21 सितंबर 2026
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हन्नान मोल्लाह का ममता पर हमला: '1997 में कांग्रेस तोड़ी, अब उन्हीं के पैर पकड़ रही हैं'

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हन्नान मोल्लाह का ममता पर हमला: '1997 में कांग्रेस तोड़ी, अब उन्हीं के पैर पकड़ रही हैं'

सारांश

सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने ममता बनर्जी के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस समर्थन को 'पाखंड' बताया और याद दिलाया कि 1997 में उन्होंने खुद कांग्रेस तोड़कर TMC बनाई थी। यह बयान विपक्षी एकता की बढ़ती亲दरारों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

हन्नान मोल्लाह ने ममता बनर्जी के नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के फैसले को 'पाखंड' करार दिया।
मोल्लाह के अनुसार, ममता ने 1997 में कांग्रेस तोड़कर तृणमूल कांग्रेस (TMC) बनाई थी और अब उसी पार्टी की शरण ले रही हैं।
उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा — कहा कि पार्टी 'फासीवाद के खिलाफ' विपक्षी एकता की अपनी ऐतिहासिक भूमिका नहीं निभा रही।
बाबा रामदेव के आरक्षण-विरोधी कथित बयान को मोल्लाह ने खारिज किया; कहा देश के 35 प्रतिशत लोगों की रक्षा के लिए आरक्षण दिया गया था।
मोल्लाह ने BJP और आरएसएस पर आरोप लगाया कि वे आरक्षण समाप्त करना चाहते हैं।

सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने 21 सितंबर 2026 को तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला, जब उन्होंने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषणा की। मोल्लाह ने इसे खुला 'पाखंड' करार देते हुए कहा कि जिस नेता ने दशकों पहले कांग्रेस को तोड़कर अलग दल बनाया, वही आज उसी पार्टी की शरण में है।

मुख्य घटनाक्रम

हन्नान मोल्लाह ने कहा, 'उनमें उम्मीदवार उतारने की क्षमता नहीं है, उनकी पार्टी का कोई नाम नहीं है, उन्हें बिना नाम के चुनाव लड़ना है, उनमें हिम्मत नहीं है, उन्हें बिना चुनाव चिह्न के लड़ना है। जिस व्यक्ति ने कांग्रेस को तोड़ा था, वही अब कांग्रेस के पैर पकड़ रही है।' उनके अनुसार, 1997 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर आरएसएस के कथित नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी।

मोल्लाह ने कहा कि 'आज जब आरएसएस भी उन्हें बाहर निकाल रहा है, तो वह कांग्रेस के पास जा रही हैं। इसे ही राजनीति या कहीं भी पाखंड कहा जाता है, जहाँ दोहरी चालें चली जाती हैं।'

कांग्रेस की भूमिका पर सीपीआई (एम) का रुख

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी द्वारा जवाहरलाल नेहरू के पुराने बयान का संदर्भ देने पर मोल्लाह ने कांग्रेस की आंतरिक कमज़ोरियों को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि 'आज कांग्रेस की कमज़ोरी यह है कि वह अपनी भूमिका नहीं निभा रही है जो उसे निभानी चाहिए।'

उनके अनुसार, देश में लोकतंत्र और संविधान को लेकर गंभीर खतरे हैं और ऐसे हालात में कांग्रेस को सभी विरोधी ताकतों को एकजुट करने की भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'पहली लड़ाई फासीवाद के खिलाफ है। अभी बाकी सब भूल जाइए, पहले फासीवाद को हराइए, फिर दूसरे मुद्दे आएंगे।' यह बयान कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर वाम दलों के बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।

आरक्षण विवाद: रामदेव के बयान पर प्रतिक्रिया

योग गुरु बाबा रामदेव ने कथित तौर पर कहा है कि सवर्ण समाज और एससी-एसटी सहित कई पिछड़े समुदायों के बीच आपसी दूरी बढ़ रही है और संविधान में समानता के बावजूद शिक्षण संस्थाओं में दाखिले के समय जाति के आधार पर आरक्षण दिया जाता है।

हन्नान मोल्लाह ने इस बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि संविधान में दिए गए प्रावधान को मानना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि 'हमारे देश के करीब 35 प्रतिशत लोगों को सवर्णों के अत्याचार से बचाने के लिए आरक्षण दिया था।' उनके अनुसार दलितों और आदिवासियों का प्रतिदिन आर्थिक शोषण होता है और संविधान निर्माताओं ने इसी वास्तविकता को देखते हुए आरक्षण की व्यवस्था की।

मोल्लाह ने आरोप लगाया कि 'आज के समय में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और आरएसएस आरक्षण को खत्म करना चाहती है' और आम जनता से इसके खिलाफ लड़ाई लड़ने का आह्वान किया।

राजनीतिक संदर्भ और महत्व

गौरतलब है कि नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक संवेदनशील क्षेत्र रहा है और यहाँ का उपचुनाव विपक्षी एकता की परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब इंडिया गठबंधन में आंतरिक समन्वय को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

सीपीआई (एम) और तृणमूल कांग्रेस का पश्चिम बंगाल में दशकों पुराना राजनीतिक टकराव है, और मोल्लाह का यह हमला उसी पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि ममता बनर्जी का कांग्रेस को समर्थन देना वाम दलों के लिए एक रणनीतिक असुविधा पैदा करता है।

क्या होगा आगे

नंदीग्राम उपचुनाव के नतीजे विपक्षी ब्लॉक के भीतर TMC और कांग्रेस के संबंधों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। वाम दलों की प्रतिक्रिया यह स्पष्ट करती है कि विपक्षी एकता की राह आसान नहीं है और आगामी चुनावों में सीट-साझेदारी को लेकर तनाव और गहरा हो सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और ममता का कांग्रेस से क़रीब आना उनके लिए राजनीतिक स्थान और सिद्धांत दोनों का सवाल है। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है, वह यह है कि आरक्षण पर मोल्लाह का बयान और फासीवाद-विरोध का आह्वान एक साथ एक रणनीतिक संदेश देते हैं — कि वामपंथ अपनी पहचान को TMC या कांग्रेस की छाया में नहीं खोएगा। नंदीग्राम उपचुनाव इस तनाव की असली कसौटी बनेगा।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हन्नान मोल्लाह ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
सीपीआई (एम) के पूर्व सांसद हन्नान मोल्लाह ने ममता बनर्जी को 'पाखंडी' बताया और कहा कि उन्होंने 1997 में कांग्रेस तोड़कर TMC बनाई थी और अब उसी कांग्रेस का समर्थन ले रही हैं। उन्होंने इसे 'दोहरी चाल' करार दिया।
नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी ने कांग्रेस को समर्थन क्यों दिया?
ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का फैसला किया है। इसे विपक्षी एकता की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि TMC ने खुद उम्मीदवार नहीं उतारा।
हन्नान मोल्लाह ने आरक्षण पर क्या कहा?
हन्नान मोल्लाह ने कहा कि देश के करीब 35 प्रतिशत लोगों — दलितों और आदिवासियों — को ऐतिहासिक अत्याचार से बचाने के लिए संविधान निर्माताओं ने आरक्षण दिया था। उन्होंने बाबा रामदेव के आरक्षण-विरोधी कथित बयान को खारिज किया और BJP व आरएसएस पर आरक्षण समाप्त करने की मंशा रखने का आरोप लगाया।
सीपीआई (एम) और तृणमूल कांग्रेस के बीच टकराव की पृष्ठभूमि क्या है?
पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) और तृणमूल कांग्रेस का दशकों पुराना राजनीतिक टकराव है। 2011 में ममता बनर्जी ने 34 साल पुरानी वाम सरकार को सत्ता से बेदखल किया था, तब से दोनों दलों के बीच कटु राजनीतिक संबंध रहे हैं।
हन्नान मोल्लाह ने कांग्रेस की किस कमज़ोरी की ओर इशारा किया?
हन्नान मोल्लाह ने कहा कि कांग्रेस फासीवाद-विरोधी विपक्षी गठबंधन को एकजुट करने की अपनी ऐतिहासिक भूमिका नहीं निभा पा रही। उनके अनुसार, इस समय सभी विपक्षी दलों को पहले 'फासीवाद को हराने' को प्राथमिकता देनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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