एनडीए सरकारों के सहयोग से रोजगार में सुधार होगा: राजीव रंजन प्रसाद
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस का जनाधार कमजोर हो रहा है।
- राजीव रंजन ने टीएमसी सरकार के निर्णयों पर नाराजगी जताई।
- लोग बदलाव की मांग कर रहे हैं और भाजपा की ओर देख रहे हैं।
- कांग्रेस के भीतर स्थिति विस्फोटक हो गई है।
- असम कांग्रेस की स्थिति और खराब हो सकती है।
पटना, १८ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। असम में कांग्रेस के भीतर चल रहे राजनीतिक संकट पर जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी पहले से ही इस बात का दावा कर रही थी कि कांग्रेस के विधायकों का जनाधार कमजोर हो चुका है और उनकी लोकप्रियता जनता के बीच निरंतर घट रही है।
राजीव रंजन ने राष्ट्र प्रेस से कहा कि टीएमसी सरकार के निर्णयों और जनप्रतिनिधियों के व्यवहार को लेकर लोगों में काफी नाराजगी है। उन्होंने इसे ‘डैमेज कंट्रोल की असफल कोशिश’ करार देते हुए कहा कि इसका कोई लाभ नहीं होगा। इसके विपरीत, यह साफ हो गया है कि ममता बनर्जी ने खुद स्वीकार किया है कि उनके विधायक जनता के बीच लोकप्रिय नहीं थे।
उन्होंने आगे कहा कि अब लोग बदलाव की तलाश में हैं और भारतीय जनता पार्टी की ओर देख रहे हैं। यदि केंद्र और राज्य में एक ही गठबंधन की सरकार बनेगी, तो इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, कारखाने खुलेंगे और लोगों के जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल में लंबे समय से कई उद्योग बंद पड़े हैं और जनता को रोजगार नहीं मिल रहा, जिससे लोग अब बदलाव के मूड में हैं।
कांग्रेस पर तंज कसते हुए राजीव रंजन ने कहा कि राहुल गांधी ने देश को निराश किया है। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष से जो अपेक्षाएं होती हैं, कांग्रेस उन्हें पूरा करने में लगातार असफल रही है। हाल के दिनों में राहुल गांधी के बयान भी संसदीय गरिमा के अनुरूप नहीं रहे हैं और उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए।
राजीव रंजन प्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि राहुल गांधी के निर्णयों और बयानों के कारण कांग्रेस के भीतर हालात ‘विस्फोटक’ हो गए हैं। पार्टी के नेता क्रॉस वोटिंग कर रहे हैं और खुले तौर पर पार्टी के निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिससे संगठन को एकजुट रखना मुश्किल होता जा रहा है।
हालाँकि, उन्होंने इसे कांग्रेस का अंदरूनी मामला बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए कांग्रेस का मजबूत होना आवश्यक है, लेकिन पार्टी धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।
असम कांग्रेस की स्थिति पर उन्होंने कहा कि यदि इस्तीफों का सिलसिला जारी रहा, तो कांग्रेस की स्थिति और खराब हो सकती है और उसका राजनीतिक भविष्य संकट में पड़ सकता है।