गुमला पुलिस ने नाकाम की बड़ी साजिश: AK-56 राइफल, देसी कार्बाइन और गोलियों का जखीरा बरामद, एक गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के गुमला जिले की पुलिस ने 29 अक्टूबर 2026 को एक बड़ी आपराधिक साजिश को उस वक्त नाकाम कर दिया, जब सिसई थाना क्षेत्र में छापेमारी के दौरान एक संदिग्ध लाल रंग की कार से एक AK-56 राइफल, तीन मैगजीन, एक देसी कार्बाइन और बड़ी मात्रा में जिंदा गोलियाँ बरामद की गईं। इस कार्रवाई में पुलिस ने राजेंद्र यादव नामक एक आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि चार से पाँच अन्य संदिग्ध रात के अंधेरे और घने जंगल की आड़ लेकर मौके से फरार हो गए।
गुप्त सूचना से शुरू हुई छापेमारी
गुमला के पुलिस अधीक्षक हरीश बिन जमा ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस को विश्वसनीय गुप्त सूचना मिली थी कि सिसई थाना क्षेत्र के निवासी रोहित शर्मा अपने चार-पाँच साथियों के साथ टोली गाँव निवासी राजेंद्र यादव के घर पहुँचे हैं। सूचना के अनुसार इन लोगों के पास अवैध और घातक हथियार थे तथा वे किसी बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे थे।
सूचना की गंभीरता को देखते हुए एसपी के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सुरेश प्रसाद यादव के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल तत्काल गठित किया गया। इस टीम में सिसई के सर्किल इंस्पेक्टर विनय कुमार सहित सिसई और भरनो थाना के पुलिस पदाधिकारी और जवान शामिल थे।
मुख्य घटनाक्रम: कैसे पकड़े गए संदिग्ध
जब पुलिस की विशेष टीम टोली गाँव की ओर बढ़ रही थी, तभी रास्ते में एक संदिग्ध लाल रंग की कार दिखाई दी। पुलिस के अनुसार, कार में सवार चार-पाँच लोगों ने जैसे ही पुलिस वाहन देखा, वे घबरा गए और कार छोड़कर भागने लगे। पुलिसकर्मियों ने उन्हें घेरने का प्रयास किया, लेकिन रात के घने अंधेरे और आसपास के सघन जंगल की वजह से अधिकांश संदिग्ध फरार होने में सफल रहे।
इसके बाद पुलिस ने लावारिस छोड़ी गई कार की गहन तलाशी ली। कार के भीतर से एक देसी कार्बाइन, मैगजीन, गोलियाँ और अन्य संदिग्ध सामग्रियाँ बरामद हुईं। मौके से गिरफ्तार राजेंद्र यादव की निशानदेही पर पुलिस ने एक अन्य स्थान की तलाशी ली, जहाँ से AK-56 राइफल और गोलियों का अतिरिक्त जखीरा बरामद किया गया।
बरामद हथियार और उनकी अहमियत
बरामद की गई AK-56 राइफल एक अत्याधुनिक स्वचालित हथियार है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर संगठित अपराध और नक्सली गतिविधियों में होता रहा है। झारखंड जैसे राज्य में, जहाँ वामपंथी उग्रवाद की पृष्ठभूमि रही है, इस तरह के हथियारों की बरामदगी विशेष रूप से संवेदनशील मानी जाती है। गौरतलब है कि गुमला जिला पहले भी अवैध हथियारों की तस्करी और नक्सल गतिविधियों से जुड़ी घटनाओं के कारण सुर्खियों में रहा है।
जाँच का दायरा और आगे की कार्रवाई
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये अत्याधुनिक हथियार कहाँ से लाए गए और इस आपराधिक नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। फरार मुख्य आरोपियों — जिनमें रोहित शर्मा और उसके साथी शामिल हैं — की गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी जारी है।
एसपी हरीश बिन जमा ने इस अभियान में शामिल सभी पुलिस अधिकारियों और जवानों की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस की त्वरित और सतर्क कार्रवाई की बदौलत एक बड़ी आपराधिक घटना टाली जा सकी। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी और हथियारों की आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा आने वाले दिनों में जाँच का केंद्र बिंदु रहेगा।