मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, साम्या कोर्डे का आरोप — पुलिस दबा रही शांतिपूर्ण आंदोलन
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में 19 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रोग्रेसिव स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष साम्या कोर्डे ने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन की अनुमति न मिलने पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोर्डे ने आरोप लगाया कि सरकार पुलिस के माध्यम से नागरिकों के शांतिपूर्ण आंदोलन को दबाने की कोशिश कर रही है।
मुख्य घटनाक्रम
कार्टर रोड, मुंबई पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले कोर्डे ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई और हिरासत की घटनाओं के कारण कई लोग प्रदर्शन में शामिल होने से डर रहे थे। उन्होंने सौरभ दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में रखे जाने तथा अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी का विशेष उल्लेख किया। कोर्डे के अनुसार, मुंबई पुलिस का रवैया दिल्ली में देखी गई कार्रवाइयों जैसा ही है।
पुलिस का रवैया — कोर्डे के आरोप
कोर्डे ने दावा किया कि जुलाई 2026 से अब तक पुलिस तीन बार उनके घर पहुँच चुकी है। उनके अनुसार, उनके घर में पाँच लोग रहते हैं, फिर भी पुलिस 20 से 25 अधिकारियों और चार गाड़ियों के साथ आती है। उन्होंने बताया कि पुलिस सुबह नौ बजे से रात आठ बजे तक घर के आसपास मौजूद रहती है, जबकि प्रदर्शन का निर्धारित समय शाम चार बजे होता है।
कोर्डे ने सवाल उठाया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराना यदि संविधान-प्रदत्त नागरिक अधिकार है, तो इस प्रकार की कार्रवाई क्यों की जा रही है। उनके अनुसार, ऐसी परिस्थितियाँ लोकतंत्र में मूलभूत अधिकारों पर प्रश्नचिह्न लगाती हैं।
प्रदर्शनकारियों की भागीदारी
पुलिस की बैरिकेडिंग और अनुमति न मिलने की जानकारी के बावजूद सैकड़ों नागरिक प्रदर्शन स्थल पर पहुँचे। कुछ प्रदर्शनकारियों को रात करीब पौने दस बजे छोड़ा गया, जबकि कुछ महिलाओं को शाम छह बजे के बाद तक हिरासत में रखा गया। कोर्डे के अनुसार, प्रदर्शन में ऐसे लोग भी शामिल हुए जिनके नाम कथित तौर पर एसआईआर (विशेष सारांश पुनरीक्षण) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से काटे जाने की बात कही गई है या जिन्हें इस संबंध में नोटिस मिले हैं।
आंदोलन को कमज़ोर करने का आरोप
कोर्डे ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों को आज़ाद मैदान जैसी ऐसी जगहों पर प्रदर्शन की अनुमति देती है जहाँ आम लोगों की पहुँच अपेक्षाकृत कठिन होती है। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग स्थानों पर भेजकर आंदोलन को कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।
आगे की राह
कोर्डे ने स्पष्ट कहा कि जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, वे और उनके साथी विरोध प्रदर्शनों में भाग लेते रहेंगे। उन्होंने पुलिस से माँग की कि कानून-व्यवस्था की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति दी जाए। गौरतलब है कि यह आंदोलन अब केवल छात्र संगठनों तक सीमित नहीं रहा — आम नागरिक भी इसमें जुड़ रहे हैं, जो इसकी व्यापकता को रेखांकित करता है।