30 अक्टूबर 2026
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हन्नान मोल्लाह का BJP पर दोहरे मापदंड का आरोप: रामलीला मैदान रैली रोकने के लिए बहाने बना रही सरकार

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हन्नान मोल्लाह का BJP पर दोहरे मापदंड का आरोप: रामलीला मैदान रैली रोकने के लिए बहाने बना रही सरकार

सारांश

सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने BJP पर रामलीला मैदान रैली रोकने के लिए व्यापार बाधा का बहाना बनाने का आरोप लगाया। CTI की ₹12,000 करोड़ नुकसान की चेतावनी को उन्होंने 'झूठ' करार दिया। इसी बीच बारिश के चलते CEC के खिलाफ 'मॉक महाभियोग' कार्यक्रम शनिवार तक टल गया।

मुख्य बातें

सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने BJP पर 30 अक्टूबर को दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया।
CTI ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से 1 नवंबर की रामलीला मैदान रैली दीपावली तक टालने का आग्रह किया।
CTI के अनुसार रैली से दिल्ली के 30 प्रमुख बाजारों में ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ के व्यापार पर असर पड़ सकता है।
मोल्लाह ने इन चिंताओं को 'बहाना' और 'झूठ' बताते हुए कहा कि एक दिन की रैली से बाजार बंद नहीं होते।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 'पीपल्स इम्पीचमेंट' कार्यक्रम बारिश के कारण स्थगित, अब 31 अक्टूबर को होगा।

सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर दोहरे मापदंड अपनाने का तीखा आरोप लगाया। यह विवाद 1 नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रस्तावित कांग्रेस की रैली को लेकर व्यापार बाधित होने की चिंताओं के बीच उभरा है।

विवाद की पृष्ठभूमि

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता सोनिया गांधी से आग्रह किया कि प्रस्तावित रैली को दीपावली तक टाल दिया जाए। CTI का तर्क था कि इस रैली से दिल्ली के 30 प्रमुख बाजारों में कामकाज बाधित हो सकता है और ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ के व्यापार पर असर पड़ सकता है।

गौरतलब है कि यह रैली विपक्षी गठबंधन की एक बड़ी जनसभा के रूप में योजनाबद्ध है। दीपावली के नज़दीक होने के कारण व्यापारी वर्ग ने इसे लेकर चिंता जताई है।

मोल्लाह की तीखी प्रतिक्रिया

हन्नान मोल्लाह ने इन चिंताओं को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ये सब बहाने हैं, क्योंकि सरकार घबराई हुई है। उन्होंने कहा, 'पहले उन्होंने अनुमति दी, अब वे इसे रोक नहीं सकते, इसलिए इसे रोकने के लिए तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। यह सब झूठ और गुमराह करने वाला है। एक दिन की रैली से बाजार बंद नहीं होते और न ही कामकाज रुकता है, बाजार चलते रहते हैं।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि ये तमाम तर्क विपक्ष की रैली को बदनाम करने के प्रयास मात्र हैं। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता को परखने वाले कई बड़े आयोजन राजनीतिक विवादों में घिर रहे हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ 'मॉक महाभियोग' कार्यक्रम

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी गठबंधन के प्रस्तावित 'पीपल्स इम्पीचमेंट' कार्यक्रम पर मोल्लाह ने कहा कि इसका उद्देश्य CEC के खिलाफ लगे आरोपों को जनता के सामने लाना और जागरूकता फैलाना है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक 'मॉक' संसदीय सत्र होगा। उनके अनुसार, 'गठबंधन में यह फैसला लिया गया है कि उन पर महाभियोग चलाया जाएगा। आधिकारिक तौर पर महाभियोग संसद में होता है, लेकिन यह एक प्रतीकात्मक सत्र होगा — इसका मतलब है कि इसका उद्देश्य प्रचार करना और जागरूकता फैलाना है।'

कार्यक्रम में क्या होगा

मोल्लाह ने बताया कि इस कार्यक्रम में CEC के खिलाफ लगे आरोप पेश किए जाएँगे, उन पर चर्चा होगी और अंत में एक प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पारित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका चुनावी महत्व है क्योंकि यह दर्शाएगा कि संसद सदस्यों ने CEC के खिलाफ महाभियोग के पक्ष में अपनी राय दी है।

बारिश से कार्यक्रम स्थगित, अब शनिवार को होगा

राष्ट्रीय राजधानी में बारिश के कारण विपक्षी गठबंधन को यह 'मॉक महाभियोग' कार्यक्रम स्थगित करना पड़ा, जो मूल रूप से शुक्रवार दोपहर के लिए निर्धारित था। अब यह कार्यक्रम शनिवार, 31 अक्टूबर को आयोजित होगा।

राजधानी की राजनीति में इन दो घटनाक्रमों — रामलीला मैदान रैली और मॉक महाभियोग सत्र — के एक साथ उभरने से विपक्ष की आक्रामक रणनीति का संकेत मिलता है, जो आने वाले हफ्तों में और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 करोड़ नुकसान की चेतावनी व्यावसायिक चिंता कम, राजनीतिक दबाव अधिक लगती है — क्योंकि दिल्ली में नियमित धार्मिक और सरकारी आयोजनों के दौरान भी यही बाजार खुले रहते हैं। असली सवाल यह है कि विपक्षी गठबंधन का 'मॉक महाभियोग' सत्र संवैधानिक जवाबदेही का औजार है या चुनावी नाटक — जिसका जवाब उसके व्यापक जन-समर्थन से तय होगा। CEC के खिलाफ प्रतीकात्मक कार्यवाही का इतिहास बताता है कि ऐसे आयोजन सुर्खियाँ तो बटोरते हैं, पर संस्थागत बदलाव की सूई शायद ही हिलाते हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हन्नान मोल्लाह ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
सीपीआई (एम) नेता हन्नान मोल्लाह ने BJP पर 1 नवंबर की रामलीला मैदान कांग्रेस रैली को रोकने के लिए व्यापार बाधा का बहाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक दिन की रैली से बाजार बंद नहीं होते और ये तर्क विपक्ष को बदनाम करने के प्रयास हैं।
CTI ने रैली को लेकर क्या चिंता जताई?
चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दावा किया कि 1 नवंबर की कांग्रेस रैली से दिल्ली के 30 प्रमुख बाजारों में ₹10,000 से ₹12,000 करोड़ के व्यापार पर असर पड़ सकता है। CTI ने सोनिया गांधी से रैली दीपावली तक टालने का अनुरोध किया।
'मॉक महाभियोग' या 'पीपल्स इम्पीचमेंट' कार्यक्रम क्या है?
यह विपक्षी गठबंधन द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित एक प्रतीकात्मक संसदीय सत्र है, जो कोई औपचारिक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है। इसका उद्देश्य CEC पर लगे आरोपों को सार्वजनिक रूप से पेश करना और जागरूकता फैलाना है।
'मॉक महाभियोग' कार्यक्रम कब होगा?
यह कार्यक्रम मूल रूप से 30 अक्टूबर को दोपहर के लिए निर्धारित था, लेकिन नई दिल्ली में बारिश के कारण इसे स्थगित करना पड़ा। अब यह 31 अक्टूबर, शनिवार को आयोजित होगा।
रामलीला मैदान रैली का राजनीतिक महत्व क्या है?
1 नवंबर की यह रैली विपक्षी गठबंधन की एकजुटता का प्रदर्शन है, जो दिल्ली के केंद्र में आयोजित हो रही है। इसे सरकार के खिलाफ विपक्ष की बढ़ती आक्रामक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें CEC के खिलाफ मॉक महाभियोग भी शामिल है।
राष्ट्र प्रेस
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