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हरीश रावत का दुष्यंत गौतम पर पलटवार: ‘नेताओं को शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए’

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हरीश रावत का दुष्यंत गौतम पर पलटवार: ‘नेताओं को शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए’

सारांश

अल्मोड़ा से पूर्व सीएम हरीश रावत ने भाजपा नेता दुष्यंत गौतम की राहुल गांधी पर टिप्पणी को अमर्यादित बताते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद का सम्मान होना चाहिए। उन्होंने सेना अपमान के आरोपों को तथ्यहीन करार दिया और कहा कि राहुल गांधी सैन्य आधुनिकीकरण व पूर्व सैनिकों के मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं।

मुख्य बातें

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अल्मोड़ा में 3 जून को दुष्यंत गौतम की टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
रावत ने टिप्पणी को ‘अमर्यादित और निंदनीय’ बताते हुए नेता प्रतिपक्ष के पद के सम्मान की बात कही।
उन्होंने राहुल गांधी पर सेना अपमान के आरोपों को ‘तथ्यहीन’ करार दिया।
रावत के अनुसार राहुल गांधी सैन्य आधुनिकीकरण और पूर्व सैनिकों के अधिकारों के मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं।
विवाद ऐसे समय आया है जब सेना से जुड़े बयानों पर सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच बयानबाज़ी तेज़ है।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 3 जून को अल्मोड़ा में भाजपा नेता दुष्यंत गौतम द्वारा कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर की गई टिप्पणी को ‘अमर्यादित और निंदनीय’ करार दिया। रावत ने कहा कि किसी राष्ट्रीय पार्टी के शीर्ष नेता के बारे में ऐसी भाषा का प्रयोग किसी भी जिम्मेदार राजनीतिक व्यक्ति को शोभा नहीं देता।

मुख्य प्रतिक्रिया

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं को अपने शब्दों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए। उन्होंने जोड़ा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और नेता प्रतिपक्ष के संवैधानिक पद का सम्मान किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री के बयान पर जवाब

राहुल गांधी को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के बयान पर भी रावत ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह कहना ‘पूरी तरह गलत और तथ्यहीन’ है कि राहुल गांधी सेना का अपमान करते हैं या विदेश जाकर भारत को बदनाम करते हैं। रावत के अनुसार, यह आरोप सच्चाई से बहुत दूर है।

सेना और सैनिकों का मुद्दा

रावत ने कहा कि राहुल गांधी लगातार सेना, सैनिकों और पूर्व सैनिकों से जुड़े मुद्दों को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक विपक्षी नेता होने के नाते यह उनका दायित्व है कि वे देश की सुरक्षा से जुड़े मामलों और सैनिकों की समस्याओं को सामने रखें।

पूर्व मुख्यमंत्री के अनुसार, राहुल गांधी आधुनिक हथियारों, बेहतर संसाधनों और बदलते समय के अनुसार सैन्य ढांचे को सक्षम बनाने की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में युद्ध और सुरक्षा की चुनौतियां तेजी से बदल रही हैं, ऐसे में सेना का आधुनिकीकरण बेहद जरूरी है।

राजनीतिक शिष्टाचार पर सवाल

रावत ने दोहराया कि राहुल गांधी सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों को लेकर हमेशा संवेदनशील रहे हैं और कई मौकों पर उनके अधिकारों व सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। उनका कहना है कि इसलिए यह आरोप कि वे सेना के खिलाफ हैं, पूरी तरह निराधार है। गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से सेना से जुड़े बयानों पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाज़ी लगातार तीखी होती जा रही है, और यह विवाद उसी सिलसिले की एक और कड़ी माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि कांग्रेस की उस रणनीतिक कोशिश का हिस्सा है जिसमें वह राहुल गांधी पर लगातार हो रहे ‘सेना विरोधी’ हमलों का तथ्यात्मक जवाब देने की कोशिश कर रही है। उत्तराखंड जैसे सैन्य-बहुल राज्य में, जहाँ हर परिवार से कोई न कोई सेना से जुड़ा है, यह नैरेटिव-युद्ध चुनावी रूप से निर्णायक है। हरीश रावत का अल्मोड़ा से बोलना संयोग नहीं — यह कांग्रेस का संदेश है कि वह भाजपा के राष्ट्रवाद-प्रधान फ्रेम को पहाड़ी सीटों पर चुनौती देने को तैयार है। असली परीक्षा यह है कि क्या ज़ुबानी मर्यादा की यह माँग दोनों पक्षों पर समान रूप से लागू होती है।
RashtraPress
19 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हरीश रावत ने किस टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है?
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा नेता दुष्यंत गौतम द्वारा कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को लेकर की गई टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे ‘अमर्यादित और निंदनीय’ बताते हुए कहा कि नेता प्रतिपक्ष के पद का सम्मान होना चाहिए।
रावत ने राहुल गांधी पर सेना अपमान के आरोप पर क्या कहा?
रावत ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत और तथ्यहीन है कि राहुल गांधी सेना का अपमान करते हैं या विदेश में भारत को बदनाम करते हैं। उनके अनुसार राहुल गांधी सैनिकों, पूर्व सैनिकों और सैन्य आधुनिकीकरण के मुद्दे लगातार उठाते रहे हैं।
यह विवाद कहाँ और कब हुआ?
यह विवाद 3 जून को उत्तराखंड के अल्मोड़ा में सामने आया, जहाँ हरीश रावत ने मीडिया से बात करते हुए भाजपा नेता की टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दर्ज कराई।
हरीश रावत ने नेता प्रतिपक्ष के पद को लेकर क्या कहा?
रावत ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका होती है और नेता प्रतिपक्ष का पद संवैधानिक रूप से सम्मानजनक है। उन्होंने जोड़ा कि इस पद के बारे में अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ है।
राष्ट्र प्रेस
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