार कहाँ से लाए गए और इस आपराधिक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। फरार मुख्य आरोपियों — जिनमें रोहित शर्मा और उसके साथी शामिल हैं — की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी जारी है।

एसपी हरीश बिन जमा ने इस अभियान में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और जवानों की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की त्वरित और सतर्क कार्रवाई की बदौलत एक बड़ी आपराधिक घटना टाली जा सकी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा आने वाले दिनों में जाँच का केंद्र बिंदु रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अपस्ट्रीम आपूर्ति नेटवर्क को तोड़े बिना ऐसी बरामदगियाँ बड़े खतरे का महज एक सिरा ही उजागर करती हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुमला में क्या हथियार बरामद हुए और किसने किए बरामद?
गुमला जिले की पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को सिसई थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान एक AK-56 राइफल, तीन मैगजीन, एक देसी कार्बाइन और बड़ी मात्रा में जिंदा गोलियाँ बरामद कीं। यह कार्रवाई SP हरीश बिन जमा के निर्देश पर SDPO सुरेश प्रसाद यादव के नेतृत्व में गठित विशेष टीम ने की।
इस मामले में कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है?
अब तक एक आरोपी, राजेंद्र यादव, को मौके से गिरफ्तार किया गया है। उसी की निशानदेही पर AK-56 राइफल बरामद हुई। मुख्य आरोपी रोहित शर्मा सहित चार-पाँच अन्य संदिग्ध रात के अंधेरे और घने जंगल का फायदा उठाकर फरार हो गए, जिनकी तलाश जारी है।
पुलिस को इस साजिश की जानकारी कैसे मिली?
पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि रोहित शर्मा अपने साथियों के साथ टोली गाँव में राजेंद्र यादव के घर पहुँचे हैं और उनके पास अवैध हथियार हैं। सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए SP हरीश बिन जमा के निर्देश पर तत्काल एक विशेष छापेमारी दल बनाया गया।
AK-56 राइफल जैसे हथियार झारखंड में क्यों चिंताजनक हैं?
AK-56 एक स्वचालित और अत्याधुनिक हथियार है, जिसका उपयोग आमतौर पर संगठित अपराध या उग्रवाद से जुड़े गिरोहों द्वारा किया जाता है। झारखंड, जो वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्र रहा है, में इस तरह के हथियार की बरामदगी अवैध हथियार तस्करी नेटवर्क की मौजूदगी का संकेत देती है।
अब जाँच किस दिशा में जा रही है?
पुलिस मुख्य रूप से दो सवालों का जवाब तलाश रही है — हथियारों का स्रोत क्या है और इस आपराधिक नेटवर्क में कौन-कौन शामिल हैं। फरार आरोपियों के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और गिरफ्तार राजेंद्र यादव से पूछताछ जारी है।
राष्ट्र प्रेस
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